सैकड़ों जवानों की शहादत का बदला: सर्चिंग पर निकले जवानों का पीछा कर रहा था DVCM मेंबर हड़मा, मुठभेड़ में ढेर
सुकमा और नारायणपुर जिले में ही हत्या और हत्या की कोशिश के दो दर्जन मामले दर्ज हैं। कोंडागांव और गढ़चिरौली से भी मंगाई जानकारी।
सुकमा। सैकड़ों जवानों की शहादत के लिए जिम्मेदार दुर्दांत नक्सली हड़मा उर्फ सनकु सुरक्षा बलों के एनकाउंटर में मारा गया। हड़मा उर्फ सनकु डिविजनल कमेटी मेंबर (DVCM) था। उसके खिलाफ सुकमा और नारायणपुर जिले में ही दो दर्जन से ज्यादा हत्या और हत्या की कोशिश की मामले दर्ज हैं। इसके अलावा उसने कोंडागांव और गढ़चिरौली इलाके में भी काम किया है। वहां से जानकारी मंगाई जा रही है। हड़मा पर सरकार ने 8 लाख का इनाम घोषित किया था। 2018 के बाद यह पहला मौका है, जब डिविजनल कमेटी मेंबर मुठभेड़ में मारा गया। राज्य में नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में यह बड़ी सफलता है।
नक्सलियों की मौजूदगी की सूचना पर 31 जुलाई की शाम को डीएसपी ऑपरेशन गिरिजाशंकर साव, डीआरजी कमांडर हेमंत पटेल, संदीप मांडले के नेतृत्व में सुरक्षा बलों की एक टीम सीआरपीएफ के कोत्ताचेरू कैम्प से सर्चिंग के लिए निकली थी। सुरक्षा बलों के सदस्य पूरी रात जंगल की खाक छानते रहे, लेकिन नक्सलियों से आमना-सामना नहीं हुआ। 01 जुलाई को सुबह सर्चिंग टीम भंडारपदर नाला जंगल के पास पहुंची। वहां टीम के सदस्यों ने थोड़ी देर सुस्ताने का फैसला लिया। इस बीच हड़मा के नेतृत्व में करीब 40-45 नक्सली भी सुरक्षा बलों पर नजर रख रहे थे। जैसे ही उन्होंने जवानों को सुस्ताने के मूड में देखा तो फायरिंग शुरू कर दी।
इस बार नक्सली धोखा खा गए, क्योंकि जवान ऐसे हमले के लिए तैयार थे। जवानों की ओर से जवाबी फायरिंग शुरू की गई। करीब एक-डेढ़ घंटे तक दोनों ओर से गोलियां चलती रहीं। इसके बाद नक्सलियों की ओर से फायरिंग बंद हो गई तो जवानों ने नाले के दूसरी ओर जाकर मुआयना किया। वहां एक पुरुष नक्सली का शव, हथियार और कुछ सामान मिले। इसके अलावा आसपास शरीर को घसीट कर ले जाने के भी निशान थे, जिससे यह अंदाजा लगाया जा रहा है। जवान शव को लेकर जब पहुंचे तो सरेंडर करने वाले नक्सलियों ने उसकी पहचान हड़मा के रूप में की। यह सुनकर जवानों के साथ-साथ अफसर भी चौंक गए क्योंकि 2018 के बाद यह पहला मौका था जब किसी डिविजनल कमेटी मेंबर को जवानों ने मार गिराया था।
हर बड़ी वारदात में शामिल था हड़मा
पुलिस के मुताबिक सुकमा और नारायणपुर में जितनी भी बड़ी वारदात हुई है, उसमें हड़मा शामिल था। उसकी वजह से सैकड़ों पुलिस जवानों की शहादत हुई थी। सब इंस्पेक्टर विनोद सिंह कौशिक, मूलचंद कंवर, कंपनी कमांडर शंकर राव आदि जिस मुठभेड़ में शहीद हुए थे, उसमें हड़मा शामिल था। नारायणपुर जिले में 14 और सुकमा में 11 वारदातों में उसके शामिल होने का पता चला है।
2003 में नक्सलियों में शामिल हुआ
हड़मा उर्फ सनकु 2003 में नक्सलियों में शामिल हुआ। इसके बाद बड़ी वारदातों में शामिल होता रहा। 2015 में उसे गोली लगी थी, जिसके बाद माड़ एरिया में भेज दिया गया था। वह नक्सलियों की कंपनी नंबर 6 का कमांडर रह चुका है। इसके अलावा 2019 से 2021 तक गढ़चिरौली में भी रहा है। पुलिस के पास जो इनपुट हैं, उसके मुताबिक कुछ महीने पहले उसे सुकमा भेजा गया था।
ये सामान बरामद हुए
1 नग 7.65 एमएम पिस्टल, दो नग भरमार बंदूक, 10 नग एसएलआर का जिंदा राउंड, 9 नग डेटोनेटर, 2 नग जिलेटिन रॉड, 5 मीटर इलेक्ट्रिक वायर, बैटरी, गांठ लगा हुआ कॉर्डेक्स वायर, बैटरी, काला पिट्ठू, फटाका बम, 7.65 एमएम पिस्टल का खाली खोखा, तिरपाल, पानी जरिकेन, काली वर्दी, नक्सल साहित्य, दवाएं, बर्तन।