Raipur Airport Chhattisgarhi Display : अपनी माटी की खुशबू के साथ उड़ान भरेंगे यात्री, डिसप्ले बोर्ड से लेकर अनाउंसमेंट तक में दिखेगी छत्तीसगढ़िया संस्कृति
छत्तीसगढ़ की गौरव का प्रतीक छत्तीसगढ़ी बोली अब केवल प्रदेश की गलियों और खेतों तक सीमित नहीं, बल्कि आसमान की ऊंचाइयों तक पहुंचने वाली हैं
Raipur Airport Chhattisgarhi Display : अपनी माटी की खुशबू के साथ उड़ान भरेंगे यात्री, डिसप्ले बोर्ड से लेकर अनाउंसमेंट तक में दिखेगी छत्तीसगढ़िया संस्कृति
रायपुर। Raipur Airport Chhattisgarhi Display : छत्तीसगढ़ की गौरव का प्रतीक छत्तीसगढ़ी बोली अब केवल प्रदेश की गलियों और खेतों तक सीमित नहीं, बल्कि आसमान की ऊंचाइयों तक पहुंचने वाली हैं । रायपुर के स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट ने अपनी क्षेत्रीय पहचान को सम्मान देते हुए एक बेहतरीन पहल किया है। अब एयरपोर्ट के डिस्प्ले बोर्ड पर उड़ानों की जानकारी हिंदी और अंग्रेजी के साथ-साथ छत्तीसगढ़ी में भी दिखाई देगी।
Raipur Airport Chhattisgarhi Display : डिसप्ले बोर्ड पर बखत और कोन डहर
अक्सर देखा जाता है कि हवाई अड्डों पर अंग्रेजी और कठिन सब्दो के कारण गाँव से आने वाले या कम पढ़े-लिखे यात्रियों को सूचनाएं समझने में परेशानी होती है। इस परेशानी के चलते एयरपोर्ट अथॉरिटी ने न्यू फ्लाइट इंफॉर्मेशन डिस्प्ले में बड़ा बदलाव किया है। अब फ्लाइट के समय के लिए बखत, गंतव्य के लिए कोन डहर और कहां से आ रही है के लिए कहां ले जैसे ठेठ छत्तीसगढ़ी शब्दों का प्रयोग किया जायेगा जिससे यात्री अपनी सुविधा अनुसार अपनी भाषा में जानकारी पढ़ सकें।
अनाउंसमेंट भी छत्तीसगढ़ी भाषा में
एयरपोर्ट डायरेक्टर राकेश सहाय के अनुसार, केवल डिस्प्ले बोर्ड ही नहीं, बल्कि आने वाले दिनों में एयरपोर्ट पर होने वाले अनाउंसमेंट भी छत्तीसगढ़ी भाषा में सुनाई देंगे। इससे उन यात्रियों को सबसे ज्यादा मदद मिलेगी जो बस्तर, सरगुजा या छत्तीसगढ़ के भीतरी इलाकों से पहली बार हवाई सफर कर रहे हैं।
हवाई सफर अब आम हो गया
आंकड़े बताते हैं कि छत्तीसगढ़ में हवाई यात्रा करने वालों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। साल 2018 के बाद से एसी ट्रेनों में सफर करने वालों की तुलना में हवाई यात्रियों की संख्या बढ़ी है। अब हवाई सफर किसी विशेष वर्ग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि किसान, व्यापारी और छात्र भी इस सफ़र का हिस्सा बन रहे हैं
अधिकारों का सम्मान
अपनी मातृभाषा में जानकारी प्राप्त करना और उसका संरक्षण करना हर नागरिक का अधिकार है। रायपुर एयरपोर्ट की यह पहल उसी दिशा में एक बड़ा कदम है। यह बताती है कि आधुनिकीकरण का मतलब अपनी संस्कृति को भूलना नहीं, बल्कि उसे साथ लेकर आगे बढ़ना है।