आस्था का अर्ध्य: छठ महापर्व के "संध्या अर्ध्य" में कल छत्तीसगढ़ में उमड़ेगा इन घाटों पर श्रद्धालुओं का सैलाब,

देश का सबसे बड़ा स्थाई और व्यवस्थित घाट इस शहर में...

Update: 2022-10-29 09:18 GMT

NPG ब्यूरो

रायपुर। रायपुर के महादेव घाट समेत छत्तीसगढ़ के विभिन्न शहरों में छठ महापर्व की खास रस्म "संध्या अर्ध्य" के लिए लाखों हाथ सूर्यदेव को अर्ध्य देने ऊपर उठेंगे। एक तरह से कहें तो लघु बिहार और उत्तर प्रदेश कल हमें छत्तीसगढ़ में नज़र आएगा। आपको बता दें कि छत्तीसगढ़ में रायपुर, बिलासपुर, भिलाई, कोरबा, रायगढ़, अंबिकापुर के साथ - साथ बाकी शहरों में भी लाखों की संख्या में बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोग रहते हैं। इसलिए छठ व्रतियों के लिए नदियों और तालाबों पर छठपूजा के लिहाज से व्यापक इंतजाम किए गए हैं। आइए जानते हैं प्रमुख शहरों में कहाँ-कहाँ संध्या अर्ध्य के लिए छठ व्रती जुटेंगे।

28 अक्टूबर को "नहाय खाय" के साथ छठ महापर्व की शुरुआत हो चुकी है। आज "खरना" मनाया जाएगा। खरना के अगले दिन यानि 30 अक्टूबर की शाम को डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। इस दौरान व्रती नदी या तालाब में खड़े होकर कमर तक भीगकर अस्तचलगामी सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं। प्रमुख शहरों में किए गए प्रबंध पर एक नज़र-

रायपुर - राजधानी रायपुर के पौराणिक हटकेश्वर महादेव धाम में पवित्र खारून नदी के महादेव घाट पर मनाए जाने वाले छठ पर्व का अपना एक विशेष आकर्षण है।करीब 50 हज़ार से अधिक छठ व्रती यहां संध्या अर्ध्य के लिए जुटेंगे। यहां महाआरती और दीपदान किया जाएगा। भोजपुरी कलाकारों द्वारा भजन संध्या की भी तैयारी है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी यहां पूजा में शामिल होंगे। महादेव घाट के अलावा बीरगांव के व्यास तालाब में भी छठ पूजा के लिए हजारों लोग जुटते हैं। बिहार से रोजी-रोटी कमाने आए लोगों ने लगभग 45 साल पहले बिरगांव के व्यास तालाब में छठ पूजा की शुरुआत की थी। साल दर साल छठ व्रती यहां जुड़ते गए। अब हजारों लोग यहां पूजा करने के लिए जुटते हैं। इसके अलावा आमा तालाब, गुढ़ियारी, शीतला तालाब आदि में भी आसपास के छठ व्रती पूजा करेंगे।

बिलासपुर - बिलासपुर में छठ पूजा की अलग ही छटा नजर आती है। देश में सबसे बड़ा स्थाई और व्यवस्थित घाट बिलासपुर शहर के तोरवा स्थित अरपा नदी पर है। बिलासपुर में तोरवा छठ घाट पर पूजा की तैयारियां की गई हैं। यहां इस बार एक लाख लोगों के पहुंचने की उम्मीद है। छठ पूजा के लिए पाटलिपुत्र संस्कृति विकास मंच के द्वारा तैयारियां की गई हैं। सड़कों की मरम्मत के अलावा छठ घाट की सफाई व्यवस्था को भी दुरुस्त किया गया है ताकि यहां पहुंचने वाले छठ व्रतियों को पूजा कार्य में किसी प्रकार की दिक्कत न हो। पार्किंग की भी अच्छी व्यवस्था की गई है।

भिलाई - स्टीलसिटी भिलाई और आसपास के क्षेत्रों में भी तालाबों की साफ-सफाई, रंग-रोगन और सजावट कर ली गई है। शहर के सेक्टर-2, सेक्टर-7, रामनगर, भेलवा तालाब, बैकुंठधाम, लक्ष्मण तालाब, सूर्यकुंड छावनी, खुर्सीपार तालाब, हाउसिंग बोर्ड, कुरुद तालाब सहित भिलाई-दुर्ग व भिलाई-3 और कुम्हारी के करीब 29 तालाबों पर छठ पूजा होती है। जहां लाखों लोगों के संध्या अर्ध्य के लिए जुटने का अनुमान है।

बलरामपुर - बलरामपुर के रामानुजगंज में कन्हर नदी के किनारे घाट पर संध्या अर्ध्य का प्रबंध है। छत्तीसगढ़ का बलरामपुर जिला झारखंड की सीमा से सटा हुआ है। यही वजह है कि रामानुजगंज में छत्तीसगढ़ और झारखंड के लोग भी छठ पूजा करने आते हैं।

कोरबा - कोरबा में कलअस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने छठ घाटों सहित लोगों ने घर पर तैयारियां पूरी कर ली है। SECL शिव मंदिर तालाब, मुड़ापार तालाब, सर्वमंगला मंदिर, हसदेव नदी घाट, डेंगुरनाला छठ घाट में भी छठी जुटेंगे।

रायगढ़ - छठ लोक आस्था पर्व को केलो नदी के छठ घाट में प्रमुख रूप से मनाया जाएगा। इसके अलावा महादेव मंदिर स्थित तालाब सहित जूटमिल, कयाघाट, खर्राघाट, एसईसीएल रपटा, पंजरी प्लांट के अलावा बुढ़ी माई तालाब, निकले महादेव मंदिर तालाब सहित अन्य घाटों पर भी संध्या अर्ध्य दिया जाएगा।

सीतापुर- सीतापुर के बाजारडाँड में स्थित सार्वजनिक तालाब में सूर्य उपासना का महापर्व छठ बड़े भक्तिभाव एवं धूमधाम से मनाया जाता है। हमेशा कि तरह इस साल भी छठपूजा को लेकर नगर पंचायत द्वारा व्यापक इंतजाम किए गए हैं।छठपूजा से पहले पूरे घाट एवं तालाब की सफाई कर, आवागमन व विद्युत व्यवस्था के अलावा शामियाना भी लगाया गया है। ताकि व्रतियों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

इन प्रमुख स्थानों के अलावा भी विभिन्न शहरों के अनेक नदी-तालाबों में कल अस्त होते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा।

कहा जाता है कि सूर्य उपासना के इस अनुपम पर्व पर पूर्ण विधि-विधान से पूजा का फल सैकड़ों यज्ञों के फल की प्राप्ति से भी ज्यादा होता है। जिससे सिर्फ संतान ही नहीं बल्कि परिवार में सुख समृद्धि की भी प्राप्ति होती है। इसके महत्व और व्रतियों के उत्साह को देखते हुए ही अब छठ महपर्व का बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के बाहर भी इतने बड़े पैमाने पर प्रबंध किया जाने लगा है।

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