CG Teacher News: माशिमं व डीपीआई में तालमेल के अभाव से शिक्षकों में तनाव, टीचर्स एसोसियेशन ने कहा-प्रायोगिक/प्रायोजना व प्री बोर्ड परीक्षा एक साथ, व्यवहारिक दृष्टि से उपयुक्त नहीं...
CG Teacher News: माशिमं व डीपीआई में तालमेल के अभाव से शिक्षकों में तनाव का आरोप छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने लगाया है। साथ ही डीपीआई द्वारा 10 वीं व 12 वीं कक्षा की प्री-बोर्ड परीक्षाएं 15 जनवरी तक आयोजित करने के आदेश को व्यवहारिक दृष्टि से उपयुक्त प्रतीत नहीं बताया है।
CG Teacher News: रायपुर। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मण्डल व डीपीआई के बीच समुचित तालमेल के अभाव का खामियाजा सीधे तौर पर शिक्षक, पालक व विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है। छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने कहा है कि डीपीआई द्वारा 10 वीं एवं 12 वीं कक्षा की प्री-बोर्ड परीक्षाएं 15 जनवरी तक आयोजित करने का आदेश जारी किया गया है, जो व्यवहारिक दृष्टि से उपयुक्त प्रतीत नहीं होता।
छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मण्डल रायपुर द्वारा जारी निर्देश के अनुसार हाईस्कूल एवं हायर सेकण्डरी परीक्षा वर्ष 2026 के नियमित छात्र-छात्राओं की प्रायोगिक परीक्षा एवं प्रायोजना कार्य 1.01.2026 से 20.01.2026 के मध्य संबंधित शालाओं में संपन्न कराना अनिवार्य है। ऐसी स्थिति में एक ही अवधि में प्रायोगिक/प्रायोजना कार्य एवं प्री-बोर्ड परीक्षा दोनों का आयोजन करना अत्यंत कठिन एवं अव्यवहारिक है। प्रायोगिक वाह्य परीक्षक से संपर्क के बाद 5 जनवरी से परीक्षाएं प्रारम्भ हुई है, प्रायोजना के लिए अलग समय चाहिए, सम्बन्धित शाला के शिक्षकों को भी अन्यत्र प्रायोगिक परीक्षा लेना है, दोनो परीक्षा सम्पन्न कराने हेतु कार्यदिवस कम पड़ रहा है, इसी से शिक्षक, छात्र व पालक तनाव में है।
इस दोहरे दबाव के कारण
शिक्षकों पर मूल्यांकन, परीक्षा संचालन एवं प्रायोगिक/प्रायोजना कार्यों का अतिरिक्त भार बढ़ रहा है।
विद्यार्थियों में मानसिक तनाव एवं शैक्षणिक दबाव उत्पन्न हो रहा है।
पालकों में भी बच्चों के स्वास्थ्य एवं पढ़ाई को लेकर चिंता बढ़ रही है।
शैक्षणिक सत्र के इस महत्वपूर्ण चरण में बिना समन्वय के जारी किए गए आदेश शिक्षा की गुणवत्ता व विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के विपरीत हैं, आवश्यक है कि छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मण्डल एवं डीपीआई आपसी समन्वय स्थापित करते हुए प्री-बोर्ड परीक्षा की तिथि में युक्तिसंगत संशोधन करें, ताकि प्रायोगिक एवं प्रायोजना कार्य सुचारु रूप से संपन्न हो सकें और अनावश्यक तनाव से बचा जा सके।
शिक्षक, पालक एवं शिक्षा से जुड़े सभी पक्षकार शासन से यह अपेक्षा करते हैं कि विद्यार्थियों के हित को सर्वोपरि रखते हुए शीघ्र सकारात्मक निर्णय लिया जाए।