AAP का बड़ा एक्शन: राघव चड्ढा को राज्यसभा उपनेता पद से हटाया, अब सदन में नहीं बन पाएंगे पार्टी की आवाज, सचिवालय को भेजा गया पत्र

Raghav Chadha: आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा को राज्यसभा उपनेता पद से हटाकर अशोक मित्तल को नियुक्त किया है। पार्टी ने चड्ढा के बोलने के समय पर भी रोक लगाने का निर्देश दिया है।

Update: 2026-04-02 11:43 GMT

फोटो: AI

नई दिल्ली/रायपुर 2 अप्रैल 2026। आम आदमी पार्टी (AAP) ने गुरुवार को एक बड़ा राजनीतिक फैसला लेते हुए सांसद राघव चड्ढा को राज्यसभा के उपनेता (Deputy Leader) पद से हटा दिया है। पार्टी ने उनकी जगह पंजाब से सांसद और लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) के फाउंडर अशोक मित्तल को यह जिम्मेदारी सौंपी है। पार्टी ने इस बदलाव के संबंध में राज्यसभा सचिवालय को पत्र भेजकर सूचित कर दिया है।

बोलने पर रोक: सचिवालय को लिखा पत्र

पार्टी की ओर से भेजे गए पत्र में एक सख्त निर्देश भी शामिल है। AAP ने सचिवालय से कहा है कि सदन में अब राघव चड्ढा को पार्टी की तरफ से बोलने का समय न दिया जाए। बता दें कि राघव 2022 से पंजाब से राज्यसभा सांसद हैं और उनका कार्यकाल 2028 तक है। हालांकि पिछले कुछ समय से उनके और पार्टी नेतृत्व के बीच दूरियां साफ देखी जा रही थीं।

क्यों हुई राघव चड्ढा पर कार्रवाई?

पार्टी ने इस फैसले की कोई आधिकारिक वजह नहीं बताई है लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे चड्ढा की 'चुप्पी' से जोड़कर देखा जा रहा है। 27 फरवरी 2026 को जब दिल्ली शराब नीति मामले में अरविंद केजरीवाल को निचली अदालत से राहत मिली थी तब राघव चड्ढा ने पार्टी के दूसरे नेताओं की तरह कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया था। वे लंबे समय से पार्टी के राजनीतिक कार्यक्रमों और आधिकारिक बयानों से दूरी बनाए हुए थे।

अशोक मित्तल होंगे नए उपनेता

राघव चड्ढा की जगह लेने वाले अशोक मित्तल जालंधर के रहने वाले हैं और एक सफल बिजनेसमैन हैं। वे 'लवली ग्रुप' के मालिक हैं और 2022 में पंजाब से राज्यसभा पहुंचे थे। पार्टी ने अब उन पर भरोसा जताते हुए उच्च सदन में बड़ी जिम्मेदारी दी है।

राघव चड्ढा का बदला फोकस

पिछले दो सत्रों (शीतकालीन 2025 और बजट 2026) के दौरान राघव चड्ढा ने पार्टी के कोर पॉलिटिकल मुद्दों के बजाय आम जनता से जुड़े विषयों पर ध्यान केंद्रित किया था। उन्होंने संसद में गिग वर्कर्स की सुरक्षा, 28 दिन के बजाय 30 दिन का मोबाइल रीचार्ज, एयरपोर्ट पर सस्ता खाना, बैंक पेनल्टी खत्म करने और 'पैटर्निटी लीव' जैसे मुद्दे उठाए थे। जानकारों का मानना है कि पार्टी के स्टैंड से अलग इन स्वतंत्र मुद्दों पर फोकस करना भी नेतृत्व को रास नहीं आया।

Tags:    

Similar News