Exclusive: टेक्नोक्रेट हेमंत वर्मा को डीएस मिश्रा ने बिजली नियामक आयोग का सिकरेट्री नहीं बनने दिया था, अब वे एक्स चीफ सिकरेट्री समेत आधा दर्जन रिटायर आईएएस को पीछे कर चेयरमैन बन गए

Update: 2021-06-27 03:14 GMT

पावर सेक्टर में कई उपलब्यिधयों के बावजूद हेमंत को नियामक आयोग में सचिव बनने से रोक दिया गया था, मगर वक्त का पहिया घूमा ओर हेमंत को मिल गई अयोग की पूरी कमान

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रायपुर, 27 जून 2021। राज्य सरकार ने टेक्नोक्रेट हेमंत वर्मा को छत्तीसगढ़ बिजली नियामक आयोग का चेयरमैन अपाइंट किया है। भिलाई के रहने वाले हेमंत रायपुर इंजीनियरिंग काॅलेज से बीई इलेक्ट्रिकल हैं। वे पिछले 30 साल से दिल्ली में हैं। और, वहां पावर सेक्टर की कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं।
चेयरमैन बनने से पहले हेमंत नियामक आयोग में सिकरेट्री बनना चाहते थे। लेकिन, लाख प्रयास के बाद भी वे इसमें कामयाब नहीं हो पाए। तत्कालीन चेयरमैन डीएस मिश्रा की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी बनी थी, उसने हेमंत को पेनल में शामिल ही नहीं किया। दरअसल, डीएस मिश्रा चाहते थे एमएस रत्नम सिकरेट्री बनें। कमेटी ने रत्नम का नाम भी सबसे उपर रखा गया। ब्रेकिंग: हेमंत वर्मा विद्युत नियामक आयोग के चेयरमैन बने….दूसरे नॉन IAS जो संभालेंगे बिजली विभाग की कमान… जानिये हेमंत वर्मा के बारे में…
सिकरेट्री नियुक्ति के समय तब के चीफ सिकरेट्री आरपी मंडल चेयरमैन से मिलने पहुंचे थे। उनकी बंद कमरे में मिश्रा से मुलाकात हुई। छत्तीसगढ़ बनने के बाद पहली बार कोई चीफ सिकरेट्री खुद चलकर नियामक आयोग का दफ्तर पहंुचा था। आयोग के सूत्रों का कहना है कि मंडल हेमंत वर्मा को सिकरेट्री बनाने के संदर्भ में चेयरमैन से मिलने पहुंचे थे। लेकिन, इसकी पुष्टि नहीं हो सकी। फिर भी सूत्रों का दावा है कि डीएस मिश्रा हेमंत वर्मा को सिकरेट्री बनाने तैयार नहीं हुए। आखिकार, एमएस रत्नम का आदेश जारी हो गया। बता दें, बीजेपी सरकार ने आखिरी समय में डीएस मिश्रा को नियामक आयोग का चेयरमैन बनाया था।
अब वक्त का पहिया घूमा….सिकरेट्री न बन पाने वाले हेमंत अब नियामक आयोग का चेयरमैन बन गए। डीएस मिश्रा के इस साल 2 अप्रैल को रिटायर होने के बाद यह पद खाली था। इसके लिए पहले रिटायर चीफ सिकरेट्री आरपी मंडल का नाम भी चला था। लेकिन, उन्होंने इसके लिए आवेदन नहीं किया। अगले महीने रिटायर होने जा रहे सीके खेतान भी इसके दावेदार हो सकते थे। मगर उन्होंने भी अप्लाई नहीं किया। एक्स चीफ सिकरेट्री सुनील कुजूर, आईएएस से इस्तीफा देने वाले शैलेष पाण्डेय समेत आधा दर्जन आईएएस जरूर इसके लिए आवेदन किए थे। लेकिन, सरकार ने रिटायर ब्यूरोक्रेट्स की बजाए टेक्नोक्रेट को इस पद पर बिठाना ज्यादा बेहतर समझा। हालांकि, इससे पहिले इंजीनियर मनोज डे भी आयोग के चेयरमैन बने थे।

मनोज के बाद हेमंत

नियामक आयोग में अभी तक दो बार टेक्नोके्रट चेयरमैन बने हैं और दोनों पहले दौर में पिछड़ने के बाद फिर सर्वाच्च पद हासिल किए। मनोज डे पहले आयोग में मेम्बर बनना चाहते थे। लेकिन, सरकार ने बीके शर्मा को मेम्बर बना दिया। और मनोज हाथ मलते रह गए थे। लेकिन, साल भर बाद ऐसा हुआ कि मनोज चेयरमैन बन गए और उनसे सीनियर बीके शर्मा उनके नीचे हो गए। इसी तरह कुछ हेमंत का हुआ है। उन्हें सिकरेट्री बनाने के योग्य नहीं समझा, वे अब आयोग के प्रमुख बन गए हैं।

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