Shinzo Abe Killer Sentence : पूर्व पीएम शिंजो आबे हत्याकांड में बड़ा फैसला : कातिल को मिली उम्रकैद की सजा, जानिए उस काली सुबह की पूरी कहानी

Shinzo Abe Killer Sentence : जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की हत्या के मामले में आखिरकार इंसाफ हो ही गया है, जापान की एक अदालत ने शिंजो आबे पर सरेआम गोली चलाने वाले शख्स तेत्सुया यामागामी को उम्रकैद की सजा सुनाई है

Update: 2026-01-21 06:14 GMT

Shinzo Abe Killer Sentence : पूर्व पीएम शिंजो आबे हत्याकांड में बड़ा फैसला : कातिल को मिली उम्रकैद की सजा, जानिए उस काली सुबह की पूरी कहानी

टोक्यो : Shinzo Abe Killer Sentence : जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की हत्या के मामले में आखिरकार इंसाफ हो ही गया है, जापान की एक अदालत ने शिंजो आबे पर सरेआम गोली चलाने वाले शख्स तेत्सुया यामागामी को उम्रकैद की सजा सुनाई है, कोर्ट का यह फैसला उस वक्त आया है जब पूरी दुनिया इस बड़े हत्याकांड के दोषी को कड़ी से कड़ी सजा मिलते देखना चाहती थी, चलिए विस्तार से समझते है की यह पूरा मामला क्या था और क्यों एक आम आदमी ने देश के सबसे बड़े नेता की जान ले ली थी

Shinzo Abe Killer Sentence : उस दिन जापान की सड़को पर खून ही खून

उस दन की तारीख थी 8 जुलाई 2022 और जगह था जापान का नारा शहर, जापान के सबसे लोकप्रिय और लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहे शिंजो आबे एक चुनावी सभा को संबोधित करने पहुंचे थे, वो अपनी पार्टी के उम्मीदवार के लिए वोट मांग रहे थे और सड़क किनारे खड़े होकर भाषण दे रहे थे, जापान मे सुरक्षा व्यवस्था अक्सर साधारण ही होता है क्योंकि वहा हिंसा बहुत कम होती है, इसी का फायदा उठाकर 45 साल का तेत्सुया यामागामी भीड़ मे घुसा और शिंजो आबे के पीछे जाकर खड़ा हो गया।

आबे की भाषण चल रही थी, यामागामी ने अपनी घर पर बनाई हुई देसी बंदूक निकाली और पीछे से दो गोलिया दाग दी पहली गोली मिस हो गई, लेकिन दूसरी गोली सीधे आबे की गर्दन और सीने के पास जाकर लगी, आबे वही गिर पड़े और कुछ ही देर में उनका शरीर सफेद पड़ गया, उन्हें तुरंत हेलिकॉप्टर से अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों की लाख कोशिशो के बाद भी उन्हे बचाया नही जा सका, 67 साल की उम्र में दुनिया ने एक महान नेता को खो दिया था

क्यो की गई शिंजो आबे की हत्या

हैरानी की बात यह थी की हमलावर यामागामी को पुलिस ने मौके से ही दबोच लिया था पूछताछ में जो बाते निकलकर सामने आई, उसने सबको चौंका दिया, यामागामी कोई पेशेवर अपराधी नही था बल्कि वह एक पूर्व सैनिक था उसने पुलिस को बताया की वह शिंजो आबे की नीतियो से बहुत चिढ़ा हुआ था

यामागामी का आरोप था की आबे का संबंध एक खास धार्मिक संगठन से है इस संगठन की वजह से यामागामी का परिवार पूरी तरह बर्बाद हो गया था, उसकी मां ने उस चर्च को इतना दान दिया था की उनका घर बिक गया और वो कंगाल हो गए यामागामी को लगा की शिंजो आबे उस संगठन को बढ़ावा दे रहे है, इसलिए उसने बदला लेने के लिए आबे की हत्या की साजिश रची, उसने महीनो तक घर पर ही बंदूक बनाना सीखा और कई बार आबे की रैलियो की रेकी भी की थी

अदालत का फैसला और सजा

नारा जिला कोर्ट मे चले इस लंबे ट्रायल के दौरान यामागामी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया था सरकारी वकीलो ने दलील दी की यह हमला न केवल एक व्यक्ति की हत्या थी, बल्कि यह लोकतंत्र पर बड़ा हमला था उन्होंने अपराधी के लिए मौत की सजा की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने सभी पहलुओ को देखते हुए उसे उम्रकैद की सजा सुनाई, जज ने अपने फैसले में कह की भले ही हमलावर की अपनी कोई भी निजी वजह रही हो, लेकिन कानून हाथ में लेकर किसी की जान लेना और देश की शांति भंग करना माफी के लायक नही

शिंजो आबे भारत के सच्चे दोस्त

शिंजो आबे का जाना भारत के लिए भी बहुत नुकसान दायक था आबे को भारत का सबसे करीबी मित्र माना जाता था, उन्होंने ही बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की नींव रखने में भारत की मदद की थी उनके कार्यकाल मे भारत और जापान के रिश्ते काफी मजबूत थे साल 2021 मे भारत सरकार ने उन्हें पद्म विभूषण से सम्मान किया था आबे एक राजनीतिक परिवार से आते थे उनके दादा और पिता भी जापान की सेवा कर चुके थे वे साल 2012 से 2020 तक लगातार जापान के पीएम रहे और अपनी नीतियो के लिए दुनिया भर में मशहूर हुए

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