CG मॉडल की तारीफ: PM मोदी ने UP में छुट्टा पशुओं और गोबर पर कही ये बात, तो CM भूपेश ने किया ट्वीट... हमने पहले कर दिखाया

Update: 2022-02-20 17:29 GMT

रायपुर, 20 फरवरी 2022. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में किसानों की फसलों की सुरक्षा तथा पशुधन के प्रबंधन के लिए तीन साल पूर्व शुरू की गई सुराजी गांव योजना के तहत गांवों में गौठानों का निर्माण तथा गोधन न्याय योजना की सार्थकता को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भी अब स्वीकार कर लिया है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के उन्नाव में आज चुनावी सभा को सम्बोधित करते हुए छुट्टा पशुओं के प्रबंधन की व्यवस्था बनाने की बात कही है। छत्तीसगढ़ में यह व्यवस्था पहले से ही सफलतापूर्वक लागू है ।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में छुट्टा पुशओं से फसलों को हो रहे नुकसान को लेकर प्रधानमंत्री श्री मोदी आने वाले दिनों में जिस नई व्यवस्था को लागू करने की बात कह रहे हैं, वह छत्तीसगढ़ राज्य में तीन साल पहले मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने सत्ता की बागडोर संभालते ही शुरू कर दी थी, जिसके चलते पशु पालकों के लिए पशु अब बोझ नहीं बल्कि लाभकारी हो गये हैं। छत्तीसगढ़ सरकार की गौठान और गोधन न्याय योजना का अनुसरण अन्य राज्य भी करने लगे हैं। मध्यप्रदेश राज्य ने इसका अनुसरण करते हुए गोबर धन प्लांट शुरू किया है। 

<blockquote class="twitter-tweetang="hi" dir="ltr">हमने छत्तीसगढ़ में कर दिखाया<br><br>हमारी नेता ने उत्तर प्रदेश में अपनाया<br><br>कथित "गुजरात मॉडल" वालों ने आज मंच से "छत्तीसगढ़ मॉडल" गुनगुनाया<a href="https://twitter.com/hashtag/गोधन_न्याय_योजना?src=hash&amp;ref_src=twsrc^tfw">#गोधन_न्याय_योजना</a> <a href="https://t.co/46ESNlvo13">pic.twitter.com/46ESNlvo13</a></p>&mdash; Bhupesh Baghel (@bhupeshbaghel) <a href="https://twitter.com/bhupeshbaghel/status/1495439434229043203?ref_src=twsrc^tfw">February 20, 2022</a></blockquote> <script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" data-charset="utf-8"></script>

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ में ग्रामीण संसाधनों के संरक्षण एवं संवर्धन को ध्यान में रखते हुए सुराजी गांव योजना जनवरी 2019 में लागू की, जिसके तहत नरवा,गरुवा, घुरुवा और बाड़ी के संरक्षण और संवर्धन का काम शुरू किया गया। गरुवा कार्यक्रम के तहत गांवों में पशुओं की खुली चराई पर रोक लगाने के लिए गांवों में गौठानों का निर्माण शुरू किया गया। आज की स्थिति में राज्य के 10591 गांवों में गौठानों की निर्माण की मंजूरी दी जा चुकी है जिसमें से 8119 गौठान निर्मित एवं संचालित हैं, जहां पशुओं के रख-रखाव एवं चारे पानी का निःशुल्क प्रबंध किया गया है। गौठानों में चारागाह विकसित किए गए हैं, जहां पशुओं के लिए हरा चारा उपजाया जा रहा है। इसके अलावा किसानों से पैरादान में प्राप्त पैरा चारा की भी व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। राज्य में पशुओं के लिए पैरादान की शुरूआत होने से खेतों में पराली जलाने और इससे होने वाले प्रदूषण पर रोक लग गई है। राज्य में फसलों की सुरक्षा के साथ-साथ दोहरी फसलों का रकबा बढ़ा है। गोबर से बड़े पैमाने पर वर्मी कम्पोस्ट और सुपर कम्पोस्ट का उत्पादन होने से राज्य में जैविक खेती को बढ़ावा मिला है। रासायनिक उर्वरकों पर किसानों के निर्भरता एवं खेती की लागत में कमी आई है।

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