रेप में आरोपी की मदद करने वाली महिला को हाई कोर्ट ने सुनाई 10 साल की सजा, नाराज कोर्ट ने की तल्ख टिप्पणी

High Court News: दुष्कर्म में आरोपी की मदद करने वाली एक महिला को दिल्ली हाई कोर्ट ने 10 साल कठोर कारावास की सजा सुनाई है, दोषी महिला को 70 हजार रुपये जुर्माना भी ठोका है। पीड़िता को बतौर क्षतिपूर्ति जुर्माने की राशि में से 50 हजार रुपये देने का निर्देश दिया है।

Update: 2026-03-30 08:45 GMT

इमेज सोर्स- गूगल, एडिट बाय- NPG News

दिल्ली। 30 मार्च 2026|दुष्कर्म में आरोपी की मदद करने वाली एक महिला को दिल्ली हाई कोर्ट ने 10 साल कठोर कारावास की सजा सुनाई है, दोषी महिला को 70 हजार रुपये जुर्माना भी ठोका है। पीड़िता को बतौर क्षतिपूर्ति जुर्माने की राशि में से 50 हजार रुपये देने का निर्देश दिया है। बता दें, ट्रायल कोर्ट ने महिला को बरी कर दिया था। ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए राज्य सरकार ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। ट्रायल कोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है, दोषी महिला ने इस अपराध मे जान-बूझकर भूमिका निभाई थी। पीड़िता को बाद में धमकाया भी था।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है, दोषी महिला ने पीड़िता को बहलाया-फुसलाया, दुष्कर्म की घटना के दौरान वह मौके पर मौजूद रही, और बाद में उसने पीड़िता को धमकाया भी। मामले की सुनवाई के दौरान, दोषी महिला ने कोर्ट से सजा पर नरमी बरतने की गुहार लगाई। महिला ने कहा, वह तकरीबन 9 महीने तक हिरासत में रही है। उसका एक पांच साल का बच्चा है, जिसकी देखभाल करने वाला कोई और नहीं है।

कोर्ट ने कहा,दोषी महिला के आचरण में सुधार के कोई संकेत नहीं

कोर्ट ने महिला की दलीलों और किए गए अपराध की गंभीरता को देखते हुए सजा कम करने की मांग को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा, मौजूदा अपराध को अंजाम देने के बाद भी दोषी महिला के आचरण में सुधार का कोई संकेत नहीं दिखा। जैसा कि रिकॉर्ड में दर्ज है, वह बाद में कई अन्य आपराधिक मामलों में भी शामिल रही है, जिनमें हत्या जैसे जघन्य अपराध के मामले भी शामिल है। वर्तमान में वह न्यायिक हिरासत में है। दोषी महिला का बाद में भी गंभीर अपराधों में शामिल होना यह साबित करता है, उसने आपराधिक गतिविधियों में लिप्त होना बंद नहीं किया।

कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है, जहां कोई कानून किसी अपराध के लिए न्यूनतम सज़ा निर्धारित करता है, वहां अदालतें उस न्यूनतम सज़ा से कम सज़ा नहीं सुना सकती। फिर चाहे मुक़दमे का लंबा चलना या व्यक्तिगत परिस्थितियां जैसी कोई भी नरमी बरतने लायक वजहें क्यों न मौजूद हों।

जुर्माने की राशि 70 हजार में से 50 हजार रुपये बतौर मुआवजा पीड़िता को देने का निर्देश

कोर्ट ने दोषी महिला को IPC की धारा 376, धारा 109 के तहत 10 साल कठोर कारावास की सजा के साथ ही 70 हजार रुपये का जुर्माना ठोका। कोर्ट ने कहा, पीड़िता ने एक दशक से भी अधिक समय तक न्याय के लिए संघर्ष किया। लिहाजा जुर्माने की राशि 70 हजार रुपये में से 50 हजार रुपये पीड़िता को मुआवज़े के तौर पर देने का निर्देश दिया।

Tags:    

Similar News