China claim Shaksgam: शक्सगाम घाटी पर चीन के दावे को भारत ने फिर किया खारिज, सेना प्रमुख बोले- 1963 चीन-पाक समझौता अवैध, CPEC मंजूर नहीं, जानिए क्या है पूरा विवाद

China claim Shaksgam: भारत ने शक्सगाम घाटी को लेकर चीन के दावे को सिरे से खारिज किया है। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि भारत 1963 के चीन-पाक सीमा समझौते को अवैध मानता है और CPEC को भी स्वीकार नहीं करता। जानिए क्या है पूरा विवाद।

Update: 2026-01-13 14:58 GMT

नई दिल्ली: शक्सगाम घाटी को लेकर चीन के हालिया दावे पर भारत ने एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है। भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने मंगलवार 13 जनवरी को दो टूक कहा कि भारत पाकिस्तान और चीन के बीच 1963 में हुए सीमा समझौते को मान्यता नहीं देता। सेना प्रमुख ने इसे अवैध करार देते हुए कहा कि भारत इस क्षेत्र में किसी भी तरह की गतिविधि को स्वीकार नहीं करेगा।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में जनरल द्विवेदी ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) का जिक्र करते हुए भी भारत की पुरानी नीति दोहराई। उन्होंने कहा कि CPEC को भारत स्वीकार नहीं करता और इसे दोनों देशों की ओर से किया जा रहा अवैध कार्य मानता है। भारत का यह तर्क रहा है कि यह परियोजना उस भूभाग से होकर गुजरती है जो भारत का हिस्सा है लेकिन फिलहाल पाकिस्तान के कब्जे में है।

सेना प्रमुख ने यह बात क्यों कही?

दरअसल, भारत की यह टिप्पणी चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग के बयान के बाद सामने आई। चीनी पक्ष ने शक्सगाम घाटी को चीन का हिस्सा बताते हुए कहा कि वहां इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण पूरी तरह उचित” है। चीनी विदेश मंत्रालय का क्लेम रहा है कि चीन अपने क्षेत्र में निर्माण गतिविधियां कर रहा है और इस पर सवाल उठाना सही नहीं है।

चीन ने यह भी दोहराया कि चीन और पाकिस्तान ने 1960 के दशक में सीमा समझौता किया था और दोनों देशों ने सीमाओं का Demarcation किया यानी उनके हिसाब से यह दो संप्रभु देशों के अधिकार क्षेत्र का मामला है।

भारत पहले भी खारिज कर चुका है चीनी दावा

इससे पहले भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल भी चीन के दावे को सिरे से खारिज कर चुके हैं। उन्होंने साफ कहा था कि शक्सगाम घाटी भारतीय इलाका है और भारत ने 1963 के तथाकथित चीन-पाकिस्तान ‘सीमा समझौते’ को कभी मान्यता नहीं दी। भारत की ओर से इसे लगातार अवैध और अमान्य बताया जाता रहा है।

विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा था कि CPEC को भारत मान्यता नहीं देता क्योंकि यह भारतीय जमीन से होकर गुजरता है जो फिलहाल पाकिस्तान के अवैध कब्जे में है। भारत का यह भी कहना रहा कि शक्सगाम घाटी में जमीनी हकीकत बदलने की किसी भी कोशिश का वह विरोध करता रहेगा और अपने हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है।

शक्सगाम घाटी विवाद क्या है?

शक्सगाम घाटी रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील इलाका माना जाता है। भारत की स्थिति लंबे समय से स्पष्ट रही है कि 1963 में पाकिस्तान द्वारा इस भूभाग को चीन को देने वाला समझौता भारत के लिए स्वीकार्य नहीं है क्योंकि भारत उसे अपने क्षेत्र का हिस्सा मानता है। इसी वजह से जब भी वहां निर्माण, इन्फ्रास्ट्रक्चर या CPEC से जुड़ी गतिविधियों की खबर आती है, भारत तीखी प्रतिक्रिया देता है।

इस ताजा घटनाक्रम ने एक बार फिर भारत-चीन संबंधों में पहले से मौजूद तनाव को बढ़ाने वाला संकेत दिया है खासतौर पर तब जब सीमा विवाद और क्षेत्रीय दावों पर दोनों पक्ष अपनी-अपनी लाइन से पीछे हटने के मूड में नहीं दिख रहे।

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