नौकरियों का संकट: अमेरिका में मंदी के कारण नौकरियों से निकालने का सिलसिला शुरू, भारत सहित अन्य देशों पर भी असर

वैश्विक मंदी के दौर में अमेरिका में हर महीने पौने दो लाख लोग बेरोजगार हो सकते हैं।

Update: 2022-10-18 07:06 GMT

NPG डेस्क। फेस्टिव सीजन में यह खबर डराने और चौंकाने वाली है, लेकिन यह सच है। ब्लूमबर्ग ने यह आशंका जाहिर की है कि आने वाले समय में अमेरिका गंभीर आर्थिक मंदी से जूझने वाला है। इसकी शुरुआत 2023 के पहले महीने से हो जाएगी। अमेरिकी आर्थिक संस्थाओं की रिपोर्ट के मुताबिक मंदी के कारण हर महीने पौने दो लाख लोगों की नौकरियां जा सकती हैं। इसका आंशिक असर दिखने लगा है। फाइनेंस और टेक से जुड़ी कंपनियों ने छंटनी शुरू कर दी है। अमेरिका में मंदी का असर भारत सहित अन्य देशों पर भी देखने को मिलेगा।

इन कंपनियों में हुई छंटनी

माइक्रोसॉफ्ट ने जुलाई 2022 में 1800 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है। अभी और भी कर्मचारियों को निकाला जा सकता है।

फेसबुक, वाट्सएप और इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी मेटा ने इसी महीने यह ऐलान किया है कि वह अपने यहां 12 हजार उन कर्मचारियों को हटाने जा रही है, जिनका परफॉर्मेंस अच्छा नहीं है। ये 12 हजार कर्मचारी फेसबुक के हैं।

गूगल ने सीईओ सुंदर पिचाई ने भी आने वाले समय में छंटनी की ओर इशारा किया है।

स्नैपचैट डेवलपर कंपनी स्नैप इंक ने 20 प्रतिशत कर्मचारियों को निकालने की बात कही है।

अमेरिकी ऑटोमोबाइल कंपनी फोर्ड में छंटनी का असर अमेरिका के साथ-साथ कनाडा और भारत में भी देखने को मिला। फोर्ड तीन हजार कर्मचारियों को नौकरी से निकाल रही है।

भारत के लिए थोड़ी राहत

वैश्विक मंदी का असर निश्चित रूप से भारत पर भी पड़ेगा, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की रिपोर्ट के मुताबिक दूसरे देशों की तुलना में भारत बेहतर स्थिति में है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में जब गिरावट आएगी, तब भारत मजबूत स्थिति में नजर आएगा। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को घटाकर 6.8 फीसदी कर दिया है, लेकिन चीन अमेरिका और ब्रिटेन की तुलना में भारत की स्थिति मजबूत है। 2023 में जहां चीन की जीडीपी ग्रोथ 4.4 फीसदी हो सकती है, वहीं भारत की अनुमानित वृद्धि 6.1 फीसदी रहेगी।

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