CJI जस्टिस चंद्रचूड़: देश के सबसे ताकतवर पद पर पहली बार पिता के बाद बेटे को जिम्मेदारी, आज शपथ लेंगे जस्टिस चंद्रचूड़

चीफ जस्टिस यूयू ललित ने जस्टिस डीवाई (धनंजय यशवंत) चंद्रचूड़ को अपना उत्तराधिकारी चुना है। 50वें चीफ जस्टिस के रूप में शपथ लेंगे।

Update: 2022-11-09 04:03 GMT

DY Chandrachud, YV Chandrachud

NPG ब्यूरो। देश के सबसे ताकतवर पद पर पहली बार पिता के बाद बेटे को जिम्मेदारी मिलेगी। यह पद है सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस का। 37 साल पहले जस्टिस वाईवी चंद्रचूड़ सुप्रीम कोर्ट के 16वें चीफ जस्टिस रह चुके हैं। अब उनके बेटे जस्टिस डीवाई (धनंजय यशवंत) चंद्रचूड़ 9 नवंबर को चीफ जस्टिस के रूप में शपथ लेंगे। वे भारत के 50वें चीफ जस्टिस होंगे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उन्हें आज शपथ दिलाएंगी।

डीवाई चंद्रचूड़ देश के 50वें मुख्य न्यायाधीश होने जा रहे हैं। वे जस्टिस यूयू ललित का स्थान लेंगे। 11 नवंबर 1959 को जन्मे न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज हैं। इनके पिता वीवाई चंद्रचूड़ भारत के 16वें चीफ जस्टिस थे। उनका कार्यकाल 22 फरवरी, 1978 से 11 जुलाई, 1985 तक लगभग 7 साल तक रहा, जोकि अब तक का सबसे लंबा समय है। अब पिता के रिटायर होने के 37 साल बाद जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ को भी वही जिम्मेदारी मिलने जा रही है।

शिक्षा

डीवाई चंद्रचूड़ ने सेंट स्टीफंस कॉलेज, नई दिल्ली से अर्थशास्त्र में ऑनर्स के साथ बीए किया है। दिल्ली विश्वविद्यालय के कैंपस लॉ सेंटर से एलएलबी की है। इसके बाद उन्होंने प्रतिष्ठित हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की। हार्वर्ड में, उन्होंने लॉ में मास्ट र्स और न्यायिक विज्ञान में डॉक्टरेट पूरी की। उन्होंगने ऑस्ट्रे लियन नेशनल यूनिवर्सिटी, हार्वर्ड लॉ स्कूोल, येल लॉ स्कूाल और दक्षिण अफ्रीका में लेक्च र्स भी दिए हैं।

पूर्व में दी गई सेवाएं

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने पहले गुजरात, कलकत्ता, इलाहाबाद, मध्य प्रदेश और दिल्ली के उच्च न्यायालयों में एक वकील के तौर पर प्रैक्टिस की है। उन्हें 1998 में बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा सीनियर एडवोकेट के रूप में नामित किया गया था। वर्ष 1998 से 2000 तक उन्होंेने भारत के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल के रूप में भी कार्य किया है। 29 मार्च 2000 को वे बॉम्बे हाईकोर्ट के जज बनाए गए थे। वे 31 अक्टूबर 2013 से इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रहे। वे 13 मई 2016 को सुप्रीम कोर्ट के जज नियुक्त किए गए थे।

महत्वपूर्ण निर्णय

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कुछ बेहद महत्वपूर्ण फैसले दिए और कुछ महत्वपूर्ण मामलों पर दिए गए फैसलों में वे पीठ के सदस्य रहे। उनके प्रमुख निर्णय-

1. हाल ही में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग, सरकार राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली और अन्य के निर्णय में न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि सभी महिलाएं सुरक्षित और कानूनी गर्भपात की हकदार हैं। निर्णय में कहा गया कि मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट के तहत 22 से 24 हफ्ते तक गर्भपात का हक सभी महिलाओं को है। इस बेंच की अगुआई भी जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ कर रहे थे।

2. जस्टिस चंद्रचूड़ अयोध्या विवाद का फैसला करने वाली 5 जजों की बेंच का भी हिस्सा थे। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने एक अलग सहमति वाला निर्णय दिया। 

3. इन्होंने इंडियन यंग लॉयर्स एसोसिएशन बनाम केरल राज्य में फैसला सुनाया कि सबरीमाला मंदिर से 10 से 50 वर्ष की आयु की महिलाओं को बाहर करना संवैधानिक नैतिकता का उल्लंघन है।

4. नोएडा के ट्विन टॉवर को गिराने के लिए दिए गए फैसले में भी जस्टिस चंद्रचूड़ का हाथ था। इसके अलावा भीमा कोरेगांव, समलैंगिकता, आधार और केरल हाईकोर्ट द्वारा दिए गए अखिला अशोकन उर्फ हादिया और शफीन की शादी को रद्द करने के फैसले को भी उन्होंने खारिज कर दिया था।

जस्टिस पिता के दो आदेशों को पलटा भी था

जस्टिस चंद्रचूड़ ने 2017-18 में पिता के दिए गए दो फैसलों को ही पलट दिया था। इसमें एडल्टरी लॉ और शिवकांत शुक्ला वर्सेज एडीएम जबलपुर के फैसले को पलटा था। 2018 में इस फैसले को पलटते हुए जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने कहा- एडल्टरी लॉ पितृसत्ता का संहिताबद्ध नियम है। सेक्सुवल ऑटोनोमी को महत्व दिया जाना चाहिए।

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ का सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यकाल दो साल का होगा। चंद्रचूड़ के 10 नवंबर 2024 को सेवानिवृत्ति होने की संभावना है। क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के जज 65 वर्ष की आयु में और उच्च न्यायालय के न्यायाधीश 62 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होते हैं।

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