Pehli Bar Kis Sahar Me Pahucha Tha Nal Se Paani: भारत में पहली बार इस शहर में पहुंचा था नल से पानी, 20 किमी तक बिछाया गया पाईप लाइन, जानिए 140 साल पुराना इतिहास!
Pehli Bar Kis Sahar Me Pahucha Tha Nal Se Paani: आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि इस शहर में लगभग 140 साल पहले से ही शुद्ध जल नलों द्वारा पहुंचाया जा रहा है। इस समय कुएं और बावड़िया होना भी बहुत बड़ी बात होती थी, ऐसे में यह चमत्कार कैसे हुआ? आइए जानते हैं।
Pehli Bar Kis Sahar Me Pahucha Tha Nal Se Paani: क्या आपको पता है कि नलों से शुद्ध जल सबसे पहले किस शहर में पहुंचाया गया था? वर्तमान समय में लगभग सभी घरों में नल से शुद्ध जल की सुविधा हो गई है। गरीब से गरीब परिवारो में विभिन्न सरकारी योजनाओं द्वारा नल की सुविधा प्रदान की गई है। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि इस शहर में लगभग 140 साल पहले से ही शुद्ध जल नलों द्वारा पहुंचाया जा रहा है। इस समय कुएं और बावड़िया होना भी बहुत बड़ी बात होती थी, ऐसे में यह चमत्कार कैसे हुआ? आइए जानते हैं।
पुणे शहर में किया गया यह कमाल
19वीं शताब्दी में लगभग 1817 के आसपास अंग्रेजो ने पुणे शहर पर अपना पूरा धिक्कार जमा लिया और यहां कैंटोनमेंट की स्थापना कर दी। इसके बाद ब्रिटिश अधिकारी, सैनिक और उनके परिवार यहां रहने लगे। इसके साथ ही कई भारतीय उच्च वर्ग के लोग भी यहां रहने आए। ऐसे में इन लोगों को शुद्ध पानी की काफी जरूरत होती थी। ये लोग भी बाकी गरीब परिवारो की तरह कुओं और झीलों से ही पानी भरकर लाया करते थे और जब मानसून का समय आता, तो झीलों का पानी काफी दूषित हो जाया करता था। ये चीज अंग्रेजो के लिए काफी संकट बन गया क्योंकि गंदे पानी से कैंटोनमेंट में रहने वाले अंग्रेज अफसरों और उनके परिवारों में बीमारियां फैलने लगी।
पानी पहुंचाने के लिए बनाया गया बांध
इंग्लैंड में यह काम अंग्रेजों ने पहले ही कर रखा था। उन्होंने बांध बनाकर सभी के घरों में पाइप द्वारा पानी पहुंचाने में सफलता पहले पा ली थी और उन्होंने पुणे में भी इसी तकनीक का उपयोग करके घरो घर पानी पहुंचाने का सोचा। फिर इन्होंने 1873 में मुठा नदी पर बांध का निर्माण कार्य शुरू किया, जो 6 साल की मेहनत के बाद 1879 तक खड़कवासला डैम बनकर तैयार हो गया। यह ब्रिटिश इंजीनियरिंग का बहुत ही नायाब नमूना था, जो उस समय लगभग 50 लाख रुपये की लागत से बना था।
बांध बनाने के बाद की चुनौती
बांध बनने के बाद ब्रिटिश इंजीनियरो के सामने यह समस्या आ गई कि इस पानी को लोगों के घरों तक कैसे पहुंचाया जाए। इस जटिल काम की जिम्मेदारी इंजीनियर कर्नल आर.एस. कैपल और जे.एच.सी. फिंडक्ले को सौंपी गई। भारत में पहली बार 20 किमी तक गुरुत्वाकर्षण आधारित पाइपलाइन बिछाई गई अर्थात यह किसी मोटर द्वारा नहीं बल्कि ऊंचाई से नीचे दबाव के कारण बहकर लोगों के घरों तक पहुंचती थी।
अंततः पुणे के सभी घर में आया पानी
इस योजना को पूरा करने में मजदूरों ने अपना दिन–रात लगा दिया था। उस समय ज्यादा गाड़िया और मशीनें नहीं हुआ करती थी तो समझ सकते है कि लोगों ने कितना मेहनत किया होगा। लगभग 1886 तक पुणे के घर-घर में पाइपलाइन से पानी पहुंचा ली गई। यह दृश्य किसी त्योहार से कम नहीं था। कुछ ब्राह्मण परिवारो द्वारा इसका विरोध भी गया, वे मानते थे कि नल का पानी दूषित है और कुएं का पानी ही पीना चाहिए।
फिर इन लोगों ने देखा कि इससे बीमारियां कम हो रही है और महिलाओं को ज्यादा मेहनत भी नहीं करना पड़ रहा है तो उन्होंने भी इसे स्वीकार कर लिया।