डॉक्टर ने पत्नी के साथ बेटा और बेटी की कर दी हत्या: डायरी में लिखा- यह ओमिक्रॉन हम सबको मार देगा...अब और लाशें नहीं गिननी हैं

Update: 2021-12-04 08:00 GMT

कानपुर 4 दिसम्बर 2021. शहर के इंद्रानगर इलाके में उस समय हड़कंप मच गया जब एक अपार्टमेंट में महिला समेत तीन बच्चों का शव मिला. तीहरे हत्याकांड को अंजाम देने वाला और कोई नहीं महिला का डॉक्टर पति और बच्चों का पिता ही निकला जो वारदात के बाद फरार हो गया. पुलिस को मौके से एक नोट मिला जिसमें डॉक्टर ने हत्या की वजह कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रोम को बताया है. इसमें लिखा है- 'अब लाशें नहीं गिननी है.' मौके पर पहुंचकर पुलिस ने तीनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. बताया जा रहा है कि डॉक्टर पिछले काफी समय से डिप्रेशन में था.

कल्यानपुर थाना क्षेत्र स्थित डिविनिटी आर्पाटमेंट में रहने वाले डॉक्टर सुशील एक प्राइवेट हॉस्पिटल में जॉब करते हैं। परिवार में पत्नी चंद्रप्रभा (48), बेटा शिखर (18) और बेटी खुशी के साथ रहते थे। शुक्रवार शाम डॉक्टर सुशील कुमार ने पत्नी समेत बेटे-बेटी की हत्या कर दी। डॉक्टर सुशील कुमार ने भाई सुनील को मैसेज किया था कि पुलिस को इनफॉर्म करो डिप्रेशन में हूं। इस मैसेज के बाद जब सुनील फ्लैट का दरवाजा तोड़कर अंदर पहुंचे तो वहां का नजारा देखकर हैरान रह गए।

सुशील कुमार ने हथौड़े से चंद्रप्रभा का सिर कूंचा। जिस तरह से सिर क्षत विक्षत था उससे स्पष्ट है कि जब तक चंद्रप्रभा की सांसें थम नहीं गईं तब तक उन पर वार करता रहा। वहीं शिखर और खुशी का गला घोंटा गया था। चंद्रप्रभा शिवराजपुर स्थित एक प्राइमरी स्कूल में शिक्षिका थीं। शिखर दिल्ली के कैड इंस्टीट्यूट से इंजीनियरिंग की तैयारी कर रहा था। बेटी वुडबाइन स्कूल से हाईस्कूल की पढ़ाई कर रही थी। 

कमरे से मिली डायरी में लिखा है, "अब और कोविड नहीं. यह ओमिक्रॉन अब सभी को मार डालेगा. अब और लाशें नहीं गिननी हैं. अपनी लापरवाही के चलते करियर के उस मुकाम पर फंस गया हूं, जहां से निकलना असंभव है. मेरा कोई भविष्य नहीं है. अत: में अपने होश-ओ-हवास में अपने परिवार को खत्म करके खुद को खत्म कर रहा हूं. इसका जिम्मेदार और कोई नहीं है."

डायरी में आगे लिखा है, "मैं लाइलाज बीमारी से ग्रस्त हो गया हूं. आगे का भविष्य कुछ भी नजर नहीं आ रहा है. इसके अलावा मेरे पास कोई और चारा नहीं है. मैं अपने परिवार को कष्ट में नहीं छोड़ सकता. सभी को मुक्त करके जा रहा हूं. सारे कष्टों को एक ही पल में दूर कर रहा हूं. अपने पीछे मैं किसी को कष्ट में नहीं देख सकता. मेरी आत्मा मुझे कभी माफ नहीं करेगी. आंखों की लाइलाज बीमारी की वजह से मुझे इस तरह का कदम उठाना पड़ रहा है. पढ़ाना मेरा पेशा है. जब मेरी आंख ही नहीं रहेगी तो मैं क्या करूंगा."

बरामद डायरी में डॉक्टर ने जो नोट लिखा है उससे पुलिस को आशंका है कि कहीं सुशील खुद को नुकसान न पहुंचा ले। क्राइम ब्रांच समेत कई अलग-अलग टीमें उसकी तलाश में जुटी हैं। उसकी दोनों कारें अपार्टमेंट में खड़ी हैं। संभावना है कि वह वहां से पैदल निकला है। उसका मोबाइल भी बंद है। इसलिए पुलिस उसको ट्रेस नहीं कर पा रही है। हर एक थाने की पुलिस को सुशील की फोटो भेजकर तत्काल तलाश करने के निर्देश पुलिस कमिश्नर ने दिए हैं। 


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