हाई कोर्ट का फैसला: आरोपी पिता ने बेटी पर फंसाने का आरोप लगाते हुए सनसनीखेज खुलासा किया हाई कोर्ट ने कहा...
High Court News: हाई कोर्ट में एक ऐसा मामला आया, जिसे सुनकर और पढ़कर आपके भी रोंगटे खड़े हो जाएंगे। नाबालिग बेटी के साथ किसी और ने नहीं, उसके पिता ने ही बार-बार रेप करते रहा। निचली अदालत ने दुष्कर्मी पिता को आजन्म कारावास की सजा सुनाई थी, जिसे चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। रेप के आरोपी पिता ने बेटी पर फंसाने का आरोप लगाते हुए सनसनीखेज खुलासा किया।
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जोधपुर। 07 मार्च 2026| हाई कोर्ट में एक ऐसा मामला आया, जिसे सुनकर और पढ़कर आपके भी रोंगटे खड़े हो जाएंगे। नाबालिग बेटी के साथ किसी और ने नहीं, उसके पिता ने ही बार-बार रेप करते रहा। निचली अदालत ने दुष्कर्मी पिता को आजन्म कारावास की सजा सुनाई थी, जिसे चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। रेप के आरोपी पिता ने बेटी पर फंसाने का आरोप लगाते हुए सनसनीखेज खुलासा किया। मामले की सुनवाई के बाद पिता के आरोप को खारिज करते हुए डिवीजन बेंच ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए याचिका को खारिज कर दिया है।
हाई कोर्ट की तल्ख टिप्पणी
हाई कोर्ट के डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा है, ऐसा अपराध न केवल पीड़ित व्यक्ति पर बल्कि परिवार के भरोसे और समाज की नैतिकता के बुनियादी मूल्यों पर भी असर डालता है। यह सम्मान और व्यक्तिगत आज़ादी की संवैधानिक गारंटी का घोर उल्लंघन है। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस चंद्रशेखर शर्मा की डिवीज़न बेंच ने कहा कि 14 साल की लड़की के लिए अपने पिता के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने की हिम्मत जुटाना बहुत मुश्किल था, जिस पर वह रहने और गुज़ारे के लिए निर्भर थी। इसलिए रिपोर्ट करने में देरी और शुरू में अपराध का खुलासा न करना स्वाभाविक था।
आरोपी पीड़िता का जैविक पिता, देखभाल की जिम्मेदारी उनकी
डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा, “आरोपी, पीड़िता का जैविक पिता है। जैविक पिता होने के नाते पीड़िता रक्षा, देखभाल और सुरक्षा करना एक पवित्र और नैतिक जिम्मेदारी बनती है है। सुरक्षा करने के बजाया आरोपी पिता ने पीड़िता का लंबे समय तक बार-बार उसकी शारीरिक गरिमा और इज्ज़त का उल्लंघन किया, जब वह सिर्फ़ 14 साल की थी... कोई भी बेटी कभी यह अंदाज़ा नहीं लगा सकती कि उसका अपना पिता ही इस तरह का कृत्य करेगा।
पिता का सनसनीखेज खुलासा और आरोप
याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कहा, उसे इस मामले में गलत तरीके से फंसाया गया, क्योंकि वह अपनी बेटी और शिकायत करने वाली के बीच होने वाली शादी के खिलाफ़ था। याचिकाकर्ता ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए कहा, वह नपुंसक है,इसलिए वह दुष्कर्म करने में अस्मर्थ है। याचिकाकर्ता ने चिकित्सा प्रमाण पत्र भी पेश किया। डिवीजन बेंच ने अभियोजना की ओर से पेश रिकॉर्ड के साथ ही पीड़िता द्वारा एक दुष्कर्म के दौरान बनाए गए वीडियो को कोर्ट ने गौर से देखा। इस वीडियो के आधार पर कोर्ट ने याचिकाकर्ता की दलीलों को खारिज कर दिया।
हाई कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, नुकसान सिर्फ़ शारीरिक हिंसा तक ही सीमित नहीं होता; यह पीड़ित के मानसिक और भावनात्मक ताने-बाने को बुरी तरह प्रभावित करता है,खासकर तब जब ऐसा अपराध पिता करता है, वह व्यक्ति जिसे कानून और प्रकृति दोनों ही बच्चे का पालक मानते हैं। पिता ही इस तरह के कृत्य का अपराधी हो जाए तब अपराध और भी गंभीर और घिनौना हो जाता है। यह सिर्फ़ सज़ा के नियमों का उल्लंघन नहीं रह जाता और सबसे पवित्र और बुनियादी इंसानी रिश्ते के साथ गहरा धोखा बन जाता है।
याचिका को इस आधार पर किया खारिज
डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा, सज़ा भी अपराध की गंभीरता के हिसाब से होनी चाहिए। कोर्ट ने कहा, तरह की नैतिक गिरावट के प्रति कोई भी नरमी न सिर्फ़ ज्यूडिशियरी में लोगों का भरोसा कम करेगी, बल्कि बच्चों को इस तरह के बचाने के लिए कोर्ट की संवैधानिक और कानूनी ज़िम्मेदारी को भी पूरा करने में नाकामयाबी होगी। इस टिप्पणी के साथ याचिका को खारिज करते हुए निचली अदालत के फैसले को कोर्ट ने बरकरार रखा है।