Vehicles Registration Cancel News : वाहन मालिक सावधान ! 41 करोड़ गाड़ियों में से 70% के कागजात अधूरे, 17 करोड़ व्हीकल का रजिस्ट्रेशन रद्द होने का खतरा

Vehicles Registration Cancel News : देशभर में 40.7 करोड़ में से 70 प्रतिशत ऐसी गाड़ियां हैं, जो कि नियमों का पालन नहीं कर रहीं है। इसमें अधिकतर टू-व्हीलर हैं, जिसमें PUC, फिटनेस सर्टिफेकट या इंश्योरेंस जैसे जरूरी कागजात पूरे नहीं हैं।

Update: 2026-01-15 07:11 GMT

Vehicles Registration Cancel News :  अगर आप भी किसी भी प्रकार के वाहन मालिक हैं, तो सावधान हो जाइये. चाहे आपके पास Two व्हीलर हो या फॉर व्हीलर. आपके गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन रद्द होने का खतरा है. 


गौरतलब है की देशभर में 40.7 करोड़ में से 70 प्रतिशत ऐसी गाड़ियां हैं, जो कि नियमों का पालन नहीं कर रहीं है। इसमें अधिकतर टू-व्हीलर हैं, जिसमें PUC, फिटनेस सर्टिफेकट या इंश्योरेंस जैसे जरूरी कागजात पूरे नहीं हैं। पिछले सप्ताह हुई एक बैठक में केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ ये आंकड़े पेश किए।

सड़क परिवहन मंत्रालय ने राज्य सरकारों को ये आंकड़ा शेयर करते हुए एक ऐसा सिस्टम बनाने का प्रस्ताव दिया है, जिससे गाड़ी मालिक तय समय में सभी जरूरी कागजात पूरे लें। मंत्रालय के प्रस्ताव के अनुसार, अगर गाड़ी मालिक कागजातों को पूरा नहीं करते तो धीरे-धीरे इन गाड़ियों को अपने आप डी-रजिस्टर कर दिया जाएगा। मंत्रालय के इस नए प्रस्ताव से 17 करोड़ गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन रद्द होने का खतरा मंडरा रहा है।


इस प्रस्ताव का मकसद गाड़ियों के डेटाबेस साफ करना

मंत्रालय के इस प्रस्ताव का मकसद गाड़ियों के डेटाबेस को साफ करना है क्योंकि बहुत सी गाड़ियां कानूनी या चलाने के लिहाज से ठीक नहीं हैं, जिससे कुल गाड़ियों की संख्या बढ़ी हुई दिखती है। मंत्रालय ने राज्यों से इस डेटाबेस को ठीक करने के लिए सुझाव मांगे हैं। अभी 8.2 करोड़ से ज्यादा गाड़ियां ही एक्टिव और पूरी तरह से नियमों का पालन करने वाली हैं। वहीं, 30 करोड़ से ज्यादा गाड़ियों में कुछ न कुछ कमी है। इसके अलावा, 2.2 करोड़ गाड़ियां आर्काइव्ड (पुराने रिकॉर्ड में) हैं।


परिवहन मंत्रालय ने गाड़ियों को चार कैटेगरी में बांटा है। जिसमें एक्टिव-कंप्लायंट (सभी कागजात ठीक), एक्टिव नॉन-कंप्लायंट (कुछ कागजात अमान्य), टेंपरेरी आर्काइव्ड (लंबे समय से या बार-बार नियमों का पालन न करने वाली) और परमानेंट आर्काइव्ड (कबाड़ हो चुकीं, रजिस्ट्रेशन कैंसिल या सरेंडर की हुई) गाड़ियां हैं।

तेलंगाना में आंकड़ा 20 प्रतिशत से कम

बड़े राज्यों में तमिलनाडु, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश और बिहार में 40% से ज्यादा रजिस्टर्ड गाड़ियां एक्टिव तो हैं, लेकिन नियमों का पालन नहीं कर रही हैं। सिर्फ तेलंगाना ही ऐसा राज्य है जहां यह आंकड़ा 20% से कम है। टेंपरेरी आर्काइव्ड गाड़ियों की बात करें तो राजस्थान, ओडिशा, बिहार, एमपी और कर्नाटक में 40% से ज्यादा गाड़ियां इस कैटेगरी में हैं।




क्या है नियम

प्रस्तावित नियम के मुताबिक, एक्टिव नॉन-कंप्लायंट गाड़ियों के मालिकों को एक साल के अंदर फिटनेस, PUC सर्टिफिकेट और इंश्योरेंस रिन्यू कराना होगा। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो उनकी गाड़ी टेंपरेरी आर्काइव्ड कैटेगरी में चली जाएगी। अगर दो साल तक भी फिटनेस, इंश्योरेंस और PUC रिन्यू नहीं कराया गया, तो गाड़ी परमानेंट आर्काइव्ड कैटेगरी में डाल दी जाएगी।

ट्रांसपोर्ट कमिश्नर की मंजूरी के बाद ही वाहन को किया जाएगा एक्टिव

अधिकारियों ने बताया कि री-क्लासिफिकेशन अपने आप होगा, जो नियमों के रिन्यूअल पर निर्भर करेगा। परमानेंट आर्काइव्ड कैटेगरी फाइनल मानी जाएगी। कुछ खास मामलों में ही गाड़ी को वापस एक्टिव किया जा सकता है, जैसे कि डेटा में गलती होने पर, कोर्ट के आदेश पर या पुराने डेटा से जुड़ी किसी समस्या के कारण। इसके लिए ट्रांसपोर्ट कमिश्नर की मंजूरी जरूरी होगी। सभी रिकवरी की जानकारी डिजिटल रूप से दर्ज की जाएगी, जिसकी ऑडिटिंग हो सकेगी और पारदर्शिता के लिए रिपोर्ट भी की जाएगी।

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