इंदौर जल त्रासदी : 15 मौतों के बाद मुख्यमंत्री का बड़ा एक्शन; अपर आयुक्त हटाए गए, लापरवाह अफसरों को नोटिस जारी

प्रशासनिक लापरवाही और 15 मासूमों की मौत मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में दूषित पेयजल की आपूर्ति ने एक भीषण मानवीय त्रासदी का रूप ले लिया है।

Update: 2026-01-02 11:25 GMT

इंदौर जल त्रासदी : 15 मौतों के बाद मुख्यमंत्री का बड़ा एक्शन; अपर आयुक्त हटाए गए, लापरवाह अफसरों को नोटिस जारी

Indore Contaminated Water : इदौर : प्रशासनिक लापरवाही और 15 मासूमों की मौत मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में दूषित पेयजल की आपूर्ति ने एक भीषण मानवीय त्रासदी का रूप ले लिया है। शहर के विभिन्न इलाकों में जहरीला पानी पीने से अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है। इस घटना ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि पिछले कई हफ्तों से नलों में गंदा पानी आ रहा था, जिसकी शिकायत बार-बार अधिकारियों से की गई, लेकिन सिस्टम की संवेदनहीनता के कारण इसे अनसुना कर दिया गया। अंततः पेयजल लाइन में सीवर का पानी मिलने से संक्रमण फैल गया और कई परिवार उजड़ गए।

Indore Contaminated Water : मुख्यमंत्री मोहन यादव का कड़ा रुख और कार्रवाई इस त्रासदी पर कड़ा संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मंत्रालय में आपातकालीन समीक्षा बैठक बुलाई। अपर मुख्य सचिव (नगरीय प्रशासन एवं विकास) द्वारा प्रस्तुत जांच रिपोर्ट पर चर्चा के बाद मुख्यमंत्री ने दोषी अधिकारियों पर गाज गिराने के निर्देश दिए। सरकार ने इंदौर नगर निगम के अपर आयुक्त को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। साथ ही, नगर निगम आयुक्त और अपर आयुक्त को कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी कर जवाब तलब किया गया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि नागरिकों के जीवन के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी स्तर के अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की चेतावनी को किया गया नजरअंदाज जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पहले ही नगर निगम को खतरे की चेतावनी दी थी। बोर्ड द्वारा शहर के 60 स्थानों से लिए गए सैंपलों में से 59 नमूने फेल पाए गए थे। रिपोर्ट के अनुसार, पानी में टोटल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की मात्रा अत्यधिक थी, जो मल-मूत्र के प्रदूषण से होती है। बोर्ड ने तीन बार पत्र लिखकर निगम प्रशासन को आगाह किया था कि इन क्षेत्रों में जल शोधन (Water Treatment) के बिना आपूर्ति न की जाए, परंतु इन चेतावनियों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया, जिसका परिणाम आज 15 मौतों के रूप में सामने आया है।

प्रभावित क्षेत्र और मानवाधिकारों का हनन दूषित पानी का कहर केवल एक मोहल्ले तक सीमित नहीं है। भागीरथपुरा के साथ-साथ खातीपुरा, रामनगर, खजराना, गोविंद कॉलोनी, परदेशीपुरा, सदर बाजार, राजवाड़ा और जूनी इंदौर जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में भी पानी पीने योग्य नहीं पाया गया है। मानवाधिकार विशेषज्ञों का मानना है कि स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना राज्य की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इस स्तर की लापरवाही सीधे तौर पर मानवाधिकारों का उल्लंघन है। दूषित पानी से उल्टी, दस्त और पेट के गंभीर रोगों ने सैकड़ों लोगों को अस्पताल पहुंचा दिया है।

सुधार के लिए तत्काल सरकारी निर्देश मुख्यमंत्री ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने नगर निगम में रिक्त पड़े आवश्यक तकनीकी और स्वास्थ्य संबंधी पदों को तत्काल प्रभाव से भरने के आदेश दिए हैं। साथ ही, पूरे शहर की जल वितरण प्रणाली का व्यापक ऑडिट करने और पुराने पाइपलाइनों के लीकेज को युद्ध स्तर पर दुरुस्त करने को कहा गया है। प्रशासन को निर्देशित किया गया है कि प्रभावित इलाकों में वैकल्पिक टैंकरों के माध्यम से शुद्ध पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए और बीमार लोगों को बेहतर से बेहतर इलाज मुहैया कराया जाए।

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