SC on NCERT Controversy 2026: क्या कक्षा 8 की किताब से हटेगा न्यायपालिका का चैप्टर? जानें कोर्ट का सख्त आदेश!

SC on NCERT Controversy 2026: सुप्रीम कोर्ट ने NCERT की कक्षा 8 की किताब में 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' के जिक्र पर स्वतः संज्ञान लिया है। कोर्ट ने किताबों को जब्त करने और ऑनलाइन प्रसार रोकने का आदेश दिया है।

Update: 2026-02-26 11:20 GMT

फोटो: AI एडिटिंग: NPG News

हाईलाइट

  • सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा 8 की नई सामाजिक विज्ञान पुस्तक के वितरण और डिजिटल शेयरिंग पर पूरी तरह रोक लगाई।
  • सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की 'बिना शर्त माफी' को कोर्ट ने अपर्याप्त मानकर ठुकराया।
  • कोर्ट ने केंद्र सरकार और NCERT अध्यक्ष को नोटिस जारी कर पूछा- "इसका जिम्मेदार कौन है?"

SC on NCERT Controversy 2026: न्यायपालिका और देश की सबसे बड़ी शिक्षा संस्था NCERT के बीच टकराव अब चरम पर है। कक्षा 8 की नई सामाजिक विज्ञान की किताब में 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' (Judicial Corruption) का जिक्र होने पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान (Suo Motu Cognizance) लेते हुए इस पर देश और विदेश में पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने आदेश दिया है कि बाजार में मौजूद सभी प्रतियां तुरंत जब्त की जाएं।

सुनवाई के दौरान अदालत का तेवर बेहद सख्त था। जब सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने NCERT की ओर से माफी की पेशकश की तो मुख्य न्यायाधीश ने उसे ठुकराते हुए कहा कि यह मामला केवल 'निर्णय की त्रुटि' नहीं है।

गोली चला दी गई है..."

अदालत ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि जिम्मेदार लोगों ने गोली चला दी है और आज न्यायपालिका घायल है। पीठ ने इसे एक सोचा-समझा कदम और 'गहरी साजिश' करार दिया। कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल से पूछा कि आखिर इस कंटेंट को मंजूरी देने वाला असली चेहरा कौन है?

"हम इस मामले को बंद नहीं करेंगे। हमें गहराई तक जाना होगा कि यह किसकी योजना थी। जिम्मेदारों पर कार्रवाई होनी ही चाहिए।" - जस्टिस सूर्यकांत

क्या लिखा था चैप्टर में?

संशोधित अध्याय 'रोल ऑफ द जुडिशियरी इन अवर सोसाइटी' में केवल अदालतों के कामकाज की जानकारी नहीं थी, बल्कि इसमें 'भ्रष्टाचार' और 'न्याय में देरी' को न्यायपालिका की बड़ी चुनौतियों के रूप में पेश किया गया था।

सॉलिसिटर जनरल ने सफाई दी कि अब तक केवल 32 किताबें ही बाजार में पहुंची थीं जिन्हें वापस ले लिया गया है। विवादित कंटेंट लिखने वाले दो विशेषज्ञों को भविष्य में किसी भी सरकारी प्रोजेक्ट या UGC के साथ काम करने से ब्लैकलिस्ट किया जाएगा। पूरे अध्याय को अब दोबारा संशोधित किया जाएगा।

'खेद' और 'माफी' के बीच फंसा पेंच

कोर्ट ने NCERT की उस प्रेस रिलीज पर भी आपत्ति जताई जिसमें इस घटना को 'अनजाने में शामिल सामग्री' बताया गया था। मुख्य न्यायाधीश ने मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए कहा कि NCERT के आधिकारिक बयान में कहीं भी स्पष्ट 'माफी' शब्द का उल्लेख नहीं था, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।

प्रश्न: सुप्रीम कोर्ट ने NCERT की किताब पर प्रतिबंध क्यों लगाया?

उत्तर: किताब के चैप्टर 'The Role of the Judiciary in our Society' में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार का उल्लेख किया गया था जिसे कोर्ट ने संस्थान को बदनाम करने वाली 'गहरी साजिश' माना है।

प्रश्न: कोर्ट ने NCERT की माफी को क्यों अस्वीकार कर दिया?

उत्तर: जस्टिस सूर्यकांत के अनुसार NCERT का बयान केवल 'खेद' था जो माफी के स्तर तक नहीं पहुंचता। कोर्ट ने इसे 'निर्णय की त्रुटि' मानने से इनकार कर दिया।

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