Supreme Court News: ​सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत नहीं, 5 अन्य को मिली राहत; भाजपा बोली- राहुल के मुंह पर तमाचा

Supreme Court News: ​नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को 2020 के दिल्ली दंगों की कथित साजिश के मामले में जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद और शरजील इमाम को बड़ा झटका दिया है। शीर्ष अदालत ने दोनों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं।

Update: 2026-01-06 07:19 GMT

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Supreme Court News: ​नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को 2020 के दिल्ली दंगों की कथित साजिश के मामले में जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद और शरजील इमाम को बड़ा झटका दिया है। शीर्ष अदालत ने दोनों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। हालांकि, कोर्ट ने इसी मामले में पांच अन्य आरोपियों को राहत देते हुए उन्हें जमानत दे दी है। इस फैसले के बाद सियासी पारा चढ़ गया है और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है।

​अदालत ने क्या कहा?

जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत सामग्री से याचिकाकर्ताओं (उमर खालिद और शरजील इमाम) के खिलाफ 'प्रथम दृष्टया' (Prima Facie) आरोप सिद्ध होते हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उन पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की धाराएं लागू होती हैं, इसलिए कार्यवाही के इस चरण में उन्हें जमानत पर रिहा करना उचित नहीं है।

​किन्हें मिली जमानत?

जहां उमर और शरजील की याचिकाएं खारिज हुईं, वहीं पीठ ने मामले के अन्य आरोपियों—गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा-उर- रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद—को जमानत दे दी।

​भाजपा का कांग्रेस पर वार: 'इकोसिस्टम को झटका'

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तुरंत बाद भाजपा ने इसे विपक्ष की हार बताया। भाजपा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह फैसला राहुल गांधी और कांग्रेस के पूरे 'इकोसिस्टम' के लिए एक करारा झटका है। पार्टी ने कहा कि यह उन लोगों के मुंह पर "जोरदार तमाचा" है जो इन आरोपियों का राजनीतिक बचाव कर रहे थे।

​क्या है मामला?

उमर खालिद, शरजील इमाम और अन्य पर फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों का 'मुख्य साजिशकर्ता' होने का आरोप है। पुलिस ने इनके खिलाफ UAPA और भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। पिछले साल 10 दिसंबर को सभी पक्षों—सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और बचाव पक्ष के वरिष्ठ वकीलों कपिल सिब्बल, अभिषेक सिंघवी आदि—की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।

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