Hormuz Crisis: फारस की खाड़ी में फंसे भारत के 38 शिप, 1100 भारतीय नाविक, हमले में 3 की मौत; जानें Hormuz Crisis का पूरा अपडेट

Hormuz Crisis: ईरान-अमेरिका तनाव से Strait of Hormuz ब्लॉक। फारस की खाड़ी में 38 भारतीय जहाज और 1100 सेलर्स फंसे। जहाजरानी मंत्री की रिव्यू मीटिंग। जानें क्रूड ऑयल सप्लाई पर असर।

Update: 2026-03-05 10:13 GMT

फोटो: AI जेनरेटेड

नई दिल्ली 5 मार्च 2026: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव (Geopolitical Tension) का असर अब सीधे तौर पर भारत पर पड़ रहा है। ग्लोबल ट्रेड के सबसे अहम रूट 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) के ब्लॉक होने से फारस की खाड़ी (Persian Gulf) में भारत से जुड़े 38 मालवाहक जहाज और करीब 1100 नाविक फंस गए हैं। इस क्राइसिस के बीच विदेशी जहाजों पर हुए हमले में 3 भारतीय क्रू मेंबर्स की मौत ने सरकार की टेंशन काफी बढ़ा दी है।

जहाजरानी मंत्रालय एक्शन में, बुलाई रिव्यू मीटिंग

मिडिल ईस्ट में तेजी से बिगड़ते हालात को देखते हुए केंद्रीय जहाजरानी मंत्री (Shipping Minister) सर्बानंद सोनोवाल ने मंगलवार को एक हाई-लेवल रिव्यू मीटिंग की। उन्होंने अधिकारियों को हर हाल में 'इंडियन सेलर्स' की सेफ्टी को टॉप प्रायोरिटी पर रखने का सख्त निर्देश दिया है। डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग (DG Shipping) के मुताबिक, भारत के 24 जहाज इस वक्त होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिम में और 14 जहाज पूर्व में मौजूद हैं।

'इंडियन फ्लैग' वाले शिप सुरक्षित, विदेशी जहाजों पर हुआ हमला

राहत की बात यह है कि 'इंडियन फ्लैग' वाले किसी भी जहाज को अभी तक सीधे तौर पर कोई डैमेज नहीं पहुंचा है। हालांकि, ओमान तट के पास विदेशी झंडे वाले जहाजों पर हुए हमलों में 3 भारतीय नाविकों की जान गई है और एक घायल हुआ है। बता दें कि फिलीपींस और चीन के बाद भारत दुनिया में नाविकों का तीसरा सबसे बड़ा सप्लायर है। किसी भी वक्त पश्चिम एशियाई जल क्षेत्र में लगभग 23,000 भारतीय नाविक ड्यूटी पर तैनात रहते हैं।

ग्लोबल शिपिंग नेटवर्क हुआ हिट, 150 जहाज फंसे

इस क्लैश ने पूरी दुनिया के शिपिंग नेटवर्क को बुरी तरह से हिट किया है। 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के आसपास कम से कम 5 ऑयल टैंकर डैमेज हुए हैं और 150 से ज्यादा जहाज फंसे हुए हैं। यह रूट इसलिए भी बेहद क्रिटिकल है क्योंकि दुनिया के 20 प्रतिशत कच्चे तेल (Crude Oil) और LNG की सप्लाई यहीं से होती है। इन जहाजों में भी कच्चा तेल लदा हुआ है।

ऑपरेशनल कॉस्ट बढ़ने से महंगाई का खतरा

इस रूट के ब्लॉक होने से कई ग्लोबल कंटेनर लाइन्स ने अपनी सेवाएं रोक दी हैं। मालवाहक जहाजों को अब अफ्रीका के 'केप ऑफ गुड होप' (Cape of Good Hope) वाले लंबे रास्ते से डायवर्ट किया जा रहा है। इससे ट्रैवल टाइम और ऑपरेशनल कॉस्ट (Operational Cost) दोनों में भारी इजाफा हो रहा है, जिसका सीधा इम्पैक्ट आने वाले दिनों में भारत सहित पूरी दुनिया में कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ सकता है।

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