Mohla Manpur Ambagarh Chowki: डेडलाइन से पहले माओवादियों के हथियारों का जखीरा बरामद, AK-47, एक INSAS रायफल मैगजीन सहित 46 जिंदा कारतूस मिले...
Mohla Manpur Ambagarh Chowki: छत्तीसगढ़ में नक्सल मुक्त डेडलाइन से पहले माओवादियों के हथियारों का जखीरा सुरक्षाबलों ने बरामद किया है। इनमें एके-47, रायफल सहित 46 जिंदा कारतूस है...
Mohla Manpur Ambagarh Chowki: छत्तीसगढ़ के मोहला मानपुर अंबागढ़ चौकी पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। जवानों ने नक्सली डंप बरामद किया है। जिला पुलिस के द्वारा नक्सल विरोधी अभियान के तहत माओवादियो के पूरे ईको सिस्टम को ध्वस्त करने के लिए पुलिस से लूटे हथियारों की जप्ती के प्रयास जारी है। इसी कड़ी में राजनांदगांव रेंज आईजी बालाजी राव के निर्देश में एक और सफलता मिली है।
आज मुखबीर की सूचना पर जिला पुलिस, डीआरजी व आईटीबीपी फोर्स जिला कांकेर थाना कोडेकुरसे सीमा क्षेत्र गाँव कोवाचीटोला व थाना मदनवाड़ा के कलवर जंगल मे नक्सलियों द्वारा छुपाए डंप की सर्चिंग के लिए रवाना हुई थी।
करीब 4-5 घंटों की सघन सर्चिंग के बाद टेकरी पर स्थित नाला किनारे कटे हुए पेड़ के नीचे काले पालिथीन मे लपेटी हुई एक बड़ी बंडल मिली । चेक करने पर काले पालिथीन मे लपेटी हुई दो आटोमेटिक हथियार मैगजीन के साथ बरामद की गई।
जिला पुलिस व आईटीबीपी फोर्स के द्वारा विशेष प्रयास से दोनों आटोमेटिक हथियार भरी हुई मैगजीन के साथ बरामद कर कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
बरामद हथियारों का विवरण
1. आटोमेटिक रायफल AK-47 मय मैगजीन 26 राउंड
2. आटोमेटिक रायफल INSAS मय मैगजीन 20 राउंड
मालूम हो कि मोहला मानपुर अंबागढ़ चौकी में वर्ष 1985 के आसपास थाना औंधी क्षेत्र मे माओवादियों का प्रवेश हुआ और बस्तर क्षेत्र से सटे होने के कारण इस क्षेत्र मे आधार बनाना शुरू किए। नक्सली महाराष्ट्र और छग सीमा के गांवों मे जाकर ग्रामीणों से मिलना और नक्सली विचारधारा का प्रचार प्रसार लगातार कर रहे थे । नक्सलियों ने 41 वर्षों मे कई बड़ी घटनाओ को अंजाम दी है ।
माओवादी संगठन के द्वारा इस क्षेत्र का नामकरण मानपुर डिवीजन किया गया और आंध्रप्रदेश से आए केन्द्रीय सदस्य माओवादी श्रीकांत उर्फ सुकान्त ने वर्ष 2003 मे मानपुर डिवीजन का विस्तृत सर्वे कराकर हथियार बंद दस्ता की शुरुआत किया ।
2009-2010 वर्ष के दौरान दण्डकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के अंतर्गत मानपुर डिवीजन अंतर्गत 4 एरिया कमेटी सक्रिय थे । इन 4 चारों एरिया कमेटी के भीतर 7 लोकल ऑर्गेनाइजेशन स्क्वाड, 2 लोकल गुरिल्ला स्क्वाड एवं एक प्लाटून सक्रिय थे ।
वर्ष 2009 मे शहीद विनोद चौबे तत्कालीन पुलिस अधीक्षक राजनांदगांव सहित 29 जवानों के शहादत के समय मानपुर क्षेत्र मे केन्द्रीय सशस्त्र बलों की नियुक्ति की गई । जिला पुलिस और केन्द्रीय सशस्त्र बल के संयुक्त अभियानों से माओवादी बैकफूट पर आए ।
जिला मे चलाए गए नक्सल विरोध अभियान मे 18 नक्सली अभी तक ढेर किए गए। 33 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा मे शामिल हुए ।
सितंबर वर्ष 2012 मे आयोजित माओवादी संगठन के मानपुर डिवीजन के दुसरे प्लिनम द्वारा पारित प्रावधान अनुसार मानपुर डिवीजन का नाम परिवर्तन कर राजनांदगांव-कांकेर बार्डर डिवीजन ( Rajnandgaon Kanker Border Division ) नाम रखा गया ।
सितंबर 2022 की स्थिति मे नवीन जिला बनने के समय माओवादी संगठन मे केवल 2 एरिया कमेटी और 2 लोकल ऑर्गेनाइजेशन स्क्वाड सक्रिय थे । जो आज की स्थिति मे निरंक है ।
इस जिले से माओवादी संगठन मे भर्ती हुए सभी जिला मूल निवासी आत्मसमर्पण कर चुके है या फिर किसी पुलिस नक्सली मुठभेड़ मे मारे जा चुके है । साथ ही बस्तर या किसी अन्य क्षेत्र के निवासी नक्सली इस जिले मे सक्रिय नही है ।