Chhattisgarh Teacher Posting Scam: शिक्षक पोस्टिंग की जांच ईओडब्लू से क्यों नहीं? स्कूल शिक्षा विभाग की फाइल महाधिवक्ता के पास लटकी...

Chhattisgarh Teacher Posting Scam: छत्तीसगढ़ की चर्चित शिक्षक पोस्टिंग घोटाले में अफसरों ने सहायक शिक्षक से शिक्षक प्रमोशन के बाद पोस्टिंग में बड़ा खेला करते हुए बड़ी रकम अंदर कर लिया। स्कूल शिक्षा विभाग ने इसकी जांच कराने का फैसला किया था मगर जांच का ऐलान नहीं हो पाया।

Update: 2024-03-23 08:05 GMT

Chhattisgarh Teacher Posting Scam: रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शिक्षक पोस्टिंग घोटाले में स्कूल शिक्षा विभाग के ज्वाइंट डायरेक्टरों ने ब्लंडर करते हुए शिक्षकों की पोस्टिंग में करोड़ों रुपए का खेला किया था। दरअसल, सहायक शिक्षक से शिक्षक प्रमोशन पूरे प्रदेश में किया गया। प्रमोशन के बाद पोस्टिंग पर बंदिशे नहीं है। लिहाजा, ज्वाइंट डायरेक्टर आफिस से शिक्षकों की पोस्टिंग दूरस्थ इलाकों में कर दिया गया और शहरों के आसपास के स्कूलों की वैकेंसी को छुपा लिया गया। शिक्षकों ने जब अपने स्कूलों में ज्वाईन कर लिया तब उन्हें जेडी आफिस से फोन जाना शुरू हुआ कि आप दो लाख दे दो, आप ढाई लाख दे दो, आपका शहर के पास वाले फलां स्कूल में पोस्टिंग दे दी जाएगी। इसमें सैकड़ों की संख्या में पैसे लेकर ट्रांसफर किया गया। जबकि, ट्रांसफर पर बैन लगा है। बिना समन्वय यान मुख्यमंत्री के अनुमोदन के ट्रांसफर नहीं किया जा सकता। मगर समन्वय तो दूर की बात प्रदेश के खटराल ज्वाइंट डायरेक्टरों ने डीपीआई को भी बताना मुनासिब नहीं समझा और पैसे लेकर सैकड़ों की संख्या में तबादले कर दिए।

छत्तीसगढ़ के नंबर वन न्यूज वेबसाइट एनपीजी न्यूज ने सबसे पहले इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसके बाद स्कूल शिक्षा विभाग हरकत में आया और इसकी संभागायुक्तों से जांच कराई। प्रदेश के पांचों संभागों के कमिश्नर ने अपनी जांच रिपोर्ट में बताया कि ट्रांसफर में पैसे की बड़ी लेनदेन हुई है। कमिश्नरों की रिपोर्ट मिलने के बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने चार ज्वाइंट डायरेक्टरों को सस्पेंड कर दिया था। इसमें रायपुर, बिलासपुर, अंबिकापुर, दुर्ग और बस्तर के जेडी शामिल थे। इस मामले में जेडी आफिस के बाबुओं को भी सस्पेंड किया गया था।

स्कूल शिक्षा विभाग ने इस घोटाले की ईओडब्लू जांच के लिए भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था। चूकि ईओडब्लू सामान्य प्रशासन विभाग में आता है। और यह विभाग मुख्यमंत्री के पास था। तत्कालीन मुख्यमंत्री ने ईओडब्लू जांच की सिफारिश को ओपिनियन के लिए महाधिवक्ता को भेज दिया। अभी तक यह फाइल वहां से लौटकर नहीं आई हे। देखना है, अब नई सरकार इस मसले पर क्या स्टैड लेती है।

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