तेज-तर्रार आईपीएस उदय किरण इस तरह फंस गए छेड़छाड़ के मामले में, अब होगा उनके खिलाफ अपराध दर्ज, सीआईडी जांच भी

Update: 2021-10-01 11:25 GMT

NPG. NEWS
रायपुर, 1 अक्टूबर 2021। सवा तीन साल पहले बैडमिंटन ग्राउंड में हुई लड़ाई ने ऐसा रूप लिया कि मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचा और आईपीएस अफसर के खिलाफ एफआईआर के आदेश जारी हो गए। उदय किरण की गिनती छत्तीसगढ़ के तेज-तर्रार और दबंग आईपीएस में गिनती होती है।

19 जून 2018 को बैडमिंटन की महिला खिलाड़ियों ने महासमुंद के थाने में पहुँच कर बैडमिंटन कोर्ट में छेड़छाड़ व मारपीट की शिकायत की थी। प्रार्थिया के समर्थन में तत्कालीन विधायक विमल चोपड़ा भी थाने पहुँचे थे। पर वहां एफआईआर न होने और विवाद की स्थिति निर्मित होने पर पुलिस ने विधायक व उनके साथियों पर लाठीचार्ज कर दिया था। लाठीचार्ज के बाद एसआई की शिकायत पर पुलिस ने विधायक व उनके अन्य साथियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया।
प्रार्थिया ने पुलिस अधिकारियों से शिकायत की थी कि हम लोग 19 जून 2018 को बैडमिंटन ग्राउंड में की गई छेड़खानी एवम समीर डुंगडुंग द्वारा की गई मारपीट की रिपोर्ट लिखाने थाने गए थे, जिस पर वहां उपस्थित उदय किरण, छत्रपाल सिन्हा व अन्य ने हमे गन्दी गन्दी गालियां देते हुए भागने को कहा और रिपोर्ट की बात कहने पर गन्दी नीयत से हाथ पकड़ा तथा लाठियों से मारा। इससे मेरे हाथ मे फ्रेक्चर हो गया था। जिसके लिए सम्बंधितो पर एफआईआर दर्ज की जाए। पर कोई सुनवाई न होने पर प्रार्थिया ने हाइकोर्ट में याचिका लगा कर एफआईआर की मांग की थी। जिस पर सुनवाई करते हुए जस्टिस गौतम भादुड़ी ने आईपीएस व अन्य पुलिसकर्मियों पर एफआईआर के निर्देश दिए थे। हाइकोर्ट के आदेश के खिलाफ आईपीएस उदय व अन्य पुलिसकर्मियों ने सुप्रीम कोर्ट से स्टे ले लिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने स्टे हटाते हुए कहा कि प्रार्थिया ने जो भी शिकायत दी हैं उसमें लगाये गए आरोपों की प्रकृति काफी गम्भीर किस्म की है,इसलिए ही इसमे हाइकोर्ट ने एफआईआर का डायरेक्शन दिया था,हमे ऐसा कोई भी कारण नही दिखता जिसमे एफआईआर न करवाई जाए।इसलिए हमारे द्वारा इंटरफेयर न करते हुए एफआईआर करवा के इसमे स्टेट की सीआईडी से जांच करवाई जाए तथा जांच को सीआईडी के पुलिस अधीक्षक रैंक से ऊपर के अफसरों द्वारा मॉनिटर करवाया जाए।इस मामले में आईपीएस के अधिवक्ता ने उस वक्त आन ड्यूटी में होने के कारण 197 का प्रोटेक्शन मांगा पर सुप्रीम कोर्ट ने ललिता कुमारी मामले का हवाला देते हुए राहत देने से इनकार कर दिया,और लिव पिटीशन खारिज कर दी।

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