सिर्फ 33 सदस्य ही हर सत्र में प्रश्न लगाए… कौशिक ने पूछे सबसे ज़्यादा सवाल..देवेंद्र बहादुर ने केवल आठ तो केके ध्रुव का खाता शून्य

Update: 2021-07-12 07:19 GMT

रायपुर,12 जुलाई 2021। आपके विधायकों ने विधानसभा में कितनी सक्रियता रखी है क्या यह जानने समझने की आपने क़वायद की है। सवाल तो आया होगा कि आख़िर जिसे आपने विधायक चुना है वे विधानसभा में कितने सक्रिय होते हैं। पक्ष विपक्ष में बंटे विधायकों की सक्रियता शोर हंगामे से तो नही आँकी जा सकती है, तो पैमाना क्या हो ? क्यों ना यह आँकड़ा देखा जाए कि अब तक किस विधायक ने कितने प्रश्न लगाए हैं, वे आंकड़े विस्मित करते हैं।90 सदस्यीय विधानसभा में 13 सरकार के प्रतीक होते हैं याने मंत्रीमंडल के सदस्य, तो शेष बचते हैं 77। ये पाँचवीं विधानसभा है और अब तक इसके सात सत्र लग चुके हैं, इनके कुल सत्र दिवस हैं 90।
आंकड़े बताते हैं कि 77 में से केवल सोलह सदस्य ऐसे हैं जिन्होंने 300 से उपर प्रश्न लगाए,इनमें धर्मलाल कौशिक ने सबसे ज़्यादा 358 प्रश्न लगाए, इसके बाद अजय चंद्राकर और केशव चंद्रा ने 356, सौरभ सिंह ने 353,संतराम नेताम ने 352,बृजमोहन अग्रवाल ने 350 और धर्मजीत सिंह ने 339 सवाल लगाए।
पाँचवी विधानसभा के तैंतीस सदस्य ऐसे हैं जिन्होंने हर सत्र में प्रश्न लगाए। याने सभी सातों सत्रों में इन तैंतीस सदस्यों के प्रश्न लगे थे।जबकि दो सौ से उपर लेकिन तीन सौ से कम प्रश्न लगाने वाले सदस्यों की संख्या नौ है।
पचास से कम प्रश्न करने वाले सदस्यों में देवेंद्र बहादुर सिंह (आठ प्रश्न ),मोहित राम केरकेट्टा (12 प्रश्न ),विक्रम मंडावी ( 14 प्रश्न ),देवंती कर्मा ( 14 प्रश्न ),द्वारिकाधीश यादव (23 प्रश्न ),अंबिका सिंहदेव (24 प्रश्न ),बृहस्पति सिंह (24 प्रश्न ),चिंतामणि (36 प्रश्न) और रामपुकार सिंह (39 प्रश्न )।
इन सबके बीच एक विधायक ऐसे भी हैं जिन्होंने एक भी प्रश्न नहीं लगाया है। याने उनके खाते शून्य है। ये सदस्य हैं मरवाही उप चुनाव में नवंबर में निर्वाचित होकर आए के के ध्रुव।निर्वाचन के बाद के के ध्रुव दो सत्र में शामिल हो चुके हैं यह सत्र कुल तीस दिन के निर्धारित थे।निर्वाचन के बाद पहला सत्र दिसंबर 2020 में सात दिन का और उसके बाद जनवरी मार्च 2021 जो कि 23 दिन का था।
यह वे आंकड़े हैं जो विधानसभा में दर्ज कराए गए हैं, इसके मायने यह हैं कि विधायकों ने कितने प्रश्न लगाए यह आँकड़ा है। नियमानुसार एक बैठक में एक सदस्य के अधिकतम चार प्रश्न विचार में लिए जाते हैं, मतलब सभी प्रश्नों पर विधानसभा में विमर्श हो यह नहीं हो सकता, लेकिन विधानसभा में लगने वाले हर प्रश्न का जवाब सरकार को देना ही होता है। यह प्रश्न योजनाओं की ज़मीनी हक़ीक़त से लेकर तमाम विसंगतियों और मसलों को सामने लाने वाले माने जाते हैं।

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