शिक्षक से 1 करोड़ का ईनामी नक्सली कमांडर कैसे बना अक्किराजु, मौत के बाद नक्सलियों ने किया छतीसगढ़ तेलंगाना बार्डर पर अंतिम संस्कार, जानिए शिक्षक से एक करोड़ का ईनामी नक्सली

Update: 2021-10-16 13:55 GMT

रायपुर, 16 अक्टूबर 2021। माओवादियों के सेंट्रल कमेटी के सदस्य अक्की राजू हरगोपाल उर्फ रामकृष्ण उर्फ आरके की 14 अक्टूबर सुबह 6 बजे किडनी फेल से हुई मौत के बाद शुक्रवार दोपहर 2 बजे छतीसगढ़ तेलंगाना बार्डर पर पालमेण्डु कोंडापल्ली में नक्सलियों द्वारा अंतिम संस्कार कर दिया गया।नक्सलियों के सेंट्रल कमेटी के सदस्य अक्की राजू पर सरकार ने एक करोड़ रुपये का इनाम रखा था। उसकी मौत के बाद सेंट्रल कमेटी के प्रवक्ता अभय के द्वारा तेलगु भाषा में कल एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर 14 अक्टूबर सुबह 6 बजे किडनी फेल होने से रामकृष्ण उर्फ आरके की मौत होने की जानकारी दी थी।अंतिम संस्कार कहा किया जाएगा इसकी जानकारी प्रेस विज्ञप्ति में नही दी गई थी, पर अंतिम संस्कार के बाद आज नक्सलियों ने अंतिम संस्कार की फ़ोटो जारी की हैं।

जारी फ़ोटो से स्प्ष्ट हैं कि अपने शीर्ष कमांडर की विदाई में बड़ी संख्या में वर्दीधारी नक्सली पहुँचे थे। नक्सलियों ने लाल कपड़े का कफ़न ओढ़ा कर अपने कमांडर को श्रद्धांजलि दी। जानकरी के मुताबिक 63 वर्षीय नक्सली कमांडर की मौत किडनी फेल से दक्षिण बस्तर के जंगलों में हुई हैं जिसका अंतिम संस्कार छतीसगढ़ तेलंगाना बार्डर पर पालमेण्डु कोंडापल्ली में किया गया।

शिक्षक से कैसे बना नक्सली:-

गौरतलब है कि आरके उर्फ रामकृष्ण का जन्म साल 1958 में आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले के पलनाड क्षेत्र में हुआ था. इसके पिता स्कूल टीचर थे. पढ़ाई में रुचि रखने वाले रामकृष्ण ने वारंगल से 1978 में पोस्ट ग्रेजुएशन किया. इसके बाद कुछ समय तक अपने पिता के साथ एक शिक्षक के रूप में गुंटूर में ही सेवा दी. इसी दौरान नक्सल आंदोलन से आरके आकर्षित हो गया. साल 1980 में माओवादियों के गुंटूर जिला पार्टी सम्मेलन में भाग लिया. 1982 एक पूर्णकालिक कार्यकर्ता के रूप में नक्सलियों की पार्टी में शामिल हुआ. पार्टी ने रामकृष्ण को 1986 में गुंटूर के जिला सचिव बनाया. इसके बाद 1992 में वे राज्य समिति के सदस्य उसे चुना गया.

संगठन में रहते की शादी,बेटा मारा गया था पुलिस एनकाउंटर में:-

माओवादियों की ओर जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक संगठन में रहते हुए ही आरके का विवाह नक्सली सिरीशा से हुआ था. इन दोनों से एक बेटा मुन्ना (पृथ्वी) हुआ. मुन्ना भी माओवादी बना, जो साल 2018 में उड़ीसा के मलकानगिरी जिले के रामगुड़ा में सुरक्षा बलों के साथ हुई एक एनकाउंटर में मारा गया था. प्रेस नोट में बताया गया है कि किडनी की बीमारी के इलाज के लिए आरके का डायलिसिस शुरू किया गया था. इसी प्रक्रिया के बीच उसकी किडनी फेल हो गई, जिससे मौत हुई. रामकृष्ण को स्वास्थ्य से जुड़ी दूसरी समस्याएं भी थीं.आरके उड़ीसा के मलकानगिरी में 2016 में हुई पुलिस और नक्सलियों की मुतभेड़ में गोली लगने से घायल हो गया था।इस मुतभेड में 30 नक्सली मारे गए थे।

सरकार से चर्चा के बाद सुर्खियों में आया:-

बता दें कि साल 2004 में आंध्र प्रदेश की तत्कालीन वाएस राजशेखर रेड्डी के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार के साथ माओवादियों की एक शांति वार्ता हुई थी, जिसका माओवादियों की ओर से सेंट्रेल कमेटी मेंबर रामकृष्ण ने ही नेतृत्व किया था. इस वार्ता के बाद रामकृष्ण को एक अलग पहचान मिली थी. राष्ट्रीय स्तर पर रामकृष्ण सुर्खियों में आया. हालांकि सरकार के साथ की गई ये शांतिवार्ता असफल हो गई थी. इसका कोई परिणाम नहीं निकला.

रामकृष्ण सेंट्रल कमेटी मेंबर के साथ ही AOBSZC का सेक्रेटरी रहते हुए सुरक्षा बलों और सरकार के लिए चुनौती बन गया था. बताया जाता है कि माओवादियों की ओर से किए जाने वाले लगभग हर बड़ी वारदातों में इसकी भूमिका रही है. बताया जाता है कि सुरक्षा एजेंसियों की सूची में रामकृष्ण एक बड़ा दहशतगर्त था. साल 2018 में उसे सेंट्रल कमेटी पोलित ब्यूरो का मेंबर बनाया गया था.


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