भूमाफिया और वन अफसरों का खेला, संरक्षित वन भूमि पर जारी है कब्जे का गोरखधंधा, सागौन के हरे-भरे जंगल पर बेदर्दी से चलाई कुल्हाड़ी...

CG News: उत्तर छत्तीसगढ़ के जंगलों पर भूमाफियाओं की नजरें लगी हुई है। वन विभाग के अफसरों और भूमाफियाओं के बीच गजब का सांठगांठ है। वन अफसरों की सरपरस्ती में वन भूमि पर कब्जे का खेला चल रहा है। आलम ये, सागौन के हरे-भरे जंगल पर बेदर्दी के साथ कुल्हाड़ी चल रही है।

Update: 2026-03-21 07:04 GMT

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सरगुजा। 21 मार्च 2026| उत्तर छत्तीसगढ़ के जंगलों पर भूमाफियाओं की नजरें लगी हुई है। वन विभाग के अफसरों और भूमाफियाओं के बीच गजब का सांठगांठ है। वन अफसरों की सरपरस्ती में वन भूमि पर कब्जे का खेला चल रहा है। आलम ये, सागौन के हरे-भरे जंगल पर बेदर्दी के साथ कुल्हाड़ी चल रही है। हरे भरे सागौन के जंगल को निर्जन ओर ठूंठ में बदल दिया है। वन भूमि पर कब्जे के खेल में एक दो नहीं, 150 से ज्यादा लोगों की संलिप्तता सामने आई है। वन अफसरों और भूमाफिया के सांठगांठ से जंगल की जमीन पर चल रहे कब्जे के खोल को रोकने और संरक्षित वन भूमि को सुरक्षित रखने की मांग करते हुए पार्षद आलोक दुबे ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखा है।

संभागीय मुख्यालय अंबिकापुर से लगे खैरबार, चोरकाकछार और महामाया पहाड़ और आसपास के वन भूमि पर भूमाफियाओं ने कब्जा करना शुरू कर दिया है। भूमाफियाओं और वन विभाग के आला अधिकारी से लेकर मैदानी अमलों की मिलीभगत भी सामने आने लगी है। अचरज की बात ये, वन अमले की तैनाती के बाद सागौन के जंगल के कुल्हाड़ी चल गई। दो एकड़ का जंगल अब पूरी तरह साफ हाे गया है। हरे भरे सागौन के पेड़ों की जगह ठूंठ ने ले ली है। भूमाफिया और वन विभाग का अमला राज्य सरकार को चौतरफा नुकसान पहुंचा रहे हैं। जंगल में लगे बेशकीमती इमारती लकड़ियों की तस्करी कर लाखों रुपये का नुकसान पहुंचा रहे हैं। जंगल की कटाई के बाद वन भूमि पर कब्जे का खेल चल रहा है।

पार्षद आलोक दुबे ने डीएफओ से की थी शिकायत

जंगल में हो रहे बेतरतीब कटाई और उसके बाद जमीन पर चल रहा कब्जे के खेल की शिकायत पार्षद आलोक दुबे ने डीएफओ से की थी। शिकायत करने के साथ ही दोषियों पर कार्रवाई की मांग की थी। डीएफओ अभिषेक जोगावत ने मामले की जांच करई। साथ ही खुद भी मौके पर पहुंचे तो वहां सागौन का पेड़ कटा हुआ मिला। जंगल की दुर्दशा देखकर डीएफओ ने कार्रवाई करते हुए बीट गार्ड को हटाने का आदेश जारी किया। डीएफओ के आदेश पर बीट गार्ड को हटा दिया गया ह

पार्षद आलोक दुबे ने सीएम को लिखी चिट्ठी

पार्षद आलोक दुबे ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में लिखा है,आपके संज्ञान में अंबिकापुर शहर की सीमा से लगे सघन एवं संरक्षित वन क्षेत्र जो करीब 1500 एकड़ के आस-पास का क्षेत्र है, जिसमें महामाया पहाड़, खैरबार, बधियाचुवा बाकी डेम एवं लालमाटी लुचकी का इलाका आता है। जनवरी 2025 एवं जून 2025 में महामाया पहाड़ एवं रनपुर खुर्द चोरकाकछार में जिला प्रशासन एवं वन विभाग की संयुक्त टीम ने आपके निर्देश पर करीब 100 मकानों के अतिक्रमण को हटाया था।


भूमाफियाओं और वन अफसरों की सांठगांठ

पार्षद दुबे ने पत्र में लिखा है, बहुत दुख के साथ आपको लिखना पड़ रहा है कि इसके बाद भी इस हरे भरे वन संरक्षित क्षेत्र पर अवैध कब्जा होने का सिलसिला नहीं रुक रहा है। ावन विभाग के बीटगार्ड, वन रक्षक, फॉरेस्टर, डिप्टी रेंजर रेंजर, एसडीओ फॉरेस्ट की इन भूमाफियाओं से मिली भगत एवं लाखों रुपये की अवैध वसूली के कारण ये इस संरक्षित वन क्षेत्र में हो रहे अवैध कब्जे को न तो ग्रामीणों एवं जन प्रतिनिधियों के शिकायत मिलने पर वन संरक्षित क्षेत्र में न तो जाते है, और न ही शिकायत मिलने के बाद रेंजर फॉरेस्ट एस डी ओ एवं वन मण्डलाधिकारी स्थल पर पहुंचते है।

जंगल की भूमि को संरक्षित करने व दोषी अफसरों पर कार्रवाई की मांग

पार्षद दुबे ने सीएम से मांग करते हुए लिखा है, तत्काल इस अति महत्वपूर्ण वन संरक्षित क्षेत्र जो संपूर्ण अम्बिकापुर को ऑक्सीजन प्रदान करने का कमा करता है। वन विभाग के उच्च अधिकारियों की टीम का गठन कर, क्षेत्र में हो रहे अवैध अतिक्रमण को कब्जा मुक्त कराकर अगामी बारिश में नये सिरे से पौधारोपण कराकर हरियाली वापस लाये। और अभी से कार्य जोजना बनाये एवं जाँच टीम द्वारा निरीक्षण कराकर इस क्षेत्र में होली के बाद बेतहाशा हो रहे अवैध अतिक्रमण को रोकवाये। वन विभाग के अमले पर पार्षद आलोक दुबे ने कार्रवाई की मांग की है। पार्षद दुबे ने सीएम को लिखे पत्र के साथ हाल में सागौन के जंगल की बेहतहाशा कटाई और कब्जे की फोटोग्राफ्स भी भेजा है।

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