कौशिक और शाह की मुलाकात: चालीस मिनट की चर्चा में धर्मांतरण नक्सल गतिविधियों समेत प्रदेश के वर्तमान हालात पर गहन विमर्श..
रायपुर/नई दिल्ली,1 अक्टूबर 2021। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक की मुलाक़ात हुई है, यह मुलाक़ात क़रीब चालीस मिनट तक चली है। इस मुलाक़ात को लेकर बताया गया है कि यहाँ हुई चर्चा सकारात्मक और सांगठनिक क्रियाकलाप और प्रगति को लेकर हुईं, इन चर्चाओं में प्रदेश के हालात के साथ साथ धर्मांतरण और नक्सली मसला और नारकोटिक्स के बढ़ते प्रकोप का मुद्दा शामिल था।
भाजपा के भीतरखाने इस मुलाक़ात के अपने मायने हैं और इस मुलाक़ात को प्रदेश की सियासत से भी अलग रखकर देखे जाने से शायद ही किसी को इंकार होगा। भाजपा के भीतरखाने सूबे में जहां दो ख़ेमे साफ़ हैं वहाँ पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के करीबी धरमलाल कौशिक की मुलाक़ात के अपने अर्थ हैं। पर इससे भी ज़्यादा नज़रें टिकी हैं कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को जो हालात बताए गए होंगे जिनसे वे पूरी तरह नावाक़िफ़ नहीं ही होंगे उसके बाद छत्तीसगढ़ में क्या सियासती उठापटक होती है।
बहरहाल इस मुलाक़ात को लेकर धरमलाल कौशिक यह कहते है
”यह बेहद सकारात्मक चर्चा थी,प्रदेश में नक्सल समस्या को लेकर यह आग्रह किया गया कि, इस लड़ाई में केंद्र की लगातार मदद हमेशा से बेहद महत्वपूर्ण रही है, उसमें और गति आए यह बात रखी गई, साथ ही प्रदेश में धर्मांतरण और राज्य की क़ानून व्यवस्था के साथ साथ प्रदेश में नारकोटिक्स के बढ़ते प्रभाव को लेकर भी उन्हें सूचना दी गई है”
नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने यह बताते हुए “सकारात्मक” शब्द पर ख़ासा ज़ोर दिया। खबरें हैं कि उन्होंने प्रदेश के उन हालात को लेकर भी तफ़सील से बताई जिन्हे लेकर भाजपा लगातार निशाना साध रही है।
नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा
”केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हुई मुलाक़ात और चर्चा बेहद उत्साहित करने वाली थी, उन्होंने प्रदेश के हित विकास में हर संभव आवश्यक कार्यवाही का भरोसा दिलाया है नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो का कार्यालय खोले का आग्रह भी किया गया है,साथ ही विजय छत्तीसगढ अभियान के लिए जुटने को लेकर भी उन्होंने मार्गदर्शन दिया”
यहाँ याद रखा जाना चाहिए कि यह मुलाक़ात ऐसे समय हुई है जबकि भाजपा गुजरात के हालिया मॉडल के साथ गंभीर है, जहां मुख्यमंत्री समेत पूरा मंत्रिमंडल ही बदल दिया गया। खबरें हैं कि संगठन का प्रभार सम्हाल रहे रणनीतिकार दूसरी और तीसरी पंक्ति को मौक़ा देने की क़वायद में हैं, जिसे लेकर यह मानना है कि ऐसा करने से भाजपा के पक्ष में और अनुकूल वातावरण बन सकेगा।