छत्तीसगढ़ में सड़क हादसों में सबसे अधिक दो पहिया सवार युवाओं की मौत, रायपुर सड़क हादसों की भी राजधानी...कोरोना के चलते पिछले साल मौतों में कमी जरूर मगर 2014 से मौतों का ट्रेंड यथावत
रायपुर, 21 अक्टूबर 2021। पुलिस मुख्यालय ने सड़क हादसों में होने वाले नुकसानों को लेकर एक तुलनात्मक आंकड़ा जारी किया है। इसके अनुसार छत्तीसगढ में 2014 से सड़क दुर्घटनाओं में मौतों का ट्रेंड एक समान बना हुआ है। पिछले साल याने 2020 में कोरोना के कारण मौतों की संख्या कम रही। मगर पिछले सात साल से हर साल चार हजार से अधिक मौतें हो रही हैं। 2014 में 3985 मौतें हुई थी। वहीं 2018 में यह 4593 पहुंच गया।
पुलिस विभाग के आँकड़ों से यह तथ्य सामने आया है कि बीते नौ महीनों में हर रोज़ 34 सड़क हादसे हुए हैं, जिनमें रोज़ाना चौदह लोगों की मौत हुई है जबकि 28 लोग जख्मी हुए हैं। सड़क हादसों की राजधानी के रुप में भी रायपुर सामने आया है। सड़क हादसे के मामलों में सर्वाधिक संख्या राजधानी की है।
पुलिस की लगातार क़वायद और यातायात के प्रति सजगता की हर कोशिश के बावजूद मौतों का ट्रेंड बना हुआ है। राजधानी में बीते नौ महीनों में 1269 सड़क हादसे के मामले दर्ज हुए हैं, जिनमें 350 लोगों की मौत हुई है। राज्य में सड़क हादसों में दूसरे नंबर पर बिलासपुर तीसरे पर दुर्ग चौथे पर राजनांदगाँव और पांचवे पर रायगढ़ है।
एकीकृत सड़क दुर्घटना का डाटा बेस बताता है कि सबसे ज़्यादा सड़क हादसे खुले मौसम और खुले इलाक़े में हुए हैं, और मरने वालों में 20 से 25 वर्ष आयु के लोग सबसे ज़्यादा हैं।
सबसे ज़्यादा सड़क दुर्घटनाएँ ज़िला मुख्य सड़क पर हुई हैं, जिनका आँकड़ा 51.83 फ़ीसदी है, जबकि एनएच पर यह आँकड़ा 28.57 फ़ीसदी है। सबसे ज़्यादा मौतें दोपहिया सवारों की हुई हैं। जबकि क़रीब तीन फ़ीसदी सायकल सवारों की भी मौतें हुई हैं।
आंकड़े साल के पहले नौ महीने के हैं, लेकिन इस का आख़री महीना याने नवमा महीना सितंबर में हुए सड़क हादसों ने बीते आठ महीने के रिकॉर्ड की क़रीब क़रीब बराबरी कर ली है। सितंबर में हर रोज़ क़रीब तैंतीस हादसे हुए, हर रोज़ इन सड़क हादसों में बारह लोग की मौत हुई जबकि 28 लोग घायल हुए हैं।
स्पेशल डीजी आर के विज ने राज्य के सभी कप्तानों को निर्देश जारी कर सड़क हादसों के प्रति सावधानी जागरुकता के साथ साथ विशेष अभियान चलाकर कार्यवाही करने के स्पष्ट निर्देश दिए है।