क्यों अमर हैं हनुमान जी? जानिए भगवान राम के आदेश, माता सीता के वरदान और 8 सिद्धियों का रहस्य!

Hanuman ji ke Amar hone ka Rahasya: भगवान श्री राम के साथ तो उनके सभी प्रिय शिष्य गए लेकिन राम के सबसे बड़े भक्त हनुमान को या सौभाग्य प्राप्त नहीं हो सका। कहते हैं हनुमान जी आज भी इसी धरती पर निवास करते हैं। हनुमान जी के स्वर्ग न जाने और धरती पर रुकने के कई रहस्यमई कारण है जिन्हें आज हम जानने वाले हैं।

Update: 2026-04-03 09:42 GMT

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Hanuman ji ke Amar hone ka Rahasya: भगवान श्री राम का जब इस मृत्यु लोक में आखिरी समय चल रहा था, तब उन्होंने अपने सभी मित्र, वानर और भक्तों के साथ इस धरती को छोड़कर स्वर्ग की यात्रा पर चल दिए। उन्होंने रावण का वध कर इस धरती को फिर से पाप मुक्त किया था इसके बाद उन्होंने इस संसार को छोड़ने का निर्णय लिया। भगवान श्री राम के साथ तो उनके सभी प्रिय शिष्य गए लेकिन राम के सबसे बड़े भक्त हनुमान को या सौभाग्य प्राप्त नहीं हो सका। कहते हैं हनुमान जी आज भी इसी धरती पर निवास करते हैं। हनुमान जी के स्वर्ग न जाने और धरती पर रुकने के कई रहस्यमई कारण है जिन्हें आज हम जानने वाले हैं।

हनुमान को मिले अनोखे वरदान

भगवान राम ने ही हनुमान को यह आदेश दिया था कि वे कलयुग के शुरुआत से लेकर अंत तक इस धरती पर रहे और भक्तों की सुरक्षा करें। हनुमान जी का धरती पर रुकने का कारण राम का आदेश तो है ही लेकिन इससे भी पहले उन्हें अमरता का वरदान दिया जा चुका है। यह वरदान स्वयं लक्ष्मी स्वरूपा माता सीता ने दिया था। रामचरितमानस के सुंदरकांड के अनुसार जब रावण द्वारा माता सीता को बंदी बना लिया गया था तब हनुमान जी ने भगवान राम का संदेश सीता माता तक पहुंचाया था इससे प्रसन्न होकर माता ने हनुमान जी को आठ सिद्धियां और अमरता का वरदान भी दिया।

तुलसीदास जी के अनुसार

’अष्ट सिद्धि नवनिधि के दाता, असवर दीन जानकी माता.' हनुमान चालीसा में लिखित तुलसीदास जी के इन पंक्तियों से यह पता चलता है कि हनुमान जी के पास आठ सिद्धि और नव निधि मौजूद हैं जिसे माता सीता ने हनुमान जी को दिया था। इसके साथ ही माता ने हनुमान जी को अजर, अमर और कई गुणों में पारंगत होने का वरदान भी दिया। मार्कंडेय पुराण के अनुसार हनुमान जी के पास आठ सिद्धियां बताई गई है। इन्हीं सीढ़ियां का इस्तेमाल करके कोई भी मनुष्य अपने शरीर को हल्का, बड़ा, छोटा या गायब भी कर सकता है। यह सिद्धियां कठोर तप और साधना से ही प्राप्त की जा सकती हैं।

ये है आठ सिद्धियां

1. अणिमा: इस सिद्धि से आप अपने शरीर को किसी अणु आकार के सूक्ष्म देह में परिवर्तित कर सकते हैं।

2. महिमा: इस सिद्धि से साधक अपने शरीर को जितना चाहे उतना विशाल बन सकता है।

3. गरिमा: ऐसे साधक जिन्होंने यह सिद्धि प्राप्त कर ली है वे बिना अपने शरीर का आकार बड़ा किया अपने वजन को असीमित मात्रा तक बढ़ा सकते हैं।

4. लघिमा: यह शरीर को हवा से भी अधिक हल्का करने की सिद्धि है।

5. प्राप्ति: इस सिद्धि की मदद से साधक बिना किसी के नजरों में आए जिस भी जगह पर जाना चाहता है वहां जा सकता है।

6. प्रकाम्य: सामने वाले व्यक्ति के मन को अच्छी तरह से पढ़ने में यह सिद्धि बहुत ही मददगार है।

7. ईशत्व: इस सिद्ध की प्राप्ति, समझ लीजिए कि आप भगवान बन चुके हैं। आप पूरी दुनिया में अपना आधिपत्य स्थापित कर सकते हैं।

8. वशित्व: यह सिद्धि प्राप्त होते ही आप किसी भी व्यक्ति को अपने वश में करके उसे सदा के लिए अपना दास बनाकर रख सकते हैं।

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