टैक्स चोरी: छत्तीसगढ़ के पूर्व CM की डिप्टी सेक्रेटरी सौम्या चौरसिया की याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने किया खारिज
Supreme Court News: इनकम टैक्स एक्ट के तहत जारी किए गए सैंक्शन नोटिस को चुनौती देने वाली सौम्या चौरसिया की याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है।
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दिल्ली।07 मार्च 2026| इनकम टैक्स एक्ट के तहत जारी किए गए सैंक्शन नोटिस को चुनौती देने वाली सौम्या चौरसिया की याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। सैंक्शन नोटिस में सौम्या चौरसिया द्वारा टैक्स चोरी के एक मामले में उन पर मुदकमा चलाने की अनुमति दी गई है।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने मामले की सुनवाई की और दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश को सही ठहराया है जिसमें सौम्या चौरसिया की अपील को खारिज कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा, अभियोजन सैंक्शन की वैलिडिटी सहित सभी दलीलें सही समय पर सक्षम कोर्ट के सामने उठाने के लिए स्वतंत्र होंगी। कोर्ट ने कहा कि सक्षम कोर्ट हाई कोर्ट के आदेश से प्रभावित हुए बिना इन दलीलों की जांच करेगा। सौम्या चौरसिया की ओर से सीनियर एडवोकेट बलबीर सिंह ने डिवीजन बेंच के समक्ष पक्ष रखा।
क्या है मामला
फरवरी, 2020 में छत्तीसगढ़ में सौम्या चौरसिया के निवास व ठिकानों पर सर्च और सीज़र ऑपरेशन के बाद उनके खिलाफ असेसमेंट की कार्रवाई शुरू की गई। 2022 में उन्हें ED ने गिरफ्तार किया और दो साल बाद EOW ने उनके खिलाफ दो FIR दर्ज किए। इसके बाद AO ने असेसमेंट की कार्रवाई पूरी की। इसी असेसमेंट ऑर्डर को चुनौती देते हुए सौम्या चौरसिया ने इनकम टैक्स कमिश्नर के समक्ष अपील पेश की थी। इसके बाद सौम्या चौरसिया के खिलाफ तीसरी FIR दर्ज की गई और सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें ED के प्रकरण में अंतरिम ज़मानत दी। बाद में PCIT ने एक्ट की धारा 276C के तहत मुकदमा शुरू करने के लिए आदेश दिए और सौम्या चौरसिया को उस नियम के तहत दोषी ठहराने की मांग की गई।
हाई कोर्ट में दी थी चुनौती
बीते साल, साैम्या ने IT Act, 1961 की धारा 279(1) के तहत PCIT के 10 फरवरी 2025, 11 फरवरी 2025, और 19 फरवरी 2025 के आदेशों को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। इन आदेशों में असेसमेंट वर्ष 2011-12, 2012-13, 2014-15, 2017-18, 2019-20, 2020-21, और 2022-23 के लिए एक्ट की धारा 276C और 278E के तहत उनके खिलाफ मुकदमा शुरू करने और क्रिमिनल कंप्लेंट दर्ज करने की इजाज़त दी गई। उन्होंने CBDT के 23. जनवरी 2020 के सर्कुलर नंबर 5/2020 को भी चुनौती दी।
सौम्या के वकील ने इस तरह दी थी दलीलें
हाई कोर्ट के समक्ष सौम्या चौरसिया के वकील ने दलील दी, मुकदमा सिर्फ़ मंज़ूरी देने वाली अथॉरिटी ही पहले से प्रशासनिक मंज़ूरी लेकर शुरू कर सकती थी, लेकिन मंज़ूरी नहीं ली गई। उन्होंने आगे कहा कि ITAT ने पेनल्टी कन्फर्म/लगाई नहीं थी और CIT(A) के सामने उनकी अपील पेंडिंग रहने के दौरान प्रॉसिक्यूशन प्रोसीडिंग्स शुरू नहीं की जानी चाहिए थी। दूसरी ओर, रेवेन्यू ने जवाब दिया कि प्रॉसिक्यूशन तभी शुरू किया गया, जब सैंक्शनिंग अथॉरिटी, यानी PCIT से अप्रूवल मिला, क्योंकि टैक्स अमाउंट Rs.25 लाख से ज़्यादा था। यह कहा गया कि अप्रूवल PCIT से लेना ज़रूरी था, न कि 2 CCIT/DGIT रैंक के ऑफिसर्स के कॉलेजियम से।
हाई कोर्ट ने सुनाया था ऐसा फैसला
पक्षकारों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने नोट किया कि मांगी गई राशि 348 करोड़ (25 लाख से ज़्यादा) से ज़्यादा थी। इसलिए अभियोजन शुरू करने के लिए सही अथॉरिटी सैंक्शनिंग अथॉरिटी, यानी PCIT थी, न कि 2 CCIT/DGIT रैंक के ऑफिसर्स का कॉलेजियम। इसमें कहा गया, ''अधिनियम की धारा 276 (सी) (1) से संबंधित मामले में, जहां कर चोरी 25 लाख रुपये से अधिक है, ऐसे मामले में अनुमोदन प्राधिकारी मंजूरी देने वाला प्राधिकारी यानी पीसीआईटी होगा।