Holashtak 2026 : होलाष्टक की शुरुआत के साथ ही होली की बाजार में बढ़ी रौनक, लेकिन महंगाई ने बिगाड़ा गुझिया का स्वाद

Holashtak 2026 : रंगों के त्योहार होली की आहट के साथ ही बाजारों में होलाष्टक की दस्तक सुनाई देने लगी है. आज मंगलवार से होलाष्टक शुरू होने के साथ ही ब्रज के बाजारों में खरीदारी का उत्साह तो बढ़ा है, लेकिन इस बार महंगाई ने आम आदमी की जेब को ढीला कर दिया है. गुझिया और पकवानों की मिठास इस बार देसी घी, रिफाइंड तेल और सूखे मेवों की बढ़ती कीमतों के कारण कुछ कम होती नजर आ रही है. पिछले साल के मुकाबले रसोई के बजट में आए इस उछाल ने त्योहार की तैयारियों को थोड़ा चुनौतीपूर्ण बना दिया है.

Update: 2026-02-24 05:51 GMT

Holashtak 2026 : होलाष्टक की शुरुआत के साथ ही होली की बाजार में बढ़ी रौनक, लेकिन महंगाई ने बिगाड़ा गुझिया का स्वाद

Holashtak 2026 : मथुरा/ब्रज : रंगों के त्योहार होली का काउंटडाउन शुरू हो गया है. आज मंगलवार से होलाष्टक की शुरुआत हो गई है, जिसके साथ ही बाजारों में खरीदारों की भीड़ उमड़ने लगी है. ब्रज की गलियों में होली की रंगत तो दिखने लगी है, लेकिन इस बार रसोई का बजट आम आदमी को परेशान कर रहा है. देसी घी, रिफाइंड तेल और सूखे मेवों की कीमतों में आए भारी उछाल ने त्योहार के पकवानों, खासकर गुझिया को काफी महंगा कर दिया है.

घी और तेल की कीमतों ने लगाई आग

त्योहारों पर सबसे ज्यादा खपत देसी घी और रिफाइंड तेल की होती है. डेयरी व्यवसायी योगेश कुशवाह के आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले साल के मुकाबले इस बार कीमतें काफी ज्यादा हैं. पिछले साल जो देसी घी 560-650 रुपये प्रति किलो मिल रहा था, वह अब 680-750 रुपये तक पहुंच गया है. इसी तरह, रिफाइंड तेल की कीमतों में भी करीब 30-40 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है. पिछले साल 105-115 रुपये में मिलने वाला तेल अब 140-150 रुपये लीटर बिक रहा है.

मेवों के दाम सुनकर उड़ रहे होश

होली पर गुझिया और ठंडाई की शान बढ़ाने वाले सूखे मेवे इस बार काफी कड़वे लग रहे हैं. सबसे ज्यादा असर इलायची और किशमिश पर पड़ा है. इलायची 3500 रुपये प्रति किलो के पार है, तो वहीं किशमिश के दाम पिछले साल से सीधे दोगुने होकर 500 रुपये प्रति किलो हो गए हैं. काजू और बादाम की कीमतों में भी 100 से 150 रुपये प्रति किलो की वृद्धि हुई है. हालांकि, मेवा बाजार में केवल चिरौंजी ही ऐसी चीज है जिसके दाम गिरे हैं. पिछले साल 2200-2500 में मिलने वाली चिरौंजी अब 1800-2000 रुपये के भाव पर पहुँच हैं.

मैदा और चीनी ने दी थोड़ी राहत

राहत की बात यह है कि गुझिया बनाने की मुख्य सामग्री यानी मैदा और चीनी के दाम पिछले साल जितने ही स्थिर हैं. मैदा 40-55 रुपये और चीनी 45 रुपये प्रति किलो के आसपास मिल रही है. इसके अलावा, होली की खास ठंडाई के थोक भाव में भी कोई बदलाव नहीं हुआ है, यह पुराने रेट 440 रुपये प्रति किलो पर ही उपलब्ध है.

रंग और गुलाल का बाजार हुआ गुलजार

खाद्य सामग्री महंगी होने के बावजूद रंग-गुलाल के बाजार में काफी उत्साह है. मेवा विक्रेता गोपाल पुरसनानी के अनुसार, गुलाल और चंदन की कीमतों में ज्यादा बदलाव नहीं आया है.

गुलाल : 10 किलो का बैग 500-540 रुपये में मिल रहा है.

प्रीमियम रेंज : अच्छी क्वालिटी का गुलाल 160 रुपये प्रति किलो है.

स्पेशल आइटम : बाजार में चाइना स्प्रे और पक्का रंग की काफी डिमांड है, जो 20-30 रुपये प्रति नग में उपलब्ध हैं.

चंदन : तिलक के लिए चंदन पाउडर 75 से 150 रुपये के भाव पर बिक रहा है.

कुल मिलाकर, होलाष्टक लगने के बाद से बाजार में ग्राहकों की चहल-पहल तो है, लेकिन महंगाई की वजह से लोग संभलकर खरीदारी कर रहे हैं. अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में जब खरीदारी और बढ़ेगी, तब बाजार का रुख क्या रहता है.

होलाष्टक का अर्थ और इसकी शुरुआत

सरल शब्दों में कहें तो होली से ठीक आठ दिन पहले के समय को होलाष्टक कहा जाता है. यह शब्द होली और अष्टक से मिलकर बना है हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से लेकर पूर्णिमा तक के समय को होलाष्टक माना जाता है. इस दौरान प्रकृति में एक खास तरह का बदलाव आता है और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इन आठ दिनों में ग्रहों का स्वभाव काफी उग्र रहता है, जिसके कारण शुभ कार्यों पर रोक लग जाती है.

पौराणिक कथा और महत्व

होलाष्टक के पीछे दो प्रमुख पौराणिक मान्यताएं हैं. पहली कथा के अनुसार, इसी समय काल के दौरान असुर राजा हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र प्रहलाद को भगवान विष्णु की भक्ति छोड़ने के लिए आठ दिनों तक यातनाएं दी थीं. इन आठ दिनों में प्रहलाद को मारने के कई प्रयास किए गए, लेकिन वे सफल नहीं हुए. अंत में आठवें दिन होलिका प्रहलाद को लेकर आग में बैठी और खुद जल गई. दूसरी कथा कामदेव के भस्म होने से जुड़ी है. भगवान शिव की तपस्या भंग करने के अपराध में शिव जी ने कामदेव को फाल्गुन अष्टमी के दिन भस्म कर दिया था, जिसके बाद उनकी पत्नी रति की प्रार्थना पर महादेव ने उन्हें फिर से जीवित करने का वरदान दिया.

होलाष्टक के दौरान क्या न करें?

इन आठ दिनों को हिंदू धर्म में अशुभ समय माना जाता है. यही कारण है कि होलाष्टक के दौरान शादी-ब्याह, सगाई, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण या नए घर वाहन की खरीदारी जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते. माना जाता है कि ग्रहों की उग्रता के कारण इस समय शुरू किए गए कार्यों में बाधाएं आ सकती हैं या उनका फल शुभ नहीं मिलता. हालांकि, दान-पुण्य और भगवान की भक्ति के लिए यह समय बहुत उत्तम माना जाता है.

होलाष्टक का समापन

होलाष्टक का अंत होलिका दहन के साथ होता है. आठ दिनों के कष्टों और नकारात्मक ऊर्जा को होलिका की अग्नि में जलाकर समाप्त किया जाता है. इसके अगले दिन रंगों की होली के साथ खुशियां मनाई जाती हैं. वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी देखें तो यह ऋतु परिवर्तन का समय होता है, जहां सर्दियों की विदाई और गर्मियों की शुरुआत होती है, इसलिए इस समय संयमित दिनचर्या का पालन करना स्वास्थ्य के लिए भी बेहतर माना गया है.

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