58 ट्रेने रद्द होने पर सांसद ने की रेलमंत्री से बात, रेलवे ने चालाकी दिखाते हुए पहले दो ट्रेने रद्द कर दो कर दी शुरू, 108 करोड़ रुपये के टिकट रिफंड के बाद भी फायदे में रेलवे

Update: 2022-08-31 11:38 GMT

बिलासपुर । लगातार चार माह से यात्री ट्रेनें निरस्त कर यात्रियों पर सितम ढ़ा रहे रेलवे ने बेशर्मी की हदें पार कर दी है। यात्री ट्रेनें निरस्त करने पर विरोध जता रहे जनप्रतिनिधियों की आंखों में भी अब रेलवे प्रशासन धूल झोंक कर उन्हें बेवकुफ बना रहा है। यात्री ट्रेनें निरस्त होने के बाद कोई वैकल्पिक व्यवस्था नही होने से यात्री परेशान हो रहे है। टिकट रिफंड के 107 करोड़ वापिस करने के बाद भी रेलवे प्रबंधन फायदे में है।

लगातार चार माह से चल रहे ट्रेनें निरस्त करने के रूटीन को आगे बढ़ाते हुए रेलवे ने 29 अगस्त को 58 ट्रेने निरस्त करने की घोषणा कर दी। इसके साथ ही 4 ट्रेने गंतव्य से पहले समाप्त कर दी गई। रेलवे ने यात्रियों के लिए कोई वैकल्पिक व्यस्था भी नही की। ट्रेने रद्द होने के चलते यात्रियों को हो रही परेशानी को देखते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष व बिलासपुर सांसद अरुण साव ने रेलमंत्री अश्वनी वैष्णव से दूरभाष पर चर्चा की। रेलवे ने 58 ट्रेने रद्द करने के बाद ऊंट के मुह में जीरा के समान राहत देते हुए दबाव में आकर 2 ट्रेने शुरू करने की घोषणा कर दी। जिनमे आजाद हिंद एक्सप्रेस व अहमदाबाद हावड़ा एक्सप्रेस शामिल हैं। इनका परिचालन निम्नानुसार होगा:-

31 अगस्त, 2022 से 04 सितम्बर, 2022 तक हावड़ा से छूटने वाली 12130 हावड़ा- पुणे आजाद हिन्द एक्सप्रेस का परिचालन नियमित रहेगा

दिनांक 31 अगस्त, 2022 से 04 सितम्बर, 2022 तक पुणे से छूटने वाली 12129 पुणे-हावड़ा आजाद हिन्द एक्सप्रेस का परिचालन नियमित रहेगा

दिनांक 04 सितम्बर, 2022 को हावड़ा एवं अहमदाबाद से छूटने वाली 12834/ 12833 हावड़ा- अहमदाबाद-हावड़ा एक्सप्रेस का परिचालन नियमित रहेगा ।

रेलवे ने अप एंड डाउन के लिए आजाद हिंद एक्सप्रेस व एक अन्य ट्रेन के परिचालन को दबाव में आकर शुरू करने का निर्णय तो लिया पर उससे एक दिन पहले ही कटनी रुट की दो ट्रेने निरस्त कर दी। मतलब दो ट्रेने चालू करने से पहले दो ट्रेने रद्द करने पर नतीजा वही ढांक के तीन पात ही निकला। और 58 ट्रेने निरस्त करने पर यात्रियों पर पड़ रही मार सो अलग.

4 लाख 23 हजार टिकटें कैंसिल कर रेलवे ने किया 107 करोड़ रिफंड:-

पिछले चार माह से रेलवे के द्वारा ट्रेनो के निरस्त करने का सिलसिला जारी है। इसके लिए रेलवे ने कभी नॉन इंटरलाकिंग तो कभी ऑटो सिग्नलिंग तो कभी कोयला सप्लाई को कारण बताया। ट्रेनें रद्द होने से करीबन 4 लाख 23 हजार यात्रियों ने अपनी टिकटें कैंसिल करवाई। जिसके रिफंड के रूप में रेलवे को करीबन 107 करोड़ रुपये रिफंड करने पड़ रहे हैं। हालांकि ऑनलाइन रिजर्वेशन के चलते कई दिनों बाद ऑनलाइन रिफंड यात्रियों को मिल पाता है। देर से ही सही टिकटों का रिफंड तो यात्रियों को मिल जाता है पर ट्रेने निरस्त होने पर उन्हें काफी तकलीफों का सामना करना पड़ता है और अन्य यात्रा के साधन व्यवस्था करने पर आर्थिक भार भी आता है।

बताया जाता है कि यात्री ट्रेनों के परिचालन में जितना खर्च आता है उसका सिर्फ 35 प्रतिशत ही रेलवे को टिकटों से मिल पाता है। बाकी का खर्च आवश्यक सुविधा होने के चलते रेलवे खुद ही वहन करती है। ट्रेने निरस्त होने से वो रकम तो रेलवे ने बचाई ही साथ ही यात्री ट्रेनों की जगह माल गाड़ी चला कर कोयला लदान से अरबो का मुनाफा भी रेलवे कमा रही है।

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