PM Modi 75th Birthday: किसी फिल्मी कहानी से काम नहीं है PM मोदी की ज़िंदगी! चाय की केतली से मगरमच्छ पकड़ने तक, जानिए मोदी जी के बचपन के मशहूर किस्से!

PM Modi 75th Birthday: 17 सितंबर 2025 ये तारीख सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन का ही नहीं, बल्कि एक युग के जश्न का भी है। 75 साल पूरे कर चुके मोदी का जीवन किसी फ़िल्मी सफर से कम नहीं है।

Update: 2025-09-17 07:30 GMT

PM Modi 75th Birthday: 17 सितंबर 2025 ये तारीख सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन का ही नहीं, बल्कि एक युग के जश्न का भी है। 75 साल पूरे कर चुके मोदी का जीवन किसी फ़िल्मी सफर से कम नहीं है। 13 साल तक गुजरात के मुख्यमंत्री, 11 साल से प्रधानमंत्री और अब तीसरे कार्यकाल में देश की बागडोर संभाल रहे हैं PM मोदी। लेकिन PM मोदी की कहानी सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं है। उनके बचपन और जवानी की दास्तानें आज भी वडनगर की गलियों में गूंज रही हैं। आइये जानते हैं PM मोदी के लड़कपन के मशहूर किस्से... 

1969 का सपना- CM बनकर ये स्मारक बनवाऊंगा

मोदी के बचपन के दोस्त दशरथभाई पटेल मीडिया को बताते हैं, 1969 में हम दोनों वडनगर के मशहूर ताना-रीरी स्मारक के पास से गुजर रहे थे। नरेंद्र ने अचानक कहा, जब मैं मुख्यमंत्री बनूंगा, तो इसका रेस्टोरेशन करवाऊंगा। उस वक्त वो सिर्फ 19 साल के थे।
32 साल बाद, 2001 में जैसे ही नरेंद्र मोदी CM बने, उन्होंने पहला वादा निभाया। ताना-रीरी स्मारक को नया रूप मिला। दशरथभाई कहते हैं उसने 32 साल तक अपने सपने को जिया और फिर पूरा किया। यही मोदी का असली अनुशासन है।

चाय की केतली और मगरमच्छ का बच्चा!

PM मोदी के संघर्ष की कहानी वडनगर रेलवे स्टेशन से शुरू होती है। दशरथभाई ने मिडिया को बताया, बचपन में नरेंद्र अपने पिता की चाय की दुकान पर हेल्प किया करते थे। स्टेशन पर दिन में सिर्फ दो ट्रेनें आती थीं - सुबह और शाम। हाथ में केतली लिए मोदी डिब्बे-डिब्बे जाकर चाय बेचते।'

दशरथभाई ने मीडिया से एक और रोमांच स्टोरी शेयर किया- उन्होंने बताया बाल नरेंद्र ने एक बार वडनगर की शर्मिष्ठा झील से मगरमच्छ का बच्चा पकड़ लिया और घर ले आए। मां हीराबेन ने पहले तो नहे खूब डांट पिलाई, फिर उस बच्चे को वापस झील में छुड़वा दिया।

स्कूल, RSS से जुड़ाव

नरेंद्र मोदी के बचपन का बड़ा हिस्सा RSS शाखाओं में बीता। दशरथभाई बताते हैं  “हमने प्राइमरी स्कूल से लेकर विसनगर कॉलेज तक साथ पढ़ाई की। शाखा में जाते, खेतों में साथ खेलते और कभी-कभी दोस्तों संग गुजराती उंधियू का मजा लेते। स्कूल के नाटकों में मोदी हमेशा स्टार रहते।” यानी, उस वक्त भी उनके भीतर सिर्फ पढ़ाई नहीं बल्कि नेतृत्व और मंच की कला झलकती थी।
आपको नरेंद्र मोदी की कौन सी बचपन की कहानी सबसे ज्यादा अच्छी लगी? हमें कमेंट सेक्शन में जरूर बताइए। और PM मोदी की ऐसी ही खबरों के लिए NPG News से जुड़े रहिए।
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