…तो बसंत शर्मा की मौत नहीं होती, अपोलो अस्पताल में बेड मिलने में 3 दिन लग गए, तब तक संक्रमण बढ़ गया

Update: 2021-04-25 07:47 GMT

बिलासपुर, 25 अप्रैल 2021। शहर के लोकप्रिय कांग्रेस नेता एवं डीएलएस कॉलेज के चेयरमैन बसंत शर्मा की मौत पर 50 से अधिक कांग्रेस नेताओं ने दुख व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की है। पर ये कड़वी सच्चाई है कि कांग्रेस नेता अगर ढंग से प्रयास कर बसंत शर्मा को बेड मुहैया करवा दिए होते तो ये स्थिति नहीं आई होती।
प्रदेश में कांग्रेस की सरकार होने के बाद भी बसंत के परिजन अपोलो अस्पताल में अदद एक बेड के लिए नेताओं से मिन्नतें करते रहे। कई विधायकों से दरख्वास्त किये। इसमें 3 दिन निकल गए। बसंत उसलापुर के ओंकार अस्पताल में जीवन-मौत से जूझते रहे। आशीष सिंह ठाकुर से बसंत के पारिवारिक संबंध है। आशीष ने विधानसभा अध्यक्ष चरणदास महंत से बात की। महंत ने अपोलो अस्पताल को फोन किया। तब जाकर तीसरे दिन बसंत को अस्पताल में जगह मिल पाई। तब तक फेफड़े का इंफेक्शन काफी बढ़ गया था। बावजूद इसके बसंत आठ दिन तक मौत से लड़ते रहे। फिर, वो मनहूस समय आया, जब मौत ने चकमा देकर उन्हें अपना शिकार बना लिया। जाहिर सी बात है, बसंत को तीन दिन पहले अगर अपोलो में बेड उपलब्ध हो गया होता तो फेफड़े का संक्रमण कंट्रोल हो गया होता।
अब जैसा होता है, कांग्रेस नेताओं ने लंबी-चौड़ी प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बसंत के लिए आंसू बहाए हैं।

Tags:    

Similar News