Lok Sabha Election Dates 2024: दिल्ली में दोपहर 3 बजे EC की प्रेस कॉन्फ्रेंस, लोकसभा चुनावों की तारीखों का होगा ऐलान
Lok Sabha Election Dates 2024: EC press conference at 3 pm in Delhi, Lok Sabha election dates will be announced
Lok Sabha Election Dates 2024: लोकसभा चुनाव 2024 का काउंटडाउन शुरू हो चुका है. चुनाव आयोग ने इसके लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली है. अब से कुछ घंटों बाद आयोग प्रेस कॉफ्रेंस करने वाला है. वहीं, चुनाव आयोग कुछ राज्यों के लिए विधानसभा चुनाव की तारीखों की भी घोषणा कर सकता है. बता दें, चुनाव की तारीखों की घोषणा शनिवार को दोपहर 3 बजे होने वाली एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में की जाएगी.
एक्स पर एक पोस्ट में ईसीआई के एक प्रवक्ता ने कहा, 'आमचुनाव 2024 और कुछ राज्य विधानसभाओं के चुनाव तारीखों की घोषणा करने के लिए चुनाव आयोग द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस शनिवार, 16 मार्च को दोपहर 3 बजे आयोजित की जाएगी. ईसीआई के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इसका सीधा प्रसारण किया जाएगा.' इससे पहले 2019 में 11 अप्रैल से 19 मई तक सात चरणों में लोकसभा चुनाव हुए थे और नतीजे 23 मई को घोषित किए गए थे.
कितने चरणों में चुनाव?
गौरतलब है कि मौजूदा सरकार का कार्यकाल 16 जून को खत्म होने वाला है। पिछले लोकसभा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा 10 मार्च को हो गई थी. ये चुनाव सात चरणों में हुआ था और मतदान 11 अप्रैल से शुरू हुआ था. वोटों की गिनती 23 मई को की गई थी.
इस बार चुनाव आयोग ने शुक्रवार को एक्स हैंडल पर ये जानकारी दी कि भारत में मतदान कार्यक्रम की घोषणा प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए शनिवार दोपहर 3 बजे होगी. इस साल अप्रैल-मई में चुनाव होंगे. संभावना जताई जा रही है कि इस बार लोकसभा चुनाव 7 से 8 चरणों में हो सकता है. यहां ये ध्यान रखना भी जरूरी है कि शुक्रवार को ही नव नियुक्ति निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और सुखबीर सिंह संधू ने अपना कार्यभार संभाला है.
राजनीतिक दलों ने आम चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा शुरू कर दी है. बीजेपी अब तक उम्मीदवारों की दो लिस्ट जारी कर चुकी है. कांग्रेस ने भी चुनाव के लिए उम्मीदवारों की दो सूचियां जारी की हैं. इस बीच चुनाव आयोग ने 14 मार्च को एसबीआई से प्राप्त चुनावी बांड पर डेटा अपनी वेबसाइट पर अपलोड किया. फ्यूचर गेमिंग एंड होटल सर्विसेज और मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड राजनीतिक दलों को दान देने वाले शीर्ष लोगों में से थे. वित्त अधिनियम 2017 और वित्त अधिनियम 2016 के माध्यम से विभिन्न कानूनों में किए गए संशोधनों को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत के समक्ष विभिन्न याचिकाएं दायर की गईं, जिसमें कहा गया कि उन्होंने राजनीतिक दलों के लिए असीमित, अनियंत्रित फंडिंग के दरवाजे खोल दिए हैं.