Supreme Court News: नीट पीजी एमडी,एमएस एडमिशन: हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर हुई एसएलपी
Supreme Court: नीट पीजी एमएस,एमडी एडमिशन को लेकर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए डॉ समृद्धि दुबे ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर कर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के 30 जनवरी 2026 को पारित अंतिम आदेश को चुनौती दी है। प्रारंभिक सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट के डिवीजन बेंच ने राज्य शासन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
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06 फरवरी 2026| बिलासपुर। नीट पीजी एमएस,एमडी एडमिशन को लेकर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए डॉ समृद्धि दुबे ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर कर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के 30 जनवरी 2026 को पारित अंतिम आदेश को चुनौती दी है। प्रारंभिक सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट के डिवीजन बेंच ने राज्य शासन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
डॉ समृद्धि दुबे ने हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है जिसमें डिवीजन बेंच ने अन्य राज्यों से MBBS करने वाले छात्रों को भी राज्य कोटे में शामिल करने की अनिवार्यता को खत्म कर दिया है। हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद छत्तीसगढ़ सरकार ने मेडिकल पीजी प्रवेश नियमों में बड़ा संशोधन किया है। 22 जनवरी 2026 को जारी अधिसूचना के अनुसार अब शासकीय मेडिकल कॉलेजों की राज्य कोटे की 50% पीजी सीटें संस्थागत वरीयता के तहत राज्य के अपने मेडिकल कॉलेजों से MBBS करने वाले छात्रों को प्राथमिकता से मिलेंगी।
राज्य सरकार ने यह बदलाव बिलासपुर हाई कोर्ट के स्पष्टीकरण आदेश के बाद किया है, जिसमें कोर्ट ने पहले के अपने फैसले के उस हिस्से को वापस लिया जिससे सरकार को भ्रम हुआ था कि अन्य राज्यों से MBBS करने वाले छात्रों को भी राज्य कोटे में शामिल करना जरूरी है। हाई कोर्ट के आदेश के बाद राज्य सरकार को अपने छात्रों को संस्थागत प्राथमिकता देने का पूरा अधिकार हो गया है। संशोधित नियमों के तहत सरकारी कॉलेजों की पीजी सीटों पर संस्थागत प्राथमिकता लागू होगी, जबकि निजी मेडिकल कॉलेजों की 50% सीटों पर संस्थागत वरीयता और बाकी 50% पर गैर-संस्थागत (ओपन) मेरिट आधारित आवंटन होगा। इस फैसले से पहले हुई पहली और दूसरी चरण की काउंसलिंग रद्द कर दी गई है और सभी आवंटन निरस्त कर दिया है।
आयुक्त, चिकित्सा शिक्षा ने 23 जनवरी 2026 को जारी अधिसूचना में लिखा है, ओपन कैटेगरी में आवेदन करने वाले अभ्यर्थी केवल गैर-संस्थागत उम्मीदवार ही पात्र होंगे। संस्थागत उम्मीदवार इस कैटेगरी में आवेदन नहीं कर सकेंगे।
डॉ. समृद्धि दुबे ने डोमिसाइल आरक्षण को हाई कोर्ट में दी थी चुनौती
डॉ समृद्धि दुबे ने अपनी याचिका में बताया है, वह छत्तीसगढ़ की स्थायी निवासी है। उन्होंने 2023 में VMKV मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, सेलम से अपना MBBS कोर्स पूरा किया था। उसके बाद 2024 में ज़रूरी रोटेटिंग मेडिकल इंटर्नशिप भी की थी। इसके बाद उसने तमिलनाडु मेडिकल काउंसिल और छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल से अपना मेडिकल रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट हासिल किया। इसके बाद उसने NEET (PG)-2025 एग्जाम दिया और क्वालिफाई किया।
रिट याचिका में इस पर दिया था जोर
रिट याचिका के ज़रिए उन्होंने रूल 11(a) और (b) को इस आधार पर चुनौती देते हुए कहा, यह छत्तीसगढ़ में मौजूद मेडिकल कॉलेजों से पास हुए कैंडिडेट्स और छत्तीसगढ़ के बाहर के मेडिकल कॉलेजों से पास हुए कैंडिडेट्स के बीच भेदभाव करता है। यह कहा गया कि यह रूल यूनिवर्सिटी-बेस्ड रिज़र्वेशन पर आधारित है, जो एक गलत क्लासिफिकेशन बनाता है और इस तरह आर्टिकल 14 के मैंडेट के खिलाफ है।
राज्य सरकार ने ये दी थी दलीलें
राज्य सरकार ने कहा कि 2025 के रूल्स PG कोर्स में 50% स्टेट-कोटा सीटों के एडमिशन से पूरी तरह जुड़े हैं। राज्य ने यह साफ़ करने की कोशिश की कि जिन उम्मीदवारों को नियम 11(a) के तहत संस्थागत वरीयता दी गई, ज़रूरी नहीं कि वे छत्तीसगढ़ के रहने वाले हों, और इसलिए यह कहा गया कि कोई भेदभाव नहीं हुआ। कोर्ट ने डॉ. तन्वी बहल बनाम श्रेय गोयल और अन्य (2025) में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का ज़िक्र किया, जिसमें यह माना गया कि पोस्टग्रेजुएट PG मेडिकल कोर्स में रहने/घर के आधार पर रिज़र्वेशन गैर-संवैधानिक है और इसकी इजाज़त नहीं है। इस फैसले को देखते हुए डिवीज़न बेंच ने नियम 11(a) और (b) को इस आधार पर रद्द कर दिया कि यह MBBS डिग्री पाने वाले इंस्टीट्यूशन के आधार पर कैंडिडेट्स के बीच भेदभाव करता है।