ससुर सरकारी सेवा में तो बहू को अनुकंपा नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता, हाईकोर्ट ने खारिज किया सरकार का फैसला

Update: 2022-04-19 13:48 GMT

बिलासपुर, 19 अप्रैल 2022। बिलासपुर हाईकोर्ट ने आज एक अहम फैसले में कहा है कि ससुर अगर सरकारी सेवक है तो उसके बहू को अनुकंपा नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने सरकार के उस आदेश को भी निरस्त कर दिया है, जिसमें ससुर के सरकारी सेवा में होने का हवाला देकर बहू को अनुकंपा नियुक्ति के अपात्र घोषित कर दिया गया था। न्यायमूर्ति पी0सेम कोशी ने इस महत्वपूर्ण आदेश में कहा है कि ससुर को परिवार का सदस्य नहीं माना जाना चाहिए।

याचिकाकर्ता राजकुमारी सिवारे के पति स्व0 डोमेंद्र कुमार सिवारे सहायक शिक्षक (एल0बी0) के पद पर प्राथमिक शाला कोदवा ब्लाक बेरला जिला बेमेतरा में कार्यरत थे। सेवा में रहते हुए पिछले साल उनकी मौत हो गई। याचिकाकर्ता ने अनुकम्पा नियुक्ति हेतु इस साल मार्च में आवेदन पत्र प्रस्तुत किया जिसे यह कहते हुए निरस्त कर दिया कि दिवंगत शासकीय सेवक के पिता एवं याचिकाकर्ता के ससुर शासकीय सेवा में है। इस कारण याचिकाकर्ता को अनुकम्पा नियुक्ति की पात्रता नहीं है एवं उनका आवेदन निरस्त किया जाता है। इस आदेश को याचिकाकर्ता ने अधिवक्ता अजय श्रीवास्तव के माध्यम से उच्च न्यायालय में चुनौती दी एवं बताया कि अनुकम्पा नियुक्ति निर्देश के तहत्अविवाहित दिवंगत शासकीय सेवक के मामले में माता पिता को आश्रित माना गया है किंतु दिवंगत विवाहित शासकीय सेवक के मामले में पिता को आश्रित नहीं माना गया है। इस कारण अनुकम्पा नियुक्ति हेतु वह परिवारिक सदस्य नहीं माना जा सकता एवं परिवार के रूप में दिवंगत सेवक के पत्नी, बच्चे, दत्तक पुत्र, पुत्री शामिल है। इस कारण ससुर के शासकीय सेवा में होने से अनुकम्पा नियुक्ति हेतु याचिकाकर्ता को

वंचित नहीं किया जा सकता है। प्रकरण की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति पी0सेम कोशी ने निर्णित किया कि किसी भी स्थिति में अनुकम्पा नियुक्ति हेतु याचिकाकर्ता के ससुर को परिवार का सदस्य नहीं माना जा सकता और न ही उसे अनुकम्पा नियुक्ति निर्देश में आश्रित की श्रेणी में रखा गया है। इस कारण याचिकाकर्ता को अनुकम्पा नियुक्ति से अपात्र मानने का आदेश निरस्त किया जाता है एवं अन्य अर्हता पूरी करने पर याचिकाकर्ता को अनुकम्पा नियुक्ति देने का निर्देश दिया जाता है।

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