बस्तर के कलात्मक रूप से रुबरू हो रही दुनिया... मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की बड़ी पहल है 'बादल'
बस्तर के कलात्मक रूप से रुबरू हो रही दुनिया...
रायपुर 14 मई 2022। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की बड़ी पहल है 'बादल'बादल यानी बस्तर अकादमी ऑफ डांस, आर्ट, लिटरेचर एंड लैंग्वेज इस अकादमी में पर्यटक से लेकर छात्रों को जनजातीय संस्कृति को करीब से जानने का अवसर मिलेगा। साथ ही यहां शोध भी किया जा सकेगा। इस अकादमी को रिसोर्स सेंटर का रूप दिया जा रहा है।
बस्तर का एक रूप यहां की कलात्मकता, बस्तर की रचनाधर्मिता है। बस्तर के इसी रूप से बाकी दुनिया को परिचित कराने राज्य सरकार ने नई पहल की है। बस्तर की तस्वीर पर छाए काले कोहरे को हटाने राज्य सरकार 'बादल' लेकर आयी है. यह बादल है - 'बस्तर अकादमी ऑफ डांस, आर्ट, लिटरेचर एण्ड लैंग्वेज'। राज्य में तीन साल पहले गठित नई सरकार का ध्येय वाक्य 'गढ़बो नवा छत्तीसगढ़' है। इसी ध्येय को लेकर राज्य सरकार छत्तीसगढ़ के विकास में नए मॉडल पर काम कर रही है और यह मॉडल है समावेशी विकास का नया छत्तीसगढ़ मॉडल। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ के केन्द्र में रहे बस्तर की तस्वीर बदलने की कवायद राज्य सरकार ने की है। अब तक नक्सलवाद को लेकर होती रही छत्तीसगढ़ की पहचान को बीते तीन साल में ही बदलने में राज्य सरकार ने सफलता हासिल कर ली है। अब छत्तीसगढ़ को गांव, गरीब, किसान समेत समावेशी विकास पर काम करने वाले प्रदेश के रूप में जाना जाता है। बीते तीन साल से लगातार देशभर में छत्तीसगढ़ स्वच्छतम राज्य का पुरस्कार ले रहा है। छत्तीसगढ़ की स्थानीय संस्कृति और परम्परा को पुनर्स्थापित करने की दिशा में राज्य सरकार का प्रयास रंग लाया है। छत्तीसगढ़िया स्वाभिमान और गर्व की अलख यहां के लोगों में जागी है। ऐसे में बादल के जरिए लाल आतंक से परे बस्तर के विभिन्न आदिवासी कलाओं, लोकगीत, नृत्यकला, शिल्पकला, संस्कृति, भाषा, साहित्य, खान-पान, वेशभूषा के संरक्षण और विकास के लिए काम होंगे। वहीं बस्तर क्षेत्र की हल्बी, गोंडी, धुरवा, भतरी जैसी बोली-भाषाओं से नई पीढ़ी के साथ ही पर्यटकों, शोधार्थियों को भी अवगत कराया जाएगा। उम्मीद है कि अब तक एक क्षेत्र विशेष तक सीमित इन बोलियों के व्यापक प्रसार में यह पहल महत्वपूर्ण कदम होगा। दूसरी ओर राज्य सरकार के इस पहल से बस्तर के पर्यटन में इजाफा होगा तो वहीं स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। जाहिर है कि बस्तर के आकर्षक लौह शिल्प, माटी शिल्प, गोदना कला और हस्तशिल्प को देखने पर पर्यटक आकर्षित होंगे ही।
चार भाग में बंटा बादल
बादल परिसर में घुसते ही आपको परंपरागत तरीके से बनाए गए कुछ ढांचे मिलेगें। इसे चार प्रमुख श्रेणियों में बांटा गया है। एक है लोक नृत्य, दूसरा लोकगीत, तीसरा लोक साहित्य व भाषा और चौथा बस्तर शिल्प। इस सांस्कृतिक संग्रहालय में बस्तर की हलबी, भतरी, गोंडी बोली की पुस्तकों का संग्रह किया जाएगा। जिससे यहां पर आने वाले लोग पुस्तक के माध्यम से भी बस्तर की संस्कृति की जानकारी ले सकेंगे, इसके अलावा लोककलाओं की रिर्काडिग के लिए स्टूडियों, सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए हाल व अन्य भवन का निर्माण हुआ है। समाज के जानकारों के माध्यम से भाषाओं को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा हैं। बादल के माध्यम से बस्तर की लोककला व संस्कृति का संरक्षण व संवर्धन के साथ प्रदर्शन भी किया जायेगा जिससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा, क्योकि देश व दुनिया बस्तर की आदिवासी संस्कृति को करीब से जानना चाहता है।
क्या है बादल?
आधुनिकता के इस दौर में आदिवासी समाज अपने लोकनृत्य, लोकगीत, स्थानीय भाषा, साहित्य व शिल्पकला को आज भी जीवित रखे हुए हैं। उसका डिजीटल रूप सोशल मिडिया में छाया रहता है। जाहिर है, इस संस्था से आदिवासी संस्कृति को और बढ़ावा मिलेगा। बादल यानी बस्तर अकादमी ऑफ डांस आर्ट लिटरेचर एंड लेंग्वेज ग्राम आसना में है जो जगदलपुर से 5 किमी दूर रायपुर रोड पर है। बकावण्ड जाने वाले मार्ग पर कुछ कदम दूर चलने पर ये नजर आएगा। यहाँ पार्किंग की उत्तम व्यवस्था है। इस स्थान पर एक मोटल हुआ करता था जिसे बाद में बादल में तब्दील कर दिया गया है। इस परिसर में एक खुला थिएटर बनाया गया है। जिसमें बस्तर के लोक संगीत व गीतों की बहार हागी। कुल मिलाकर यह समझ में आता है कि बस्तर की तमाम संस्कृति को समझने का समावेश एक ही परिसर में होगा। जिला प्रशासन के मुताबिक बादल को खैरागढ़ संगीत विश्वविद्यालय के साथ रजिस्टर्ड कराया जा रहा है। जिसके बाद बस्तर की कला और संस्कृति पर कुछ नए कोर्स भी किए जा सकेंगे।
संस्कृति की नई इबारत से हारेगा नक्सलवाद: भूपेश बघेल
बस्तर ने विपरीत परिस्थितियों में भी अनेक उपलब्धियों को हासिल की है। कुछ समय पहले प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने लोकवाणी कार्यक्रम में उल्लेख किया था और सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने के लिए बस्तर के युवाओं के प्रयास की सराहना भी मुख्यमंत्री कर चुके हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उम्मीद जताई है कि बस्तर में संस्कृति और स्वावलंबन की नई कहानी लिखकर नक्सलवाद को पीछे हटाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बस्तर की कला संस्कृति और परम्पराओं को समझने के लिए पर्यटकों को गांवों का या बस्तर के सुदूर अचलों का दौरा करने जरूरत नहीं है। जिला प्रशासन ने बस्तर अकादमी ऑफ डांस, आर्ट, लिटरेचर एंड लेंग्वेज यानि बादल की स्थापना की है। यह बस्तर की संस्कृति को आपको रूबरू करवाएगा। साथ ही बस्तर कला एक मंच प्रदान करेगा।