उफ!ये मोहब्बत : भाजपा शिवसेना के मोहब्बत भरे बोल..भाजपा बोली – शिवसेना दुश्मन नही..शिवसेना बोली -भाजपा और हम भारत पाकिस्तान नही

Update: 2021-07-05 02:55 GMT

मुंबई, 5 जुलाई 2021। शिवसेना और भाजपा के बीच सियासी खिचड़ी क्या फिर पक रही है ? महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना के बीच जो संवाद हो रहे हैं उससे तो यही संकेत मिलते हैं। दोनों ही पक्षों के बीच संवाद में जो मोहब्बत दिख रही है, वह मौजुदा वक्त में राजनैतिक समीक्षकों को हैरान कर रही है।किसी समय साथ साथ क़दमताल करने वाले भाजपा और शिवसेना विधानसभा चुनाव के बाद अलग राहों पर बढ़ गए। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे को सीएम बनना था और इस चाहत ने महाराष्ट्र की सियासत में बिलकुल नया प्रयोग देखा। तीन अलग अलग धाराओं शिवसेना एनसीपी और कांग्रेस ने मिल कर महाराष्ट्र में सरकार बना ली।इन तीनों दलों का सरकार में साझा होना उतना ही विलक्षण है जितना जम्मू कश्मीर में पीडीपी और भाजपा का सत्ता में साझा होना था।
बहरहाल सरकार बनी और उद्धव ठाकरे सीएम बने, पर भाजपा से कड़वाहट तब बढ़ गई जबकि एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार के भतीजे अजीत पवार को साथ ले देवेंद्र फड़नवीस ने सरकार बनाने की क़वायद की, हालाँकि हाई फ्लोर इस पॉलिटिकल ड्रामे का पर्दा 48 घंटो के भीतर गिर गया, पर भाजपा शिवसेना के बीच दरार और गहरी हो गई।
लेकिन तीन अलग अलग धाराओं के मेल से बनी महाराष्ट्र सरकार जिसे महाविकास अघाडी सरकार कहा जाता है, में कई मौक़ों पर गतिरोध उठते रहे हैं, पर संयोग से सरकार निरंतर चलायमान है।
इस बीच भाजपा और शिवसेना के बीच संवाद जो एकदम मीठे और मोहब्बत भरे हैं वो महाराष्ट्र में गूंजने लगे हैं।यह गूंज इसलिए भी और बढ़ गई क्योंकि इक़बाले मोहब्बत के साथ भाजपा की ओर से यह भी कहा गया कि सियासत में इफ बट याने किंतु परंतु जैसा कुछ नहीं होता।
महाराष्ट्र के नेता प्रतिपक्ष देवेंद्र फड़नवीस ने पत्रकारों से चर्चा में कहा –
“सियासत में किंतु परंतु अगर मगर जैसा कुछ नहीं होता..हमारे और शिवसेना के बीच कुछ मतभेद हैं पर हम दुश्मन नहीं है”
यह बात देवेंद्र फड़नवीस ने उस सवाल के जवाब में कही जबकि सवाल हुआ
“भाजपा और शिवसेना क्या साथ आ सकते है”
इसके बाद शिवसेना के नेता संजय राउत ने जो कहा उससे संकेत मिले कि मोहब्बत एक तरफ़ा नहीं है। संजय राउत ने देवेंद्र फड़नवीस की बात पर प्रतिक्रिया माँगे जाने पर पत्रकारों से कहा
“हम भारत पाकिस्तान नहीं है,हमें आमिर और किरण राव की तरह देखिए..हमारे राजनैतिक रास्ते जरुर अलग हैं लेकिन दोस्ती तो बरकरार है”
बग़ैर किसी अगर-मगर के, बग़ैर किसी किंतु-परंतु के यह बातें कितनी गहरी हैं यह फ़िलहाल कोई समझेगा नहीं, ऐसा सोचना कितना सतही होगा.. है न!

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