कांग्रेस नेता को अग्रिम जमानत नहीं: सिम्स टेक्नीशियन से दुर्व्यवहार के मामले में कांग्रेस नेता पंकज सिंह की अग्रिम जमानत याचिका खारिज, जिसके इलाज के लिए विवाद हुआ, वे नहीं रहे
बिलासपुर, 29 सितंबर 2021। सिम्स में मरीज के एमआरआई करने के लिए टेक्नीशियन से हुए दुर्व्यवहार मामले में कांग्रेस सचिव पंकज सिंग की अग्रिम जमानत याचिका सत्र न्यायालय ने खारिज कर दी हैं। मरीज रविशंकर अवस्थी 19 तारीख को सिम्स में एमआरआई करवाने पहुँचे थे, जिन्हें मशीन खराब है कह कर टेक्नीशियन ने एमआरआई नही किया था, तब मरीज के परिजनों ने स्वास्थ्य मंत्री के करीबी कांग्रेस के प्रदेश सचिव पंकज सिंह को जानकारी दी। पंकज रात 11 को रायपुर से बिलासपुर पहुँचे। उनके पहुँचने पर एमआरआई तो हो गया पर सिम्स के टेक्नीशियन तुलाचन्द तांडे ने पंकज सिंह पर कॉलर पकड़ कर घसीटने और गाली गलौच की एफआईआर कोतवाली थाने में दर्ज करवाई थी। टेक्नीशियन को कालर पकड़ कर घसीटने का कांग्रेस नेता का सीसीटीवी फुटेज भी वाइरल हुआ था। पुलिस ने धारा 186, 353 के अलावा चिकित्सको एवम चिकित्साकर्मियों के खिलाफ हिंसा अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज करवाई थी।
एफआईआर के खिलाफ अग्रिम जमानत हेतु पंकज सिंह ने सत्र न्यायालय में याचिका लगाई थी, जिसे सेशन जज सुषमा सावंत ने पुलिस से केस डायरी मंगा कर सुनने के बाद अग्रिम जमानत याचिका निरस्त कर दी हैं।
हुआ था थाना घेराव:-
एफआईआर के विरोध में विधायक शैलेश पांडेय ने अपने समर्थकों के साथ थाना घेराव कर दिया था और बयान दिया था कि हम टीएस सिंहदेव के आदमी हैं इसलिए हमें पुलिस द्वारा ठोका जा रहा हैं।उनके इस बयान को अनुशासन हीनता मान कर शहर कांग्रेस कमेटी ने उनके 6 वर्ष के निष्काषन का प्रस्ताव पास कर मंजूरी के लिए ऊपर भेजा हैं।प्रदेश के सतनामी समाज ने भी एक्ट्रोसिटी की धारा जोड़ने के लिए ज्ञापन सौपा हैं, अन्यथा एसपी आफिस के घेराव की चेतावनी दी हैं।
जिस मरीज के इलाज के लिए शुरू हुए बवाल से शहर से लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई उस मरीज रविशंकर अवस्थी की बेहतर ईलाज के अभाव में मौत भी हो गई।मरीज शाम 7.30 को ईलाज हेतु सिम्स पहुँचा था,पर मशीन खराब है कर के उन्हें लगातार रात 11 बजे तक घुमाया गया और एमआरआई नही की गई फिर रात 11 बजे कांग्रेस नेता के पहुँचने पर एमआरआई की गई।और एमआरआई रिपोर्ट के अभाव में मरीज का इलाज समय पर शुरू नही किया जा सका,हो सकता हैं कि सही समय पर एमआरआई हो कर ईलाज शुरू हो जाता तो मरीज की जान बच सकती थी।