“जिलाध्यक्षों को प्रदेश अध्यक्ष को बर्खास्त करने का अधिकार ही नहीं है, मैं भले जिलाध्यक्षों को बर्खास्त कर सकता हूं”….जिलाध्यक्षों ने किया मनीष मिश्रा को बर्खास्त, तो प्रदेश अध्यक्ष ने कहा…..फेडरेशन के आंदोलन पर रायपुर में खूब हुआ बवाल…. होना था सरकार के खिलाफ प्रदर्शन, अपने ही प्रदेश अध्यक्ष के खिलाफ लगाने लगे मुर्दाबाद-मुर्दाबाद के नारे….

Update: 2021-09-05 07:03 GMT

रायपुर 5 सितंबर 2021। सहायक शिक्षक फेडरेशन में देर रात से शुरू हुआ विवाद रविवार की दोपहर होते बवाल बन गया। प्रोग्राम तो बना था सरकार के खिलाफ नारेबाजी का…लेकिन हालात ये बने कि प्रदर्शनकारी शिक्षक अपने ही प्रदेश अध्यक्ष के खिलाफ मुर्दाबाद-मुर्दाबाद के नारे लगाने लगे। देख लेने और दिखा देने के अजीबो-गरीब नजारों के बीच हद तो तब हो गयी कि प्रदर्शनस्थल पर ही कई जिलाध्यक्षों ने लिखित पत्र जारी कर प्रदेश अध्यक्ष मनीष मिश्रा और उनकी पूरी शीर्ष कमेटी को ही बर्खास्त कर दिया।

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हालांकि बर्खास्तगी के मुद्दे पर अभी मनीष मिश्रा का कहना है कि

” जिलाध्यक्षों को प्रदेश अध्यक्ष को बर्खास्त करने का अधिकार ही नहीं है, मैं भले जिलाध्यक्षों को बर्खास्त कर सकता हूं”

दरअसल वेतन विसंगति सहित कई मांगों को लेकर आज शिक्षक दिवस पर सहायक शिक्षक फेडरेशन ने राजधानी में पदयात्रा का ऐलान किया था। प्रदेश भर से करीब 50 हजार से ज्यादा शिक्षक रायपुर कूच कर गये थे, लेकिन शनिवार की देर रात नाटकीय घटनाक्रम में शिक्षक फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष ने प्रदर्शन को खत्म करने का ऐलान कर दिया। आरोप है कि बिना सूचना और विश्वास में शिक्षकों को लिये ही, चुपके-चुपके आंदोलन खत्म किया गया। जिसके बाद प्रदर्शन के लिए कूच कर चुके सहायक शिक्षकों को हुई उनका गुस्सा भड़क गयी।

कोई धमतरी, कोंडागांव से… जशपुर, कोरिया, सूरजपुर, सरगुजा जैसे सुदूर इलाकों से हजारों शिक्षकों को जैसे ही प्रदेश अध्यक्ष मनीष मिश्रा के चोरी छुपे मुलाकात के बाद आंदोलन को खत्म करने की जानकारी हुई, शिक्षक दंग रह गये। क्योंकि मनीष मिश्रा ने शिक्षकों को साफ कह दिया था कि 5 सितंबर का प्रदर्शन नहीं होगा। कमेटी के निर्णय के बाद आंदोलन की आगे की रणनीति तैयार होगी। मांगे नहीं मानी गयी तो 5 दिसंबर से हड़ताल किया जायेगा। लेकिन शिक्षक आंदोलन करने पर उतारू थे। मनीष मिश्रा पर दागाबाजी का आरोप लगाकर शिक्षक आंदोलन खत्म करने के ऐलान के बावजूद रायपुर पहुंच गये।

सुबह 10 बजे से आंदोलन स्थल पर हजारों की भीड़ इकट्ठा हो गयी तो बवाल बढ़ गया। सरकार के विरोध में नारा छोड़ शिक्षक अपने ही प्रदेश अध्यक्ष को दागाबाज और धोखेबाज बताने लगे। मनीष मिश्रा के खिलाफ नारेबाजी बढ़ गयी तो आक्रोश भी बढ़ गया। धरनास्थल पर मौजूद शिक्षकों का सीधा आरोप था कि प्रदर्शन को लेकर मनीष मिश्रा ने उनके साथ गद्दारी की है। सरकार से मिलने और बातचीत को लेकर शिक्षकों और जिलाध्यक्षों को विश्वास में नहीं लिया गया।

महापंचायत लगायी और फिर सीएम हाउस घेरने निकले

कल मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष ने आंदोलन खत्म करने का ऐलान कर दिया था, बावजूद आज शिक्षकों ने रायपुर में जोरदार प्रदर्शन किया। पहले प्रदर्शनस्थल पर सहायक शिक्षकों ने अपने ही प्रदेश अध्यक्ष के खिलाफ पंचायत लगायी और प्रदेश अध्यक्ष के नीयत पर सवाल खड़ा किया। फेडरेशन के आंदोलन खत्म के ऐलान के बावजूद शिक्षक आज सीएम हाउस घेरने निकले, हालांकि उन्हें स्प्रेशाला मैदान के पास रोक लिया गया। इस दौरान पुलिस से झूमा झटकी भी हुई, जिसके बाद शिक्षकों ने सड़क पर बैठ कर नारेबाजी की।

नेतृत्वविहीन प्रदर्शन की बागडोर फेडरेशन के पुराने नेताओं ने संभाली

फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष ने आंदोलन से किनारा कर लिया था, बावजूद प्रदर्शन के लिए हजारों की भीड़ रायपुर पहुंच गयी। इधर नेतृत्वविहीन प्रदर्शन की स्थिति देख कई तरह की आशंकाएं गहराने लगी थी, हालांकि इस बीच फेडरेशन के कई पूर्व नेताओं ने बागडोर संभाली और प्रदर्शन शुरू किया। सीएम हाउस घेराव भी सहायक शिक्षक पूर्व नेताओं के साथ करने निकले।

हमको जिलाध्यक्ष बर्खास्त कर ही नहीं सकता- मनीष मिश्रा

फेडरेशन के अचानक हड़ताल वापसी के ऐलान के बाद से ही सहायक शिक्षक के निशाने पर प्रदेश अध्यक्ष मनीष मिश्रा थे। सोशल मीडिया में जमकर भड़ास निकालने के बाद मनीष मिश्रा के खिलाफ प्रदर्शनस्थल पर भी नारेबाजी हुई। इसी बीच जिलाध्यक्षों ने लिखित पत्र जारी कर मनीष मिश्रा को पद से हटा दिया। हालांकि पद से हटाने के पत्र वायरल होने के बाद मनीष मिश्रा ने NPG से बात की। मनीष मिश्रा ने कहा कि …

“बर्खास्तगी की बात में कोई दम ही नहीं है… कोई जिलाध्यक्ष प्रदेश अध्यक्ष को हटा सकता है क्या, हम भले जिलाध्यक्ष को हटा सकते हैं। पंजीयन मेरे नाम से है, पंजीयक के पास मेरा नाम दर्ज है, कोई हमको ऐसे कैसे हटा देगा।….और 5-6 जिलाध्यक्ष मिलकर बोल रहे हैं प्रदेश अध्यक्ष को बर्खास्त कर दिये। 5-6 जिलाध्यक्ष हैं… प्रदेश में 28 जिलाध्यक्ष हैं, 15 जिलाध्यक्ष भी तो नहीं है, कैसे हटा देंगे। मैं निर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष हूं, कोई मनोनीत नहीं है, कि हटा देंगे। ऐसे देखिये, हटाने जैसी कोई है भी नहीं, पूरा फेडरेशन एक है और हमारे साथ है। मैं प्रदेश अध्यक्ष हूं। ऐसा हुआ था कि कार्यक्रम स्थल पर सरगुजा जैसे दूर दराज के इलाके से करीब 4-5 हजार लोग आये थे, तो कुछ जिलाध्यक्षों ने हमको फोन किये, कि वो काफी गुस्से में है, क्या करना है, तो मैंने बोला कि देख लो तुमलोगों को जैसा ठीक लगता है कर दो अभी, तो उनका गुस्सा शांत करने के लिए वो पत्र में हस्ताक्षर किया गया, उसमें बर्खास्तगी जैसी कोई बात नहीं है, मेरे साथ ही सभी लोग है, कुछ लोगों ने गुस्सा भड़काने का काम किया, हमारा संगठन बड़ा है, तो कुछ लोग होते हैं, जो चाहते हैं माहौल खराब हो, तो उन्होंने किया होगा, लेकिन मैं फिर बोल रहा हूं जिलाध्यक्ष कोई प्रदेश अध्यक्ष को हटा सकता है क्या. ?”

वहीं कार्यक्रम स्थल में नहीं आने कोलेकर सहायक शिक्षकों के भड़के गुस्से को लेकर मनीष मिश्रा ने कहा कि

हमें कल मुख्यमंत्री ने कह दिया था कि या तो प्रदर्शन कर लो या फिर 3 महीने का वक्त दो, सब ठीक कर देंगे, तो हम शिक्षक हित का ख्याल करते हुए कार्यक्रम स्थल पर नहीं गये। वैसे ये प्रदर्शन था ही नहीं, जो सरगुजा से दूर-दराज क्षेत्र से आये थे, वो बस आये थे, क्योंकि हमने रात में ही सभी जिलाध्यक्षों को कह दिया था कि बात मुख्यमंत्रीजी से हो हो गयी है, अगर तीन महीने में नहीं पूरी हुई मांग तो 5 दिसंबर से आंदोलन करेंगे, लेकिन कुछ लोग जो दूर में थे, वो आ गये।

 

फेडरेशन से मनीष मिश्रा सहित कई नेताओं की बर्खास्तगी

राजधानी रायपुर में जुटे हजारों सहायक शिक्षक और प्रत्येक जिलों से पहुंचे जिला अध्यक्षों ने आम सहमति से मनीष मिश्रा , कौशल अवस्थी, शिव मिश्रा, सुखनंदन यादव, राजकुमार यादव, राजू टंडन, अश्वनी कुर्रे, रंजीत बनर्जी , बसंत कौशिक , छोटे लाल साहू, हेमकुमार साहू को तत्काल प्रभाव से छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक फेडरेशन के प्राथमिकी सदस्यता से बाहर कर दिया।
आज के महापंचायत में लिया गया निर्णय – प्रदेश के कोने – कोने से पहुंचे हजारों की संख्या में सहायक शिक्षकों एवं जिला अध्यक्षों ने आम सहमति से उपरोक्त वर्णित सभी शिक्षक नेताओं को संघ के प्राथमिक सदस्यता से बाहर का रास्ता दिखा दिया। आज शिक्षक दिवस 05 सितम्बर के अवसर पर सहायक शिक्षकों के वेतन विसंगति के मुद्दे पर प्रदेश भर से सहायक शिक्षक भारी संख्या में उपस्थित हुए थे। उपस्थित हजारों की भीड़ में यह निर्णय लिया गया कि 05 दिसम्बर तक सहायक शिक्षकों के वेतन विसंगति को दूर नहीं किया जाता तो 06 दिसंबर से अनिश्चित कालीन आंदोलन का आगाज किया जायेगा।

देर रात आंदोलन से हाँथ खींचना , मनीष मिश्रा सहित दर्जनों नेताओं को पड़ा महंगा – 5 सितम्बर को राजधानी रायपुर में आयोजित पद यात्रा सह मुख्य मंत्री निवास घेराव कार्यक्रम को अचानक देर रात कुछ दर्जन भर नेताओं ने मुख्य मंत्री के मात्र आश्वासन बस से आंदोलन से पीछे हो जाना प्रदेश के लाखो सहायक शिक्षकों को नागवार गुजरा। आज राजधानी रायपुर में सभी जिलों से आये जिला अध्यक्षों एवं आम सहायक शिक्षकों ने मनीष मिश्रा सहित दर्जनों नेताओं को संघ से बाहर का रास्ता दिखा दिया।
आम सहायक शिक्षकों एवं जिला अध्यक्षों से चर्चा के बगैर आंदोलन स्थगित करना पड़ा महंगा – मनीष मिश्रा और टीम देर रात शिक्षा मंत्री, मुख्यमंत्री से चर्चा कर तीन माह का समय मिलने पर आंदोलन स्थगित कर दिया। जबकि सरकार द्वारा वेतन विसंगति को जल्द से जल्द दूर करने की बात शुरू से हो रही है। 5 सितम्बर के आंदोलन की तैयारी पिछले एक माह से चल रही थी। जब सारी आंदोलन की तैयारी हो गई थी और जगदलपुर , बस्तर के साथी रास्ते में थे , ऐसे में आधे रात को आंदोलन को स्थगित करना सही नहीं था। जिला अध्यक्षों और आम सहायक शिक्षकों की उपस्थिति में आज सभी निर्णय को लेना था।

मनीष मिश्रा सहित अन्य नेताओं की फेडरेशन से सदस्यता निरस्त प्रस्ताव देखें

6 दिसंबर से अनिश्चित कालीन आंदोलन – प्रदेश भर से पहुंचे जिला अध्यक्षों एवं कई हजारों की संख्या में पहुंचे आम सहायक शिक्षकों ने 6 दिसम्बर 2021 से सभी जिला अध्यक्षों के नेतृत्व में अनिश्चित कालीन आंदोलन का ऐलान कर दिया है। वही आज के महापंचायत का प्रमुख निर्णयों में मनीष मिश्रा सहित अन्य दर्जनों नेताओं जो सहायक शिक्षकों के भावनाओं के साथ खिलवाड़ किये उन्हें संघ से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। वही 05 दिसंबर तक मांग पूरा नहीं होने पर 06 दिसंबर से अनिश्चित कालीन धरना प्रदर्शन शुरू होगा।

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