Chhattisgarh OPS News: छत्तीसगढ़ में मजाक बना ओपीएस: सरकार ने विकल्प भरवा लिया, डेढ़ साल में लाभ एक को भी नहीं मिला...

Chhattisgarh OPS News: OPS, NPG के नाम पर छत्तीसगढ़ के कर्मचारी छल और घोखा के शिकार हो गए...कर्मचारी और शिक्षक नेताओं का कहना है कि ओपीएस का कोई फायदा नहीं मिल रहा। जिनके परिजन खत्म हो चुके वह भी दर दर भटकने को मजबूर है। उल्टे उनके परिजनों से और अंशदान जमा करने की मांग की जा रही। देखिए नीचे ज्वाइंट डायरेक्टर कोष और लेखा का आदेश...

Update: 2024-01-16 07:18 GMT

Chhattisgarh OPS News: रायपुर। प्रदेश के शासकीय कर्मचारियों के साथ ओपीएस के नाम पर लाल सिस्टम ने ऐसा मजाक किया कि कर्मचारी और शिक्षक संगठन ठगा सा महसूस कर रहे हैं। कहने के लिए छत्तीसगढ़ में ओपीएस लागू है और इसके दायरे में उन शासकीय कर्मचारियों के परिजन भी हैं जिन शासकीय कर्मचारी का निधन हो चुका है। सरकार ने बकायदा पत्र जारी करके उन्हें भी विकल्प पत्र भरने का मौका दिया था लेकिन विकल्प पत्र के साथ-साथ राशि जमा करने के बावजूद एक भी कर्मचारी को अब तक ओपीएस का लाभ मिला हो...ऐसा सुनने में नही आया है।


सुकमा जिले के कोंटा ब्लॉक में पदस्थ कर्मचारी स्वर्गीय चम्पा नायक के पति ने शासकीय चालान के माध्यम से 1 जुलाई 2018 यानी सविलियन दिनांक से 2020 मृत्यु दिनांक तक की राशि विधिवत रूप से विभाग में जमा कर दी थी लेकिन अब विभाग उनसे पत्र जारी करके उनकी नियुक्ति तिथि से यानी पंचायत कल में जो एनपीएस की राशि जमा हुई थी की राशि की मांग कर रही है जबकि पंचायत काल की सेवा को शिक्षा विभाग ने माना ही नहीं है । कुल मिलाकर कोष लेखा एवं पेंशन कार्यालय न तो अपने निचले कार्यालय को सही तरीके से मार्गदर्शन दे रहा है और न ही कर्मचारियों की समस्या का निराकरण कर रहा है जिसे लेकर शिक्षकों में खास तौर पर गहरी नाराजगी है और इसे लेकर अब शिक्षकों ने मोर्चा खोल दिया है।


मृत कर्मियों के परिजनों से गंदा मजाक

सर्व शिक्षक संघ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और वर्तमान प्रदेश संयोजक विवेक दुबे का कहना है कि ऐसे शासकीय कर्मचारी जिनका निधन हो चुका है उनके परिजनों को लाभ दिलाने की पहल करते हुए मैंने खुद 100 से अधिक लोगो के प्रकरण में उनका आवेदन उनके आहरण संवितरण अधिकारी के पास जमा करवाया, उसमें से अधिकांश शासन के पास NPS से प्राप्त राशि जो नियमानुसार शासकीय खाते में जमा करनी थी जमा भी कर चुके हैं उसके बावजूद कोष लेखा एवं पेंशन कार्यालय से लगातार उन्हें घुमाया जा रहा है। एक प्रकरण का दस्तावेज सार्वजनिक करते हुए उन्होंने बताया कि विभाग में सिर्फ मार्गदर्शन मांगने का खेल चल रहा है। खास तौर पर शिक्षाकर्मियों के परिजन के साथ तो और गंदा मजाक किया जा रहा है। पेंशन के लिए शिक्षाकर्मियों के सेवा अवधि की गणना उनके संविलियन तिथि से की जा रही है लेकिन मृत कर्मचारियों के परिजनों से उनके पंचायत काल के एनपीएस की राशि भी मांगी जा रही है।

Full View

Tags:    

Similar News