Train me generator yan kyo Laga hota Hai: ट्रेन बिजली से चलती है तो इसके पीछे जनरेटर यान क्यों लगाया जाता है? जानिए इलेक्ट्रिक इंजन का पूरा पावर सिस्टम!

Train me generator yan kyo Laga hota Hai: सवाल यह है कि जब ट्रेन बिजली चल रही है तो इसमें जनरेटर कार लगाने की क्या आवश्यकता है। आज हम इसी बात को जानेंगे कि बिजली से चलने वाले ट्रेन में जनरेटर क्यों लगा होता है? आइए जानते हैं,,,

Update: 2026-01-06 11:02 GMT

Train me generator yan kyo Laga hota Hai: भारत में रेल का इतिहास काफी पुराना रहा है। शुरुआत में रेल के बोगियों को खींचने के लिए भाप इंजन का इस्तेमाल होता था। जैसे-जैसे बिजली सभी जगह पहुंचने लगी तो भारतीय रेलवे का भी विद्युतीकरण होता गया। इस विकास ने रेल इंजन को बाप से बदलकर विद्युत से चलने वाला बना दिया। यह भारत की तकनीकी प्रगति का बहुत बड़ा उदाहरण है। आज के सभी ट्रेनों में आपने देखा होगा कि इंजन के ऊपर ओवरहेड तारों का एक जाल होता है होती है और ट्रेन का इंजन, पेंटोग्राफ के जरिए उससे जुड़ा होता है। अब सवाल यह है कि जब ट्रेन बिजली चल रही है तो इसमें जनरेटर कार लगाने की क्या आवश्यकता है। आज हम इसी बात को जानेंगे कि बिजली से चलने वाले ट्रेन में जनरेटर क्यों लगा होता है?

ट्रेन में लगे होते हैं जनरेटर यान

अक्सर लोगों के मन में सवाल आता है कि पूरी ट्रेन तो बिजली से चलती है तो ट्रेन के पीछे जनरेटर यान लगाने की क्या आवश्यकता है? ऐसे इलेक्ट्रिक ट्रेन जो लंबी दूरी तय करते हैं उनमें यह जनरेटर लगा होता है। इनमें कई एसी कोच और पैंट्री की सुविधा होती है, जिस वजह से इन ट्रेनों में ज्यादा पावर की जरूरत है और सिर्फ तारों से ही इसकी पूर्ति नहीं की जा सकती। इसलिए ट्रेन के सही संचालन के लिए यह जनरेटर यान ट्रेन के पीछे जोड़ा जाता है और इसी से ही सभी डिब्बों में बिजली भेजी जाती है।

कुछ ही ट्रेनों में लगा होता है जनरेटर कार

कुछ ऐसी ट्रेनें हैं जिनका सफर कई दिनों का होता है तो ऐसे में उन्हें 24 घंटे बिजली सप्लाई की जरूरत पड़ती है। राजधानी, गरीब रथ, तेजस और शताब्दी जैसी ट्रेनों में केवल ओवरहेड तारों के बिजली से ही काम नहीं चलता। इन्हें अतिरिक्त पावर के लिए जनरेटर यान का उपयोग करना पड़ता है, ताकि किसी भी यात्री को असुविधा न हो।

जनरेटर के अलावा भी लगी होती है बैटरी

लंबी दूरी की ट्रेनों में पावर सप्लाई के लिए जनरेटर के अलावा इंजन के नीचे एक बैटरी भी लगी होती है। यह बैटरी इमरजेंसी के लिए लगाई गई है ताकि जनरेटर के खराब होने पर इससे मदद ली जा सके। यह बैटरी बिजली से हर वक्त चार्ज होती रहती है। एक लाइन में कहे तो एसी कोच में पावर सप्लाई करने के लिए यह जनरेटर यान और बैटरी लगाया जाता है, क्योंकि सबसे अधिक बिजली इसी कोच में खर्च होती है।

जानिए ट्रेन के विद्युतीकरण का इतिहास

इलेक्ट्रिक ट्रेन की शुरुआत 1881 में जर्मनी के बर्लिन शहर से हुई थी और भारत में बात करें तो 1925 में मुंबई के विक्टोरिया टर्मिनस(छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस) से कुर्ला हार्बर तक पहली इलेक्ट्रिक ट्रेन चली थी। यह ट्रेन 1500 वोल्ट डीसी प्रणाली पर काम करती थी। इस उपलब्धि के बाद भारत एशिया का तीसरा देश बन गया था, जहां इलेक्ट्रिक ट्रेन चली थी।

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