CBI ट्रैप में फंसे बसपा के पूर्व जिलाध्यक्ष: लोन पास कराने के एवज में मांगी थी इतने की रिश्वत, गिरफ्तारी की भनक लगते ही बैंक मैनेजर फरार
एंटी करप्शन टीम ने बसपा के पूर्व जिलाध्यक्ष और बैंक रिकवरी एजेंट सुरेश चौधरी को रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया है। बैंक से 5 लाख का लोन पास कराने के एवज में उन्होंने महिला से 50 हजार रुपए की रिश्वत मांगी थी।
फोटो सोर्स- इंटरनेट, एडिट, npg.news
हरदोई 11 मार्च 2026, उत्तर प्रदेश के हरदोई में लखनऊ CBI की एंटी करप्शन टीम ने बड़ी कार्रवाई की है। टीम ने मंगलवार शाम को बसपा के पूर्व जिलाध्यक्ष और बैंक रिकवरी एजेंट सुरेश चौधरी को रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया है। बैंक से 5 लाख का लोन पास कराने के एवज में उन्होंने महिला से 50 हजार रुपए की रिश्वत मांगी थी।
क्या है पूरा मामला ?
जानकारी के मुताबिक, बघौली थाना क्षेत्र के अछारमऊ की रहने वाली सीमा देवी ने बैंक ऑफ बड़ौदा की कछौनी शाखा से मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के लिए 5 लाख रुपए के लोन के लिए अप्लाई किया था। इसके लिए उन्हें बैंक के रिकवरी एजेंट और बसपा के पूर्व जिलाध्यक्ष सुरेश चौधरी से मिलने को कहा गया तब सुरेश ने लोन पास कराने के एवज में महिला से 50 हजार की डिमांड की, लेकिन रिश्वत की रकम 45 हजार तय हुई। इसके बाद सीमा देवी ने इसकी शिकायत लखनऊ में CBI एंटी करप्शन विभाग में कर दी।
ट्रैप में कैसे फंसे सुरेश चौधरी ?
शिकायत के बाद एंटी करप्शन टीम ने ट्रैप की प्लानिंग की। मंगलवार को जब सुरेश चौधरी कछौना के मुसलमाना सपहैया स्थित अपने कार्यालय में कार्यकर्ताओं के साथ बैठे थे तभी टीम ने सीमा देवी को रिश्वत के पैसे देकर उसके पास भेज दिया और जैसे ही सुरेश चौधरी ने रिश्वत की रकम ली वैसे ही टीम ने उसे पकड़ लिया।
सुरेश चौधरी पर कौन सी धारा लगी ?
सुरेश चौधरी को लेकर टीम बालामऊ रेलवे गेस्ट हाउस पहुंची, जहां उससे 7 घंटे तक पूछताछ की गई। 7 घंटे की पूछताछ में पहले तो सुरेश ने आरोपों से इनकार कर दिया, लेकिन आखिर में उन्होंने अपना जुर्म कबूल कर लिया। इसके बाद टीम ने BNS धारा 61(2), धारा 61(2) और भ्रष्टाचार निवारण 1998 (2018 में संशोधित) की धारा 7 के तहत सुरेश चौधरी को गिरफ्तार कर लिया। बताया जा रहा है कि सुरेश चौधरी की गिरफ्तारी की भनक जैसे ही बैंक के मैनेजर को लगी तो वो फरार हो गया, जिसकी तलाश में टीम जुट गई है।
सुरेश चौधरी ने क्या कहा ?
सुरेश चौधरी का कहना है कि उन्हें राजनीतिक साजिश के तहत बदनाम करने के लिए फंसाया जा रहा है। वे जुलाई 2020 से 2022 के विधानसभा चुनाव तक हरदोई के बसपा जिलाध्यक्ष पद पर रहे। बाद में चुनाव में बेहतर प्रदर्शन न होने के कारण उन्हें जिलाध्यक्ष पद से हटा दिया गया था।