Mahakal Bhasm Aarti 2 February 2026 : महाकाल श्रृंगार आरती : मुकुट और रुद्राक्ष की माला पहन राजा स्वरूप में दिखे महादेव, घर बैठे करें दर्शन

Mahakal Bhasm Aarti 2 February 2026 :आज फाल्गुन महीने की कृष्णपक्ष प्रतिपदा तिथि दिन सोमवार है. आज महाकाल के मंदिर में एक अद्भुद नजारा देखने को मिल रहा है.महाकाल के दरबार में हजारो भक्तो की भारी भीड़ देखने को मिल रही है.

Update: 2026-02-02 02:41 GMT

Mahakal Bhasm Aarti 2 February 2026 : उज्जैन : आज फाल्गुन महीने की कृष्णपक्ष प्रतिपदा तिथि दिन सोमवार है. आज महाकाल के मंदिर में एक अद्भुद नजारा देखने को मिल रहा है.महाकाल के दरबार में हजारो भक्तो की भारी भीड़ देखने को मिल रही है. श्रद्धालु आधी रात से ही लंबी कतारों में भगवान भोलेनाथ के दर्शन के लिए लग जाते है.आज सुबह जब मंदिर का पट खोला गया तो जय महाकाल के जय घोष से पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा, भक्तो ने साक्षात् बाबा महाकाल के दर्शन किए| 

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श्रृंगार आरती 

महाकाल मंदिर में आज सुबह 4 बजे जब मंदिर का दरवाजा खोला गया तो रोज की भांति. आज भी सबसे पहले भोलेनाथ का दूध, दही, घी, शक्कर पंचामृत आदि से अभिषेक किया गया. फिर भोलेनाथ को गर्म शुद्ध जल से स्नान कराया गया. उसके बाद मंत्रो के उच्चारण के साथ भोलेनाथ का सुंदर श्रृंगार किया गया. उसके बाद भगवान भोलेनाथ को फूलो की माला पहनाई गई, बेल पत्र चढ़ाया गया भांग अर्पित की गई. और भोलेनाथ को सुंदर मुकुट पहनाया गया. और चन्दन का टिका लगाया गया, नए वस्त्र धारण कराये गए, गले में रुद्राक्ष की माला और नाग की माला पहनाई गई, महाकाल मंदिर में भोलेनाथ को दिन भर अलग-अलग सिंगार के साथ अनेको रूपों में सजाया जाता है. भगवान महाकाल के विभिन्न रूप के दर्शन होते है|

महाकल भस्म आरती

फिर कपूर आरती की गई, उसके बाद बाबा महाकाल अर्पित किया गया, फिर महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भस्म की पोटली बनाकर, भस्म को एक महीन सुभी कपडे में बांधकर भोलेनाथ पर हल्के हाथों से बिखेरा जाता है. जिसे भस्म आरती कहा जाता है, यह भस्म आरती करीब 2 घंटे तक की जाती है, ढोल नगाड़ो थाप और मधुर मंत्रो से मंदिर परीसर भक्तिमय हो जाता है, त्रिकालदर्शी महाकाल के दर्शन कर भक्त निहाल हो जाते है. मान्यता ऐसी है, की इस भस्म आरती के दौरान साक्षात् महाकाल के दर्शन होते है, ये जो भस्म की वर्षा भोलेनाथ पर की जाती उसे कपिला गाय के गोबर से बने कंडे और शमी पीपल और पलास और बेर पेड़ के लकड़ियों को एक साथ जलाकर तैयार किया जाता है|



 


 महाकाल की सेवा

आरती का समय : सबसे पहले भस्म आरती 4 से 6 बजे तक की जाती है उसके बाद दद्योतक आरती 7:30 से 8:15 बजे तक चलती है उसके बाद भोग आरती 10:30 से 11:15 बजे तक की जाती है. जिसमे मौसम के अनुसार भोलेनाथ को भोग लगाया जाता है. भोग की पूरी थाल सजाई जाती है. उसके बाद शाम को संध्या आरती होती है. जो 6:30 से 7:15 बजे तक की जाती है, उसके बाद अंत में शयन आरती रात 10:30 से 11:00 बजे तक की जाती है. फिर दूसरे दिन तक के लिए मंदिर के पट बंद कर दिए जाये है. इसी तरह दिन भर महाकाल अपने भक्तो को अलग अलग रूपों में दर्शन देते है|

मंदिर की मान्यता

महाकाल मंदिर की एक और खास मान्यता है. की अगर आप महाकाल दर्शन पर आ रहे है, तो जुना महाकाल के दर्शन जरुर करे, मतलब यहाँ मंदिर परिसर में ही जुना महाकाल मंदिर है, कहा जाता है. की जुना महाकाल के दर्शन बिना महाकाल दर्शन अधुरा माना जाता है. इसलिए जब भी आप उज्जैन महाकाल दर्शन पर आये तो जुना महाकाल के दर्शन जरुर करें, और अपनी धर्मिक यात्रा को पूरी करें|

मंदिर से जुड़ी जरुरी जानकारी

उज्जैन महाकाल मंदिर से जुडी कोई भी जानकारी के लिए आप इस टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 18002331008 में फोन कर सकते है, महाकाल मंदिर में दर्शन आदि की जानकारी पूजा पाठ दान आदि की जानकारी के लिए आप इन नंबरों 0734-2559272, 2559277, 2559276, 2559275 पर फोन कर जानकारी घर बैठे पा सकते है|

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