बिलासपुर रायपुर फ़ोरलेन मुआवजा प्रकरण: 14 साल से कानूनी लड़ाई लड़ रहे किसानों में जगी न्याय की उम्मीद
Supreme Court News: वर्ष2012 से बिलासपुर रायपुर फोर लेन और सिक्स लेन प्रोजेक्ट में सड़क किनारे की महंगी जमीन गवां चुके किसानों को अंततः 14 साल की कानूनी लड़ाई के बाद उम्मीद दिखाई दे रही है।
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बिलासपुर. 17 फरवरी 2026| वर्ष2012 से बिलासपुर रायपुर फोर लेन और सिक्स लेन प्रोजेक्ट में सड़क किनारे की महंगी जमीन गवां चुके किसानों को अंततः 14 साल की कानूनी लड़ाई के बाद उम्मीद दिखाई दे रही है। आज सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस दीपंकर दत्ता और जस्टिस सतीश शर्मा के खंडपीठ में हुई सुनवाई में एन एच ए आई की ओर से उपस्थित भारत सरकार के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह सही है कि मुआवजा वितरण में कुछ विसंगति है। जिसमें सुधार की आवश्यकता है। इसके लिए हम छत्तीसगढ़ सरकार से भी बात कर रहे हैं। और हमें अपनी बात रखने के लिए कुछ समय दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने उनके इस कथन को सुनकर समय देना स्वीकार कर लिया।
याचिकाकर्ताओं की ओर से उपस्थित अधिवक्ता प्रणव सचदेवा और सुदीप श्रीवास्तव ने कहा कि यह मामला 12 साल से लंबित है. राज्य सरकार ने जो नया मार्गदर्शिका सिद्धांत बनाया है वह नए मामलों पर लागू होगा पुराने मामलों पर नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने एन एच ए आई और छत्तीसगढ़ सरकार के अधिवक्ता के कथनों को सुन कर इस विषय पर विचार करने का समय देना उचित समझा।
गौरतलब है कि इस मामले में 2012 से लगातार न्यायालय में केस चल रहे है। दो बार आर्बिट्रेटर और दो बार जिला जज और एक बार हाई कोर्ट में यह मुकदमा चल चुका है। इसी मामले के साथ जुड़े एक अन्य प्रकरण में हाई कोर्ट की दो खंडपीठों ने यह फैसला दिया है कि अधिक जमीन वाले को कम मुआवजा दिया जाना अनुचित है और जिस रेट पर अन्य किसानों को छोटी जमीन का मुआवजा दिया गया है वैसे ही स्लैब के आधार पर बड़ी जमीनों वालों को भी देना चाहिए यदि उनकी जमीन भी सड़क के किनारे समान रूप से स्थित है।
एनएचएआई ने हाई कोर्ट खंडपीठ के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. याचिकाकर्ताओं ने दो बार आर्बिट्रेशन और दो बार डिस्टिक कोर्ट में सुनवाई हो जाने के बाद उन्हें पुनः आर्बिट्रेशन के लिए भेजे जाने के खिलाफ याचिका लगाई है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि दो ही रेट उपलब्ध है जिसमें से एक को आर्बिट्रेटर डिस्टिक कोर्ट और हाई कोर्ट नकार चुका है। ऐसे में दूसरे उपलब्ध विकल्प के रेट पर ही मुआवजा तय होना है अतः किसी नए मुकदमे की जरूरत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 17 मार्च को अंतिम रूप से करने का आदेश किया है। सुप्रीम कोर्ट में NHAI की तरफ से उपस्थित सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, निसंदेह मुआवजा वितरण में कुछ असंगति है जिससे सुधार की आवश्यकता है।
बता दें कि मुआवजा वितरण में गड़बड़ी की गई है. सड़क पर स्थित कम जमीन वालों को करोड़ों रुपए और अधिक जमीन वालों को मात्र कुछ लाख रुपए का मुआवजा वितरण किया गया था. बिलासपुर रायपुर सड़क निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण व मुआवजा से जुड़ा है.