PUBG Case: मां ने गेम खेलते देखकर बाल पकड़कर पीटा था, इसलिए गुस्से में गोली मारी; दिमाग में ऐसे असर डाल रहे गेम्स...
साइकोलॉजी के प्रोफेसर डॉ. बंशगोपाल सिंह के मुताबिक ऑनलाइन गेम्स से टेस्टोस्टेरॉन तेजी से बढ़ता है। इसी से आक्रामकता आती है।
रायपुर, 09 जून 2022। पब्जी खेलने से मना करने पर मां की हत्या करने वाले 16 साल के किशोर ने पुलिस को जो कहानी बताई है, वह चौंकाने वाली और पैरेंट्स के लिए अलार्मिंग है। 16 साल के बेटे पर मां लगातार हाथ उठाती थी। जिस रात हत्या हुई थी, उससे पहले भी साधना ने पब्जी खेलते देखकर बाल पकड़कर पिटाई कर दी थी। यह घटना दोपहर की थी। शाम को दस हजार रुपए गायब हुए, तब भी साधना ने बेटे पर शक कर पिटाई की थी। इसके बाद देर रात जब मां और बेटे-बेटी एक बेड पर सोए हुए थे, तब बेटे ने पिता की लाइसेंसी पिस्टल आलमारी से निकाली और कनपटी में सटाकर मां पर फायर कर दिया था।
NPG.News ने इस मसले पर साइकोलॉजी के प्रोफेसर व पं. सुंदरलाल शर्मा यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. बंशगोपाल सिंह से बात की। इस पर उन्होंने चौंकाने वाली जानकारी दी कि ऐसे गेम्स की लत से टेस्टोस्टेरॉन तेजी से बढ़ता है। इसी से ही आक्रामकता आती है। डॉ. सिंह के मुताबिक मां लगातार बेटे को टोकती थी और हाथ उठाती थी। इसमें एक मेजर रोल घर पर उपलब्ध हथियार का भी था। बेटे के दिमाग में पहले ही आक्रामकता थी, उस पर फौजी पिता का लाइसेंसी पिस्टल घर पर उसकी पहुंच में था, इसलिए उसने हत्या कर दी।
डॉ. सिंह के मुताबिक यह सामान्य धारणा है कि जब साधन या हथियार उपलब्ध है तो उसके उपयोग की टेंडेंसी बढ़ जाती है। हाथ में डंडा लेकर चलने वाले लोग बेवजह पेड़-पौधों पर डंडा चलाते रहते हैं। यही मानवीय स्वभाव है। ऐसे में माता-पिता के लिए यह बेहद जरूरी है कि वे ऐसे खतरनाक हथियार बच्चों की पहुंच से दूर रखें।
इसका हल क्या है?
इस सवाल के जवाब में डॉ. सिंह का कहना है कि फिलहाल इसका कोई आसान हल उपलब्ध नहीं है, क्योंकि रोकने-टोकने पर इस तरह की स्थिति बनेगी। अचानक परिवर्तन नहीं किया जा सकता। इसमें सरकार की भूमिका अहम है। इसे पर पूरी तरह रोक लगाएं या चाइना में जिस तरह कुछ घंटे की अनुमति है, वैसी व्यवस्था करें।
धार्मिक माहौल जरूरी
डॉ. सिंह के मुताबिक घरों में धार्मिक माहौल जरूरी है। वैज्ञानिकता के नाम पर बड़ी संख्या में घरों में धार्मिक माहौल अब नहीं रहा। धर्म-आध्यात्म से बच्चे विनम्रता सीखते हैं। अपने माता-पिता, बड़ों का पैर छूते हैं।
पोर्न साइट्स भी जिम्मेदार
पोर्न साइट्स से भी एग्रेसन बढ़ता है। ऑनलाइन गेम्स और सेक्सुअल एग्रेशन दिमाग पर गहरा असर डालते हैं। इससे नैतिकता का बंधन खत्म होता है। मां की हत्या करने वाला किशोर संभव है कि पोर्न साइट्स भी देखता रहा होगा। यह भी एक बड़ी वजह है कि जिससे बच्चे आक्रामक हो रहे हैं।