IAS गिरफ्तार : फर्जी तरीके से प्रमोशन लेने वाला IAS देर रात गिरफ्तार…. DPC में पेश किया था जज का फर्जी आदेश… लिव इऩ में रहने वाली युवती ने …..

Update: 2021-07-11 01:26 GMT

इंदौर 11 जुलाई 2021। IAS अफसर को पुलिस ने देर रात गिरफ्तार किया है। IAS पर फर्जी तरीके से प्रमोशन लेने का आरोप है। IAS अफसर का नाम संतोष वर्मा है, जो अभी नगरीय प्रशासन विभाग में अपर आयुक्त के तौर पर पदस्थ हैं। आरोप है कि DPC के लिए संतोष वर्मा ने जज के फर्जी साइन कराकर रिपोर्ट तैयार की थी। विशेष न्यायाधीश (सीबीआइ/व्यापमं) की कोर्ट के फर्जी फैसले से आइएएस बने संतोष वर्मा को 12 घंटे चली कड़ी पूछताछ के बाद पुलिस ने शनिवार रात गिरफ्तार कर लिया। वर्मा ने जज विजेंद्र सिंह रावत के आदेश और वकील एनके जैन का नाम लेकर बचने का प्रयास किया, लेकिन देर रात हुई सख्ती से टूट गया। अफसरों ने वल्लभ भवन (भोपाल) से अनुमति ली और करीब 12 बजे गिरफ्तारी ले ली।

IAS वर्मा के खिलाफ 27 जून को एमजी रोड पुलिस ने न्यायाधीश की रिपोर्ट पर धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेज तैयार करने का केस दर्ज किया था। अफसरों ने वल्लभ भवन (भोपाल) से अनुमति ली और शनिवार रात करीब 12 बजे गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में कोर्ट की ओर से ही 27 जून को एमजी रोड थाने पर रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

युवती पर लगाया था आरोप

4 माह पूर्व शहर के लसूड़िया थाने में IAS अफसर संतोष वर्मा ने एक महिला के खिलाफ केस दर्ज कराया था। शिकायत में कहा है कि महिला ब्लैकमेल कर रही है। उसने दस्तावेज में पति के रूप में मेरा नाम दर्ज कराया था। पासपोर्ट और मतदाता परिचय पत्र भी मेरा नाम लिखवा लिया है। उधर, महिला ने नवंबर 2016 अफसर पर शादी के बाद धोखा देने का आरोप लगाया था। वह थाने में इसकी शिकायत भी कर चुकी है।

ये था पूरा मामला

संतोष वर्मा राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी थे। अक्टूबर 2020 में आईएएस अवार्ड के लिए DPC होनी थी। इस दौरान संतोष वर्मा के खिलाफ उनकी कथित पत्नी हर्षिता की तरफ से दर्ज करायी गयी शिकायत का प्रकरण कोर्ट में था। डीपीसी में अधिकारी संतोष वर्मा के खिलाफ चल रहे आपराधिक प्रकरण की जानकारी मांगी गयी तो वर्मा ने सामान्य प्रशासन विभाग को फैसले की प्रति पेश कर कहा कि मामले में समझौता हो गया है। शासन ने कहा समझौता बरी की श्रेणी में नहीं आता है। उसी दिन वर्मा ने एक अन्य फैसला पेश कर कहा, कोर्ट ने उसे बरी कर दिया है। वर्मा के करीबी जज ने फैसले को सही बताते हुए शेख से अपील न करने का प्रस्ताव तैयार करवा दिया। इस आधार पर संतोष वर्मा को आईएएस अवार्ड मिल गया। एक ही दिन में दो फैसले मिलने पर अफसरों को शक हुआ तो पता चला 6 अक्टूबर 2020 को जब आदेश जारी हुआ, उस दिन जज छुट्टी पर थे। जिसके बाद आइजी हरिनारायणाचारी मिश्र ने जांच बैठा दी। चार साल पहले साल 2021 में हर्षिता अग्रवाल नाम की महिला ने संतोष वर्मा के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। हर्षिता खुद को वर्मा की पत्नी बताती है। पहले यह केस न्यायाधीश अरविंद गुर्जर की कोर्ट में था। ३ अक्टूबर को ही मामला न्यायाधीश विजेंद्र सिंह रावत की कोर्ट में ट्रांसफर हुआ। हर्षिता ने ही मामले की शिकायत कोर्ट में की थी।

 

Tags:    

Similar News