विजय प्लान के लिए पीएम मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री विजय को हटाया, मुख्यमंत्री बदलने की क्या वजह रही पढ़िये इस खबर को

Update: 2021-09-11 07:26 GMT

एनपीजी न्यूज ब्यूरो
नई दिल्ली, 11 सितंबर 2021। वैसे तो गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी को हटाये जाने की चर्चा लंबे समय से चल रही थी। लेकिन, किसी को ये अंदेशा नहीं था कि प्रधानमंत्री के वर्चुअल मीटिंग में शामिल होने के तुरंत बाद उनकी विदाई की खबर आ जाएगी। आज सुबह तक इस बारे में कोई खबर नहीं थी कि विजय रुपाणी को हटाया जा रहा है। सुबह पूरी तैयारी के साथ प्रफुल्लित मुद्रा में रुपाणी प्रधानमंत्री के वर्चुअल कार्यक्रम में शामिल हुए। लेकिन, उसके बाद रुपाणी के इस्तीफे की खबर आई तो लोग हतप्रभ रह गए।

वैसे तो विजय रूपाणी के पिछले साल कोरोना के मिसमैनेजमेंट से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुश नहीं थे। लेकिन, अब जबकि, चुनाव करीब आता जा रहा है बीजेपी आलाकमान ने इस पर फायनल फैसला लेना उचित समझा। बीजेपी के सर्वे रिपोटों में ये बात भी साफ तौर पर आ रही थी कि रुपाणी के नेतृत्व में अगला चुनाव निकालना मुश्किल होगा।
रुपाणी के मुख्यमंत्री पद से हटने की एक अहम वजह प्रदेश अध्यक्ष सीआर पाटिल से मनमुटाव रही। पाटिल के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद से ही दोनों के बीच बन नहीं रही थी। असल में पाटिल ने पार्टी नेतृत्व के सामने इरादा जाहिर किया है कि वह प्रदेश में बड़ी जीत हासिल करना चाहते हैं। उनके इस प्लान में विजय रूपाणी फिट नहीं बैठ रहे थे। ऐसे में उन्हें रास्ता खाली करना पड़ा।

विजय रूपाणी को फेस बनाकर पार्टी अगले चुनाव में नहीं उतरना चाहती थी। इसके पीछे एक बड़ी वजह थी गुजरात का जातीय समीकरण। रूपाणी कास्ट न्यूट्रल थे और उनके रहते पार्टी के लिए जातीय समीकरण साध पाना मुश्किल हो रहा था। गुजरात के जातीय समीकरण को साधने के लिए ही कुछ समय पहले केंद्र के मंत्रिमंडल विस्तार में मनसुख मंडाविया को जगह दी गई थी।

पिछले चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने गुजरात में बहुत मुश्किल से जीत हासिल की थी। इसके बाद किसी तरह चार साल तक मामला चला, लेकिन जबकि चुनाव को एक साल बचा है, पार्टी यहां कोई रिस्क नहीं लेना चाहती थी। सीआर पाटिल के अध्यक्ष बनने के बाद रूपाणी के लिए मुश्किलें और बढ़ गई थीं। विशेषज्ञों का कहना है कि अमित शाह के करीबी होने के नाते रूपाणी की कुर्सी अभी तक बची हुई थी। लेकिन सीआर पाटिल ने अब पार्टी से स्पष्ट कर दिया था कि अगर अगले साल चुनाव में बड़ी जीत हासिल करनी है तो फिर नेतृत्व परिवर्तन करना होगा। रूपाणी के लिए कोरोना की दूसरी लहर भारी मुसीबत बनकर आई। इस दौरान गुजरात में मिसमैनेजमेंट की कई खबरें बाहर आईं। सूत्रों का दावा है कि इसके चलते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी खुश नहीं थी। अपने गृह प्रदेश में इस तरह की लापरवाही होती देख, पीएम मोदी काफी ज्यादा परेशान थे। यही वजह रही कि उन्होंने भी गुजरात में नेतृत्व परिवर्तन पर कोई सवाल नहीं उठाया।

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