पेट्रोल-डीजल फिर होंगे सस्ते: भारत-अमेरिका समेत इन देशों ने लिया बड़ा फैसला, सरकार के इस फैसले से हो सकती है भारी कटौती!... जानें
नईदिल्ली 23 नवम्बर 2021। पेट्रोल और डीजल की आसमान छूती कीमतों से देश की बड़ी आबादी में व्याप्त असंतोष को देखते हुए केंद्र सरकार ने पिछले दिनों इन पर लागू एक्साइज ड्यूटी में कटौती की घोषणा की थी. पेट्रोल पर लागू एक्साइज ड्यूटी में पांच रुपये प्रति लीटर और डीजल पर लागू शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई है. पेट्रोल और डीजल के दामों में उत्पाद शुल्क में कमी के बाद तो थोड़ी राहत मिली है, लेकिन कच्चे तेल (crude oil) के दाम ऊंचे स्तर पर बने होने के कारण कीमत अभी भी 95 से 100 रुपये प्रति लीटर के बीच बनी हुई है. इस बीच तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक ने कीमतों में नरमी के लिए कच्चे तेल के उत्पादन में बढ़ोतरी से इनकार कर दिया है. ऐसे में भारत, अमेरिका समेत कच्चे तेल के बड़े उपभोक्ता देशों ने जवाबी रणनीति तैयार की है, ताकि ज्यादा आपूर्ति से दाम खुदबखुद नीचे आ जाएं.
जानकारी के मुताबिक, पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए भारत अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व) से 50 लाख बैरल कच्चा तेल रिलीज करने के लिए तैयार हो गया है. रणनीतिक भंडार से कच्चे तेल की ये निकासी अमेरिका, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे कच्चे तेल के बड़े उपभोक्ता देशों के साथ विचार-विमर्श के बाद होगी. ये सभी देश लगभग एक ही समय पर अपने भंडारों से कच्चे तेल की निकासी कर सकते हैं. इससे बाजार में कच्चे तेल की उपलब्धता बढ़ने के साथ ही इसकी कीमतें नीचे आने की उम्मीद है.अमेरिका और चीन के बाद भारत अभी दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल उपभोक्ता देश है. वहीं इस श्रेणी में जापान, रूस और दक्षिण कोरिया जैसे देश भी आते हैं.
खाड़ी देशों के साथ-साथ कच्चा तेल उत्पादक देशों ने इसके उत्पादन को सीमित रखा हुआ है. इस वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमतें लगातार चढ़ी हुई हैं. भारत जैसे कच्चे तेल के बड़े उपभोक्ता देशों के बार-बार कहने पर भी हालात में कोई खास सुधार देखने को नहीं मिला है. ऐसे में अमेरिका के कहने के बाद भारत ने भी अपने रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल रिलीज करने पर सहमति जता दी है.बार-बार टोका पेट्रोलियम मंत्रालय नेअंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की ऊंची कीमतों को लेकर पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से बार-बार चिंता जताई गई है. भारत ने हमेशा कच्चे तेल की कीमतों को तर्कसंगत, जिम्मेदार और बाजार के अनुरूप रखने की मजबूत वकालत की है. देश में पेट्रोल-डीजल की ऊंची कीमतों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार नियमित तौर पर समीक्षा कर रहे हैं.
भारत दुनिया का तीसरा बड़ा तेल उपभोक्ता देश है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पिछले हफ्ते दुबई में कहा था कि तेल की कीमतें बढ़ने का असर वैश्विक आर्थिक पुनरुद्धार पर पड़ेगा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम फिलहाल 78 डॉलर प्रति बैरल पर हैं। पिछले महीने यह 86 डॉलर प्रति बैरल से भी ज्यादा हो गया था लेकिन यूरोप के कुछ देशों में फिर से लॉकडाउन लगने और प्रमुख उपभोक्ता देशों के मिलकर सुरक्षित तेल जारी करने की धमकियों से इसमें गिरावट आई है।